मुख्यमंत्री सेहत योजना: 6 महीनों में 14 हजार से ज्यादा मरीजों को मिला कैशलेस इलाज, फेफड़ों की बीमारियों पर सरकार का बड़ा फोकस
पंजाब में सांस संबंधी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए राहत की खबर सामने आई है. मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत पिछले छह महीनों में हजारों मरीजों को फेफड़ों की पुरानी बीमारियों और थोरेसिक सर्जरी से जुड़े इलाज की सुविधा मिली है.
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA) पंजाब के आंकड़ों के मुताबिक, 8 जनवरी से 21 जुलाई 2026 तक 14,032 मरीजों को कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया गया. इस दौरान मरीजों के इलाज पर करीब 37.30 करोड़ रुपये का खर्च कवर किया गया.
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह रहा कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों को इलाज शुरू कराने से पहले भारी आर्थिक बोझ की चिंता नहीं करनी पड़ी.
फेफड़ों की बीमारी अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं
आम धारणा है कि फेफड़ों की पुरानी बीमारियां केवल बुजुर्गों को प्रभावित करती हैं, लेकिन मुख्यमंत्री सेहत योजना के आंकड़े एक अलग तस्वीर दिखा रहे हैं.
आंकड़ों के अनुसार, 36 से 60 वर्ष आयु वर्ग के 5,559 मरीजों ने सांस संबंधी बीमारियों का इलाज कराया. वहीं, 60 वर्ष से अधिक उम्र के 5,659 वरिष्ठ नागरिकों को भी योजना के तहत उपचार मिला.
दोनों आयु वर्ग मिलकर कुल इलाज मामलों का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बनाते हैं. इससे साफ है कि क्रॉनिक फेफड़ों की बीमारियां अब कामकाजी उम्र के लोगों को भी तेजी से प्रभावित कर रही हैं. इसके अलावा 2,522 युवा वयस्कों और 292 बच्चों को भी सांस संबंधी उपचार का लाभ मिला.
सांस फूलना और लगातार खांसी को न करें नजरअंदाज
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सांस फूलना, लगातार खांसी और घरघराहट जैसी समस्याओं को अक्सर लोग सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन कई बार ये लक्षण गंभीर फेफड़ों की बीमारी का संकेत हो सकते हैं.
समय पर जांच और इलाज मिलने से बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है. वहीं, देरी होने पर मरीज को लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने या बड़ी सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है.
विशेषज्ञों के अनुसार, धूम्रपान, वायु प्रदूषण और खतरनाक कार्यस्थल परिस्थितियां फेफड़ों की बीमारियों का बड़ा कारण बन सकती हैं.
पुरुषों को ज्यादा मिला उपचार का लाभ
लिंग आधारित आंकड़ों पर नजर डालें तो योजना के तहत 8,345 पुरुषों का इलाज किया गया, जिस पर करीब 22.79 करोड़ रुपये खर्च हुए.
वहीं, 5,684 महिलाओं को भी कैशलेस उपचार सुविधा मिली, जिसके लिए करीब 14.50 करोड़ रुपये का खर्च कवर किया गया. इसके अलावा अन्य श्रेणी के तीन लाभार्थियों ने भी इस योजना का लाभ उठाया.
अप्रैल में सबसे ज्यादा मरीजों ने कराया इलाज
मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत सांस संबंधी इलाज की मांग लगातार बनी रही. आंकड़ों के अनुसार जनवरी में जहां 1,332 उपचार मामले सामने आए, वहीं अप्रैल में यह संख्या बढ़कर 2,509 तक पहुंच गई.
जून महीने में 2,004 मरीजों का इलाज किया गया, लेकिन इस दौरान उपचार की लागत सबसे ज्यादा रही. जून में करीब 6.73 करोड़ रुपये का इलाज खर्च दर्ज किया गया, जो यह दर्शाता है कि योजना के तहत गंभीर और महंगे उपचार भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं.
स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों से की जागरूक रहने की अपील
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि सांस संबंधी बीमारियों को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है.
उन्होंने कहा कि कई लोग सांस फूलने और लगातार खांसी को सामान्य समस्या समझकर इलाज में देरी कर देते हैं. जबकि समय पर उपचार मिलने से फेफड़ों को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है.
उन्होंने धूम्रपान करने वालों, प्रदूषण वाले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों और धूल के संपर्क में रहने वाले लोगों से नियमित स्वास्थ्य जांच कराने की अपील की.
रोकथाम और समय पर इलाज है सबसे बड़ा उपाय
फेफड़ों की पुरानी बीमारियों से बचाव के लिए धूम्रपान छोड़ना, प्रदूषण से बचाव करना, कार्यस्थल पर सुरक्षा उपाय अपनाना और समय पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है.
मुख्यमंत्री सेहत योजना के जरिए पंजाब सरकार का उद्देश्य यही है कि आर्थिक परेशानी के कारण कोई भी मरीज जरूरी इलाज से वंचित न रहे और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो सकें.
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