अयोध्या: 5500 में से कैसे चुने गए तीन नाम? राम मंदिर CEO चयन की Inside Story

राम मंदिर को कल मिलेगा पहला CEO
Ram Mandir CEO Selection: राम मंदिर को कल नया CEO मिल सकता है. तीन सदस्यीय चयन समिति ने ट्रस्ट को अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंप दी है. बंद लिफाफे में 3 लोगों के नाम सौंपे गए हैं. दो सितंबर को ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक होगी. इसमें राम मंदिर के पहले सीईओ के नाम की घोषणा हो सकती है. मीडिया से बात करते हुए ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी ने कहा है कि हमने न्यास की ओर से चयन समिति के तीनों महानुभावों से प्रार्थना की थी कि वे हमारा मार्गदर्शन करें. यह इसलिए क्योंकि हम इतने बड़े इस विश्व प्रसिद्ध मंदिर का उत्तम प्रबंधन करने के लिए एक उत्तम CEO की खोज में रहे हैं. लेकिन हम खोज कैसे करेंगे, इसलिए हमने जस्टिस कोहली, चतुर्वेदी जी और सुरेश हावरे जी से प्रार्थना की थी. तीनों ने मिलकर दिन-रात काम करके, सुबह से शाम तक इंटरव्यूज लेते-लेते 5500 आवेदन में से पहले 3000 छांटे.
5500 में से पहले छांटे 3000… फिर 16 का हुआ साक्षात्कार
इसके बाद 1500 छांटे गए और फिर 300 उसमें से निकलकर आए और फिर 16 लोगों का यहां पर साक्षात्कार लिया गया. यह साक्षात्कार भी अकेले-अकेले का समय देकर दिन भर चलता रहा और इसमें से जो निष्पत्ति हम लोगों को मिली है, वह आज उन्होंने हमें सौंप दी है. हम इनके आभारी हैं, हम इनके कृतज्ञ हैं. अब इसमें क्या है, यह तो हम बाद में एकांत में बैठकर देखेंगे और कल न्यास मंडल में इसका विचार होगा. लेकिन हम पुनः आपके आभारी रहेंगे और इसी प्रकार का सहयोग आप तीनों से चाहते भी रहेंगे. इनके साथ-साथ श्रीमान पंडा जी ने इन सबको साथ में लेकर के एक जो कोऑर्डिनेशन का काम किया है, उसके लिए उनके भी हम बहुत-बहुत आभारी हैं. यह ट्रस्ट के निर्णय पर रहेगा. होनी चाहिए ऐसी मेरी अपेक्षा है, लेकिन करना है कि नहीं करना है, यह न्यास मंडल निश्चित करेगा.
चयन समिति के सदस्य जस्टिस प्रमोद कोहली ने कहा कि देखिए, ट्रस्ट ने 6 तारीख को यह फैसला किया था कि CEO के चयन के लिए एक सर्च कमेटी बनाई जाए और हम भाग्यशाली हैं, हमें यह काम करने के लिए चुना गया. हम प्रभु राम के आभारी हैं और ट्रस्ट के भी आभारी हैं कि यह ऐसा काम है जिसमें निष्पक्षता बहुत जरूरी है. 6 तारीख को जब ट्रस्ट ने फैसला किया, तो हमें 8 तारीख को पत्र मिला जिसमें हम तीनों को सर्च कमेटी का मेंबर नियुक्त किया गया और 11 तारीख को हमने पहली मीटिंग की.
उसमें हमने कुछ निर्णय लिए, जिसमें CEO की पोस्ट के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया (पात्रता मानदंड) बनाया गया और यह फैसला किया गया कि हम इनसे एप्लीकेशन इनवाइट करेंगे उन लोगों से जो एलिजिबल होंगे और जो इच्छुक होंगे, जिनका विचार यह काम करने का होगा. 18 तारीख के लिए हमने लास्ट डेट रखी थी. 11 से 18 तारीख तक आप हैरान होंगे. 5585 एप्लीकेशन्स (आवेदन) हमें मिलीं. अब यह इतना बड़ा काम था कि उन एप्लीकेशन्स की स्क्रूटनी (छंटनी) करना, तो हमने 19 को एक मीटिंग की और उसमें यह फैसला किया कि हम एक गूगल फॉर्म बनाएंगे जिसमें डिफरेंट कैटेगरीज बनाई गईं, जो एलिजिबिलिटी है उसके हिसाब से उनके मार्क्स फिक्स करेंगे.
