संग्रहालय नहीं, संगीत महसूस करने वाला केंद्र: सामवेद से तानसेन तक... 5000 साल की संगीत यात्रा अब सिर्फ सुनेंगे नहीं, देखी और महसूस की जा सकेगी... - Bhopal News
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हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में सामवेद के मंत्रों से जन्मे सुर, ग्वालियर घराने की परंपरा, तानसेन और बैजू बावरा की अमर विरासत अब एक ही स्थान पर देखी, सुनी और महसूस की जा सकेगी। यूनेस्को से सिटी ऑफ म्यूजिक का दर्जा प्राप्त कर चुके ग्वालियर के मोती महल में 25 करोड़ रुपए की लागत से देश का अपनी तरह का पहला म्यूजियम ऑफ म्यूजिक बनाया जा रहा है।
दैनिक भास्कर पहली बार अपने पाठकों के लिए इस अनूठे म्यूजियम की गैलरियों और इंटीरियर डिजाइन की एक्सक्लूसिव झलक प्रस्तुत कर रहा है। संग्रहालय में एक विशेष गैलरी आदिवासी और जनजातीय संगीत को समर्पित होगी, जहां भारत की आदि संगीत परंपरा को आधुनिक तरीके से प्रस्तुत किया जाएगा।
संग्रहालय नहीं, संगीत महसूस करने वाला केंद्र
यह संग्रहालय पारंपरिक म्यूजियम से अलग होगा। यहां शांत रस के लिए डार्क रूम बनेगा। इसमें संगीत की अंतिम अनुभूति मौन के माध्यम से कराई जाएगी। पर्यटक प्रोफेशनल रिकॉर्डिंग स्टूडियो में अपनी आवाज रिकॉर्ड करा सकेंगे, जबकि मोती महल की छत पर बनने वाले ओपन एयर परफॉर्मेंस एरीना में शास्त्रीय संगीत समारोह होंगे। दीवारों पर राग-रागिनी भित्तिचित्र भी इस परियोजना का हिस्सा बनेंगे।
- सा : ‘नाद ब्रह्म’ और मां सरस्वती को समर्पित गैलरी, जहां ब्रह्मांडीय ध्वनि का अनुभव कराया जाएगा।
- रे : सामवेद से आधुनिक काल तक भारतीय शास्त्रीय संगीत की विकास यात्रा, दुर्लभ वाद्ययंत्र और डिजिटल टाइमलाइन।
- ग : ग्वालियर घराना, राजा मानसिंह तोमर, तानसेन और बैजू बावरा की संगीत साधना को ऑडियो-विजुअल तकनीक से जीवंत किया जाएगा।
- म : मध्यप्रदेश के लोक और जनजातीय संगीत की समृद्ध परंपरा को समर्पित गैलरी।
- प : मोती महल की ऐतिहासिक राग-रागिनी पेंटिंग्स को मूल स्वरूप में प्रदर्शित किया जाएगा।
- ध : भारतीय शास्त्रीय और लोक संगीत के दुर्लभ वाद्ययंत्रों का विशेष संग्रह।
- नि : पारंपरिक वाद्ययंत्र बनाने वाले कारीगरों की लाइव वर्कशॉप और प्रदर्शन।
क्यों होगा म्यूजियम देश में सबसे अलग
1. बेंगलुरु का इंडियन म्यूजिक एक्सपीरियंस म्यूजियम भारतीय संगीत की परंपराओं को आधुनिक तकनीक के साथ प्रस्तुत करता है, लेकिन ग्वालियर का यह संग्रहालय विरासत-अनुभव के कारण अलग होगा।
2. यह पहला संग्रहालय, जहां हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत विकास यात्रा उसी धरती पर प्रस्तुत की जाएगी, जहां इस परंपरा ने सबसे मजबूत स्वर पाए। 19वीं सदी के मोती महल में यह संग्रहालय मूल राग-रागिनी भित्तिचित्रों को अपनी कहानी का हिस्सा बनाएगा।
3. पूरे संग्रहालय की डिजाइन भारतीय संगीत के 7 सुर-सा से नि पर आधारित होगी। यहां पर्यटक सामवेद से लेकर ध्रुपद, ग्वालियर घराना, तानसेन, बैजू बावरा और सरोद परंपरा तक की पूरी संगीत यात्रा को देख और अनुभव कर सकेंगे।
देश के अपनी तरह के पहले म्यूजियम के टेंडर जारी हो चुके हैं और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होगा। -इलैया राजा टी, प्रबंध संचालक एमपी टूरिज्म बोर्ड