साइबर अपराध पर बड़ा खुलासा: 53.93 लाख शिकायतों में सिर्फ 1.30 लाख FIR, फुटेज में देंखे 2.4% मामलों में ही हुई कार्रवाई

देश में साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच एक चिंताजनक आंकड़ा सामने आया है। वर्ष 2019 से 2024 के बीच नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर साइबर अपराध से जुड़ी 53.93 लाख शिकायतें दर्ज की गईं, लेकिन इनमें से सिर्फ 1.30 लाख मामलों में ही FIR दर्ज हुई। यानी कुल शिकायतों के महज 2.4 फीसदी मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई।
यह जानकारी राज्यसभा की गृह मामलों से संबंधित स्थायी समिति की रिपोर्ट में सामने आई है। 31 सदस्यीय इस समिति के अध्यक्ष डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल हैं। समिति ने साइबर अपराध के मामलों में शिकायत, FIR और आगे की कार्रवाई के बीच बड़े अंतर पर चिंता जताई है।
रिपोर्ट के मुताबिक साइबर अपराध की शिकायतों के लिए सरकार की ओर से नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 की व्यवस्था की गई है। इन माध्यमों के जरिए बड़ी संख्या में लोग ऑनलाइन ठगी, बैंकिंग फ्रॉड, फर्जी निवेश, डिजिटल अरेस्ट, सोशल मीडिया अपराध और अन्य साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। हालांकि, शिकायतों की तुलना में FIR दर्ज होने की संख्या काफी कम रही है।
समिति ने साइबर अपराध से जुड़े आंकड़ों और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी चिंता जाहिर की है। रिपोर्ट में इस बात पर ध्यान देने की जरूरत बताई गई है कि पोर्टल पर दर्ज शिकायतों को पुलिस स्तर पर किस तरह आगे बढ़ाया जाता है और किन मामलों में FIR दर्ज नहीं हो पाती।
साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ठगी के तुरंत बाद 1930 पर शिकायत करने और साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज कराने से रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने की कोशिश की जा सकती है। इसके बावजूद शिकायतों और FIR की संख्या में इतना बड़ा अंतर साइबर अपराध से निपटने की मौजूदा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करता है।
समिति ने अपराध के आंकड़ों और जमीनी स्तर पर कानून-व्यवस्था से जुड़े दावों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई है। साइबर अपराध की प्रकृति पारंपरिक अपराधों से अलग होने के कारण इसमें तकनीकी विशेषज्ञता, तेज जांच और विभिन्न राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय की आवश्यकता होती है।
साइबर अपराध लगातार नए तरीकों के साथ सामने आ रहा है। ऐसे में केवल शिकायत दर्ज करने की सुविधा पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिकायत से लेकर FIR, जांच, धन की रिकवरी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तक पूरी प्रक्रिया को प्रभावी बनाना जरूरी है। स्थायी समिति की रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े इसी चुनौती की ओर संकेत करते हैं।