600 में से 470 मार्क लाने वालों का सिलेक्शन
हमने 600 मार्क्स का एक गूगल फॉर्म बनाया गया. 3,577 लोगों ने गूगल फॉर्म का जवाब दिया, बाकी लोगों ने नहीं दिया. तो उसकी फिर स्क्रूटनी की गई. उसमें हमने यह फैसला किया कि जो गूगल फॉर्म में 600 मार्क्स था, जो 60% के ऊपर लोग होंगे उनको ही हम कंसीडर करेंगे. तो उसकी जो फर्दर कैटेगराइजेशन की गई, तो 108 लोग जो उस कैटेगरी में आए, जिनके 600 में से 470 या उससे ऊपर मार्क्स आए, इनमें से 108 लोगों से हमने वीडियो कॉन्फ्रेंस से माध्यम से बातचीत की और तकरीबन चार दिन यह सिलसिला चला. हमने उनमें से 17 लोग शॉर्टलिस्ट किए. हमने उनकी भी कैटेगराइजेशन की थी. ग्रेड A में, ग्रेड B में, ग्रेड C में.
16 लोगों का हुआ इंटरव्यू, तीन का हुआ चयन
15 लोग ही बुलाने थे लेकिन 17 लोग उस कैटेगरी में थे, तो 17 के 17 लोगों को हमने अयोध्या धाम में फिजिकल इंटरैक्शन (आमने-सामने बातचीत) के लिए बुलाया. 17 में से एक महानुभाव नहीं आ पाए, उनकी घर में कुछ समस्या थी तो 16 लोगों के साथ हमने दो दिन, 11 और 12 तारीख को यहां बैठकर इसी कमरे में पूरी बातचीत की और लंबी बातचीत की, सब चीजें. उनमें हमने फिर जो मार्क्स एलोकेट किए थे अलग-अलग फीचर्स के लिए, तो उसके बेस पर हमने (तीन लोगों का पैनल) तीन लोगों को चुना है. हमें लगता है कि वे बेहतरीन लोग हैं और जो डिवोटेड हैं, जो काम करना चाहते हैं, जिनका विजन (दृष्टिकोण) है, जो इश्यूज को समझते हैं, ऐसे लोगों को हमने चयन करने की कोशिश की. हम अपनी तरफ से बिल्कुल एक ट्रांसपेरेंट (पारदर्शी), फेयरली और पूरे विश्वास के साथ कह सकते हैं कि यह लोग जो हमने चयन किए हैं, उन तीनों में से ट्रस्ट फैसला करेगा कि राम मंदिर का CEO ये होगा. तो मुझे लगता है कि प्रभु राम की कृपा से यह सारा कार्य बड़े अच्छे तरीके से निपटेगा.

अभिजीत ठाकुर
अभिजीत ठाकुर ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है. 2014 में पत्रकारिता की शुरुआत Zee Media से हुई. दिल्ली में रिपोर्टिंग की. 2018 में ETV भारत के नेशनल ब्यूरो में बतौर रिपोर्टर जॉइन किया. इस दौरान संघ (RSS-VHP), शिक्षा, कृषि, पर्यटन के साथ किसान और मजदूरों के मुद्दों पर रिपोर्टिंग की. 2022 में TV9 भारतवर्ष जॉइन किया और दिल्ली ब्यूरो का हिस्सा रहे. इस दौरान उत्तराखंड, हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान,महाराष्ट्र, बिहार और झारखंड में कई बड़ी खबरों और इवेंट्स कवर करने का अवसर मिला. 2025 में लखनऊ ब्यूरो की जिम्मेदारी के साथ दिल्ली से लखनऊ भेजा गया. 17 साल दिल्ली में रहने के बाद अब कर्मस्थली यूपी की राजधानी है. अब उत्तर प्रदेश की राजनीति, सरकार और जनता से जुड़े मुद्दों की रिपोर्ट जनता तक पहुंचाते हैं.
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