घर-घर से कचरा उठाने की व्यवस्था चरमराई: 523 में से 200 सफाई गाड़ियां कबाड़ बनीं, नई खरीदने की योजना नए नियमों में अटकी - Patna News
पटना51 मिनट पहले
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बिना ढंके कूड़ा उठाकर ले जाती निगम की गाड़ी।
- पिछले साल दिसंबर में ही बनी थी 750 गाड़ियों की खरीद की योजना
पटना के सभी 75 वार्डों के घर-घर से कचरा उठाने की व्यवस्था चरमरा गई है। नगर निगम का सफाई बेड़ा ही जर्जर हो चुका है। 523 सफाई वाहनों में से करीब 200 कबाड़ बन चुके हैं, जिनकी अब मरम्मत भी मुमकिन नहीं है। पटना जंक्शन के पास स्थित मल्टीलेवल पार्किंग का दूसरा तल इन कंडम वाहनों का कब्रिस्तान बन चुका है। इधर, नए वाहनों की खरीद का प्रस्ताव 9 महीनों से फाइलों में दबा है। नगर विकास विभाग द्वारा आउटसोर्सिंग की नई गाइडलाइन जारी किए जाने के 5 महीने बीत जाने के बाद भी निगम प्रशासन अब तक खरीद की मानक संचालन प्रक्रिया तक तैयार नहीं कर सका है।
डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने वाले ई-रिक्शा, क्लोज टिपर से लेकर ट्रांसफर स्टेशन और बैरिया ट्रेंचिंग ग्राउंड तक कचरा ले जाने वाले हाइवा तक खस्ताहाल हैं। सड़कों पर दौड़ रही अधिकतर गाड़ियों की हेडलाइट फूटी है, तो कई बिना फ्रंट ग्लास के चल रही हैं। ये गाड़ियां रास्ते भर कचरा और दुर्गंध फैलाते हुए गुजरती हैं। नगर निगम बोर्ड की बैठक हो या कंट्रोल रूम का हेल्पलाइन नंबर, पार्षदों और आम नागरिकों की सबसे ज्यादा शिकायतें खराब वाहनों और समय पर कचरा न उठने को लेकर ही दर्ज हो रही हैं।
नया नियम क्या : अब एक ही एजेंसी वाहनों के रखरखाव, तेल और ड्राइवर सबका इंतजाम करेगी, इसी शर्त पर होगी नई खरीद
दिसंबर में पास हुआ था प्रस्ताव, नए नियमों से अटका टेंडर
कचरा संकट को दूर करने के लिए पिछले साल 15 दिसंबर को नए वाहन खरीदने का प्लान तैयार किया गया था। स्थायी समिति की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी भी दी गई थी। इसके तहत 150 ई-रिक्शा, 150 क्लोज टिपर, 75 ओपन टिपर और 375 हाथ ठेलों की खरीद होनी थी। साथ ही दो सुपर सकर मशीन और तीन मिनी पोकलेन खरीदने को भी मंजूरी दी गई थी। योजना थी कि हर वार्ड में 5 नए ठेले देकर और 5 पुराने ठेलों की मरम्मत कर 10-10 ठेले तैनात किए जाएं। लेकिन, विभाग के नए नियम आने के बाद सबकुछ रोक दिया गया।
क्यों बिगड़ी बात, आगे रास्ता क्या
- समस्या : 200 से अधिक गाड़ियां खराब होने से 75 वार्डों में समय पर डोर-टू-डोर कचरा नहीं उठ रहा। जो चल रही हैं, वे भी रास्ते भर कचरा गिराती हैं।
- लापरवाही : दिसंबर में प्रस्ताव पास होने के बावजूद टेंडर नहीं हुआ। विभाग की नई गाइडलाइन आने के बाद 5 महीने से सिर्फ बैठकों का दौर चल रहा है, एसओपी नहीं बनी।
- समाधान : आउटसोर्सिंग एजेंसी के चयन की प्रक्रिया युद्धस्तर पर पूरी कर वार्डों में नई ई-रिक्शा और टिपर उतारे जाएं और कंडम वाहनों की तुरंत नीलामी हो।
एसओपी जल्द बनेगा : मेयर : विभाग की नई गाइडलाइन आने के बाद वाहनों की खरीद का प्रस्ताव रुक गया है। यह बात सही है कि डोर-टू-डोर कचरा उठाव में दिक्कत हो रही है। जल्द ही एसओपी तैयार करके अगली बैठकों में इसपर तेजी से काम होगा। आउटसोर्स एजेंसियों के काम को देखने और समझने के लिए पार्षदों और अफसरों की टीम लखनऊ गई है। वहां से लौटने के बाद टीम के सुझावों के आधार पर इस दिशा में काम तेज किया जाएगा। -सीता साहू, मेयर
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