54 जलाशय सूखे, 36 प्रतिशत कम पानी...भारत में कितना बड़ा होने जा रहा है पानी संकट?

जलाशयों में पानी की उपलब्धता में कमी
देश के कई हिस्सों में पिछले 10 से 15 दिनों में अच्छी बारिश हुई है. गुजरात, कश्मीर और असम के कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात हैं. बिहार जैसे राज्यों में नदियां उफान पर हैं. लेकिन अच्छी बारिश के बावजूद देश के कई जलाशयों की जो स्थिति है, वह चिंता बढ़ाने वाली है. सेंट्रल वॉटर कमीशन (CWC) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक भारत के 166 प्रमुख जलाशयों में पानी का भंडारण अभी भी सामान्य से कम है. यह स्थिति तब है, जब देश में आधा मॉनसून बीत चुका है.
केंद्रीय जल आयोग (CWC) की तरफ से पेश किए गए आंकड़ों के 23 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार देश के 166 बड़े जलाशयों में 70.432 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) पानी है. यह उनकी कुल लाइव स्टोरेज क्षमता का सिर्फ 38.37 प्रतिशत है. यह पिछले साल की तुलना में तकरीबन 36 प्रतिशत कम है. लेकिन यह स्तर अब भी एवरेज औसत के करीब है, लेकिन एक साल के जलाशयों में पानी के स्टोरेज में इतनी बड़ी गिरावट चिंता का विषय जरूर है.
जलाशयों में सबसे कम पानी कहां?
दक्षिण भारत के 47 प्रमुख जलाशयों में पानी उनकी क्षमता का केवल 30.26% है। यह पिछले वर्ष और सामान्य दोनों स्तरों से काफी कम है. खासतौर पर तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल के कई जलाशयों में पानी का जो स्टोरेज बचा हुआ है, वह काफी गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है. तेलंगाना के जलाशयों में तो सामान्य से करीब 57% कम पानी दर्ज किया गया है.
उत्तर भारत और मध्य भारत के जलाशयों की भी स्थिति बहुत सही नहीं है. यह भी जलाशयों में पानी का स्तर सामान्य से कम है. उत्तर भारत में जलाशय सिर्फ 35.58% क्षमता तक भरे हैं. वहीं, मध्य भारत के जलाशयों में सिर्फ 39.11% पानी है. हालांकि, पूर्वी भारत और पश्चिमी भारत में पिछले 2-3 हफ्तों तक हुई बारिश का फायदा मिला है. असम, मेघालय, ओडिशा , महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा में जलाशयों में पानी का भंडारण सामान्य से अधिक है. लेकिन इसके बावजूद, इसका स्तर पिछले साल के बराबर नहीं है.

Jalasay
राज्य स्तर पर जलाशयों की क्या स्थिति है?
- तेलंगाना जलाशयों में पानी सामान्य से 57% कम है. यह सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में से एक है.
- कर्नाटक के जलाशयों में इस वर्ष पानी का स्तर पिछले साल की तुलना में लगभग 40% कम है. राज्य सरकार के मुताबिक यहां के जलाशयों में मात्र 40% पानी बचा
- केरल जलाशयों में सामान्य से कम पानी है. यहां भी पिछले साल की तुलना में 40 प्रतिशत पानी कम है. पेरियार जैसे बड़े जलाशय भी प्रभावित हैं.
- तमिलनाडु के जलाशयों में भी कुल क्षमता का औसतन करीब 41% पानी उपलब्ध है.
- मध्य प्रदेश के जलाशयों में भी 39-40 प्रतिशत तक पानी बचा हुआ है.
- उत्तर प्रदेश के जलाशयों में जुलाई की शुरुआत में 43 से 45 प्रतिशत तक पानी उपलब्ध था.
सूखने की कगार पर कितने जलाशय
केंद्रीय जल आयोग (CWC) की रिपोर्ट में 166 में से 54 जलाशयों में पानी सामान्य स्तर के 80% या उससे भी कम है.इनमें से 22 जलाशयों में सामान्य के आधे या उससे भी कम पानी बचा है. इनमें श्रीशैलम, नागार्जुन सागर, तुंगभद्रा, कृष्णराज सागर, पेरियार, तवा, वैगई, अलीयार और सिंगूर जैसे महत्वपूर्ण जलाशय शामिल हैं.
क्यों जलाशयों में पानी के भंडारण में आई कमी?
- अब सवाल यह उठ रहा है कि हाल के दिनों में बारिश हुई है, तो फिर जलाशयों में पानी के स्टोरेज में इजाफा क्यों नहीं हो रहा है. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह मॉनसून का असमान वितरण है. जून के महीने में देशभर में तकरीबन 40% बारिश की कमी रही.
- मानसून के दौरान 16 से 22 जुलाई के बीच देश में लगभग सामान्य बारिश हुई, लेकिन 1 जून से 25 जुलाई तक कुल बारिश अब भी 15% कम रही. इसका साफ अर्थ यह हुआ कि अब भी शुरुआती मानसून की कमी की भरपाई अभी तक नहीं हो सकी.
- कम समय में अधिक बारिश के चलते भी जलाशयों में पानी का स्टोरेज सही से नहीं हो पा रहा है. दरअसल, जब अत्याधिक और तेज बारिश होती है, तो पानी जलाशयों में जमा होने की बजाय कई बार तेजी से बाहर निकल जाता है. इससे बांधों को अपेक्षित मात्रा में पानी नहीं मिल पाता.
- जलाशयों में पानी की कमी से जलविद्युत उत्पादन, उद्योग से लेकर सिंचाई तक की दिक्कत आती है. ऐसे में जैसे ही जलाशयों में पानी की उपलब्धता होती है, इन कामों में इसका इस्तेमाल कर लिया जाता है. यह भी जलाशयों में पानी के स्टोरेज की क्षमता को प्रभावित करता है.
यही स्थिति रही तो आ सकता है बड़ा जल संकट
अगर आने वाले दिनों में बारिश नहीं होती है और जलाशयों में पानी की कमी रहती है तो इसका पहला असर खरीफ खेती पर दिखाई देगा. फसलों की उत्पादकता प्रभावित हो सकती है. इसके अलावा शहरों में पीने के पानी की आपूर्ति, उद्योगों के लिए जल उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है. इसके अलावा जलविद्युत उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है. इससे बिजली उत्पादन क्षमता में कमी आ सकती है. परिणाम के तौर पर भारी बिजली संकट का सामना करना पड़ सकता है. वहीं, जल संकट इस स्थिति में मुंह बाए खड़ा ही है.

सचिन धर दुबे
सचिन धर दुबे को डिजिटल पत्रकारिता में करीब 7 साल का अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में न्यूज 18 से की. फिर गांव कनेक्शन, ANI, आजतक होते हुए अब TV9 Hindi तक पहुंचे. न्यूज 18 में असाइनमेंट पर कॉपी एडिटर, गांव कनेक्शन में मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट, ANI में कंटेंट राइटर और आजतक में सीनियर सब एडिटर पद पर काम किया. सचिन ने कृषि पत्रकारिता में काफी समय बिताया. उनकी राजनीति, विश्व, स्पोर्ट्स, हिस्ट्री ओरिएंटेड विषयों पर लिखने में काफी इंटरेस्ट है. सचिन ने गांव कनेक्शन में रहते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग में भी हाथ आजमाया है. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से Msc इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के रहने वाले हैं.
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