बिहार में बाढ़ का गंभीर खतरा: गंगा और गंडक के बाद सोन नदी भी उफान पर; इंद्रपुरी बराज के 56 गेट खोले गए - Haribhoomi
बिहार में बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। गंगा और गंडक के बाद अब सोन नदी उफान पर है, जिससे कई जिलों में खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने उठाए कड़े कदम।
गंगा और गंडक के बाद अब सोन नदी उफान पर है, जिससे बिहार के कई जिलों में खतरा बढ़ गया है।
- Published: 02 Sep 2026, 02:07 PM IST
- Last Updated: 02 Sep 2026, 02:07 PM IST
Bihar floods: बिहार में कुदरत का कहर और नदियों का बढ़ता जलस्तर लगातार मुश्किलें पैदा कर रहा है। गंगा और गंडक के बाद अब सोन नदी के उफान पर आने से राज्य में बाढ़ का खतरा और अधिक गंभीर हो गया है। मंगलवार को सोन नदी का जलप्रवाह बढ़कर सवा पांच लाख क्यूसेक तक पहुंच गया, जो इस साल का अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है। हालात की नजाकत को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत कदम उठाते हुए इंद्रपुरी बराज के कुल 69 में से 56 गेट खोल दिए हैं।
इसके अलावा, गंगा और गंडक के जलस्तर से भी कई जिलों में भयंकर कटाव जारी है और राज्यभर में 10 अलग-अलग स्थानों पर नदियां खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं, जिससे दक्षिण और पूर्वी बिहार के निचले इलाकों में पानी फैलने लगा है।
मोतिहारी में सीएम ने दिए हालात पर बयान
मोतिहारी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इस बात को स्वीकार किया कि गंडक, कोसी, बागमती और गंगा नदियों के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बाढ़ के प्रबंधन और लोगों की सुरक्षा के लिए पूरी तत्परता से काम कर रही है।
वहीं, दूसरी तरफ तटबंधों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह मंगलवार को अपनी नई दिल्ली की बैठक को बीच में ही छोड़कर तुरंत पटना वापस लौट आए।
भागलपुर में विकट स्थिति, मंदिर और तटबंध नदी में समाए
भागलपुर जिले के नवगछिया स्थित राघोपुर क्षेत्र में गंगा के भीषण कटाव ने बेहद डरावनी स्थिति पैदा कर दी है। मंगलवार सुबह अचानक राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध के सी-नोज के पास भारी कटाव शुरू हो गया, जिसके चलते तटबंध का 100 मीटर से अधिक हिस्सा और पास ही स्थित मां चैती दुर्गा मंदिर तथा बाबा बजरंगबली का मंदिर गंगा में विलीन हो गया।
इस कटाव से अब तक 350 मीटर से ज्यादा लंबा तटबंध क्षतिग्रस्त हो चुका है और पुरानी रेलवे लाइन के पास केवल 100 मीटर का हिस्सा ही बचा है, जिससे रेलवे लाइन के अस्तित्व पर भी बड़ा संकट मंडरा रहा है। जल संसाधन सचिव ने खुद भागलपुर पहुंचकर सुरक्षा उपायों की कमान संभाली है, जबकि स्थानीय लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया जा रहा है।
बाणसागर का पानी पहुंचने से सोन नदी में तेजी
बिहार में सोन नदी के जलस्तर में अचानक आए इस भारी उछाल के पीछे मुख्य वजह ऊपरी हिस्से से आया पानी है। रविवार को बाणसागर बांध से छोड़ा गया पानी मंगलवार को सोन नदी में आ गया, जिससे नदी किनारे बसे गांवों पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है। मनेर क्षेत्र में भी सोन नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इसके साथ ही, नेपाल में हुई भारी बारिश के बाद गंडक नदी का जलस्तर भी लगातार ऊपर-नीचे हो रहा है।
वाल्मीकि नगर बराज से सवा लाख से डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। गंडक नदी डुमरियाघाट में खतरे के निशान से 56 सेंटीमीटर, बंगराघाट के पास 24 सेंटीमीटर, जबकि कोसी नदी बलतारा में 1.11 मीटर और कुरसेला में 41 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। खगड़िया में बूढ़ी गंडक भी खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर ऊपर है।
पर्यटकों के लिए पाबंदी और प्रशासनिक सतर्कता
गंगा नदी अभी भी दीघा, गांधीघाट, हाथीदह और कहलगांव में लाल निशान से ऊपर बह रही है। पश्चिम चंपारण के मधुबनी स्थित रेवहिया और योगापट्टी में गंडक का कटाव तेज हो गया है। उधर, रोहतास जिले में लगातार हो रही बारिश के कारण प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मांझरकुंड जलप्रपात में पानी का बहाव बेहद खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है।
पर्यटकों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए जिला प्रशासन ने अगले आदेश तक मांझरकुंड में लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी है। सरकार और प्रशासन पूरे मामले पर पैनी नजर बनाए हुए है।