इंदौर में जोरशोर से निकली अहिल्या पालकी: कई समाजों की झांकियां बनीं आकर्षण, 51 बटुक,अखाड़े, घड़सवार महिलाएं शामिल - Indore News

लोकमाता देवी अहिल्याबाई की 231वीं पुण्यतिथि पर इंदौर में अहिल्या उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। गांधी हॉल से गुरुवार शाम परंपरागत पालकी यात्रा शुरू हुई। यात्रा में बड़ी संख्या में शहरवासी शामिल हुए। ढोल-ताशों, भजन मंडलियों, झांकियों और अखाड़ों ने

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माता अहिल्या बाई की पालकी की शुरुआत पूरे विधि विधान के साथ गांधी हाल से शुरुआत हुई जहां पुलिस बैंड ने इस पालकी यात्रा की अगवानी की। वहीं बग्घी पर सवार हाथों में शिवलिंग लिए माता अहिल्या बाई का रूप लिए युवती में माता अहिल्या बाई की ही छवि दिखाई दी जो कि आकर्षण का केंद्र रही । यात्रा में मंत्री तुलसीराम सिलावट सांसद शंकर लालवानी, विधायक गोलू शुक्का सहित कई जनप्रतिनिधि शामिल हुए। पालकी यात्रा का इंदौर शहर के प्रमुख मार्ग पर कई मंचों से स्वागत हुआ।

यात्रा में शहर की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता भी दी। मराठी समाज के साथ विभिन्न समाजों की झांकियां शामिल रही। वहीं अखाड़ों के प्रदर्शन, युवतियों का अखाड़ा, 51 बटुक, अहिल्या सेना और दुर्गा वाहिनी के शस्त्र प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र बना। यात्रा में होलकर राजाओं के प्रतिरूप भी शामिल रहे।

गांधी हॉल से राजबाड़ा होते हुए गोपाल मंदिर तक पहुंची

पालकी यात्रा गांधी हॉल से शुरू होकर कोठारी मार्केट, तोपखाना, श्रीकृष्ण टॉकीज, वीर सावरकर मार्केट, माता लक्ष्मी मंदिर और राजबाड़ा होते हुए गोपाल मंदिर पहुंची। यहीं यात्रा का समापन हुआ। यात्रा में झंडासिंह व्यायामशाला और मल्हारी मार्तंड व्यायामशाला के अखाड़े भी शामिल रहे। आयोजकों के अनुसार ये दोनों अखाड़े वर्ष में केवल अहिल्या पालकी यात्रा के दौरान निकलते हैं।

सुबह राजबाड़ा पर माल्यार्पण, अहिल्या स्तुति से शुरू हुआ उत्सव

अहिल्या उत्सव के तहत गुरुवार सुबह राजबाड़ा स्थित अहिल्या उद्यान में लोकमाता की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इसके बाद सामूहिक अहिल्या स्तुति हुई। सुबह 9 बजे गोपाल मंदिर में शाम की पालकी में विराजित की जाने वाली देवी प्रतिमा का पूजन किया गया। वहीं 9.30 बजे पंढरीनाथ स्थित इंद्रेश्वर महादेव मंदिर में रुद्राभिषेक हुआ।

गांधी हॉल में दोपहर 3.30 बजे गुणीजन सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इसके बाद शाम को पालकी यात्रा निकली। यह अहिल्या उत्सव का 111वां वर्ष है।

कई समाजों की झांकियां बनीं आकर्षण

आयोजन में मराठी समाज के साथ शहर के विभिन्न समाजों की भागीदारी देखने को मिली। अलग-अलग समाजों की झांकियों के जरिए उनकी परंपरा और संस्कृति दिखाई गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और शहरवासी पालकी यात्रा के मार्ग पर मौजूद रहे।