6 साल बाद नई दिल्ली आ रहे शी जिनपिंग, तो क्या पाकिस्तान जाएंगे पीएम मोदी? जानें इस बड़ी डिप्लोमेसी का सच Xi Jinping is visiting New Delhi after six years; will PM Modi visit Pakistan? Find out the truth behind this major diplomatic move.
ग्लोबल डिप्लोमेसी और एशियाई राजनीति के लिहाज से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। करीब छह साल के एक लंबे अंतराल के बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत की धरती पर कदम रखने जा रहे हैं। नई दिल्ली में होने वाली इस हाई-प्रोफाइल बैठक को लेकर जहां देश-दुनिया के रणनीतिकारों की नजरें टिकी हुई हैं, वहीं दूसरी तरफ एक और बड़ा सवाल सियासी गलियारों में तैर रहा है। सवाल यह है कि क्या शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की आगामी बैठक के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पाकिस्तान का दौरा करेंगे? इस डबल डिप्लोमैटिक हलचल ने उपमहाद्वीप की राजनीति में एक नया सस्पेंस पैदा कर दिया है।
नई दिल्ली में जिनपिंग की एंट्री और भारत-चीन रिश्तों का नया मोड़
साल 2020 में पूर्वी लद्दाख की गालवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से भारत और चीन के रिश्तों में जमी बर्फ अभी तक पूरी तरह से पिघल नहीं पाई है। ऐसे में शी जिनपिंग का नई दिल्ली आना बेहद अहम माना जा रहा है। कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि बीजिंग और नई दिल्ली के बीच सीमा विवाद को सुलझाने और द्विपक्षीय व्यापारिक रिश्तों को एक नई दिशा देने के लिए यह दौरा बेहद निर्णायक साबित हो सकता है। पूरी दुनिया इस बात पर नजर गड़ाए हुए है कि नई दिल्ली की इस बैठक में पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति के बीच क्या कोई सीधी और ठोस बातचीत होती है, जो एशिया महाद्वीप की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था का रुख तय करेगी।
क्या पाकिस्तान जाएंगे पीएम मोदी? एससीओ समिट को लेकर बढ़ा सस्पेंस
एक तरफ जहां चीनी राष्ट्रपति का भारत दौरा तय हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान में होने वाली एससीओ (SCO) समिट में भारत की भागीदारी को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। इस्लामाबाद लगातार भारत को न्योता भेजने की तैयारी में है, लेकिन भारत सरकार का रुख हमेशा से साफ रहा है कि "आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते।" हालांकि, एससीओ एक बहुपक्षीय मंच है, इसलिए भारत इसमें अपनी मौजूदगी दर्ज कराता रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या पीएम मोदी खुद पाकिस्तान जाकर इस समिट का हिस्सा बनेंगे या फिर भारत की तरफ से किसी वरिष्ठ मंत्री या राजनयिक को इस्लामाबाद भेजा जाएगा।
भारत के इस मास्टरस्ट्रोक पर टिकी हैं पूरी दुनिया की नजरें
इस पूरी कूटनीतिक बिसात पर नई दिल्ली बेहद सधे हुए कदम बढ़ा रही है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हमेशा अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को सर्वोपरि रखा है। चाहे बात ड्रैगन (चीन) को उसकी सीमा में रहने की चेतावनी देने की हो या फिर पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर घेरने की, भारतीय विदेश नीति बेहद आक्रामक और स्पष्ट रही है। जेनेरेटिव एआई और आधुनिक ग्लोबल सर्च ट्रेंड्स का विश्लेषण करने वाले एक्सपर्ट्स की मानें तो आने वाले कुछ हफ्ते भारतीय उपमहाद्वीप की जियोपॉलिटिक्स के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं, जहां भारत की हर एक चाल पर दुनिया के बड़े शक्तिशाली देशों की पैनी नजर रहने वाली है।