टोहाना पुलिस ने अरेस्ट किए दो कोकीन सप्लायर: एक नाइजीरियन नागरिक, 58 लाख का नशा हुआ था बरामद, पांच पहले ही पकड़े जा चुके - Jakhalmandi News

नशा तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सीआईए टोहाना पुलिस ने 58 लाख रुपए की 114.19 ग्राम कोकीन बरामदगी मामले में दो सप्लायरों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक नाइजीरियन नागरिक भी शामिल है। इस गिरफ्तारी के बाद मामले में अब तक पकड़े गए आरोपियों की

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पुलिस के मुताबिक, सीआईए टोहाना की टीम ने 13 सितंबर को कार्रवाई करते हुए नाइजीरिया के रहने वाले रिच्ड डेसमेंट और रोहतक के खरकड़ा निवासी मंदीप को पकड़ा। शुरुआती जांच में दोनों की भूमिका कोकीन सप्लाई नेटवर्क में सामने आई है। पुलिस दोनों से पूछताछ कर नशे के स्रोत, सप्लाई रूट और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है।

दो युवक- महिला पहले ही पकड़े जा चुके

इस मामले की शुरुआत 11 सितंबर 2026 को हुई थी। तब सीआईए टोहाना पुलिस ने एक सूचना पर भूना रोड फ्लाईओवर के पास एक कार को रोका था। कार सवार दो युवकों और एक महिला को 114.19 ग्राम कोकीन के साथ गिरफ्तार किया गया था। बरामद नशीले पदार्थ की कीमत करीब 58 लाख रुपए बताई गई थी। पुलिस ने नशा तस्करी में इस्तेमाल हो रही कार को भी जब्त किया था।

उस समय गिरफ्तार आरोपियों की पहचान भिवानी के खानक गांव निवासी सोनू कुमार (जो अभी हिसार के मॉडल टाउन में रहता है), हिसार के नलवा गांव निवासी रविंद्र शर्मा और नई दिल्ली निवासी नीशा उर्फ नैना (हाल निवासी हिसार) के रूप में हुई थी। इस संबंध में फतेहाबाद शहर थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था।

आरोपियों का नेटवर्क खंगाल रही पुलिस

पुलिस ने शुरुआती गिरफ्तारी के बाद जांच को सिर्फ बरामदगी तक नहीं रोका। आरोपियों से पूछताछ, तकनीकी जानकारी, आपसी संपर्कों और दूसरे सबूतों के आधार पर सप्लाई चेन की कड़ियां जोड़ी गईं। इसी जांच के दौरान मिले सुरागों की मदद से कथित मुख्य सप्लायरों तक पहुंचा गया।

अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद कोकीन कहां से लाई गई थी, इसे किन माध्यमों से सप्लाई किया जा रहा था और नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं। आरोपियों के मोबाइल संपर्क, वित्तीय लेन-देन और संभावित अंतरजिला व अंतरराज्यीय कनेक्शन की भी जांच की जा रही है।

फतेहाबाद पुलिस का कहना है कि नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई का उद्देश्य केवल नशीला पदार्थ बरामद कर आरोपियों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन और उसके पीछे सक्रिय नेटवर्क को चिन्हित कर उसे ध्वस्त करना है।