दावा- अंबाला में गलत शटरिंग की वजह से गिरी बिल्डिंग: 6 मौतें; लोग बोले- एक लेंटर सूखने से पहले दूसरा ऊपर डालते गए - Ambala News
हरियाणा के अंबाला में निर्माणाधीन बिल्डिंग गिरने से अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4 लोगों का अंबाला सिटी अस्पताल में इलाज चल रहा है। रातभर NDRF और अन्य टीमें रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी रहीं। अभी भी 1 से 2 लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है।
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आसपास के लोगों के मुताबिक, बिल्डिंग जग्गी प्रॉपर्टीज की है। कुछ लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि महज 15 से 20 दिनों में बिल्डिंग खड़ी कर दी गई। एक लेंटर को सूखने का पर्याप्त समय भी नहीं दिया गया और उसके ऊपर लगातार दूसरा लेंटर डालते गए।
हालांकि, SP अजीत शेखावत ने कहा कि बिल्डिंग के मालिक का भी पता लगाया जा रहा है। अगर यहां अनऑथराइज्ड कंस्ट्रक्शन हो रहा था तो कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, बिहार के पूर्णिया निवासी मजदूर रामचंद्र ने आरोप लगाया कि वह भी इसी बिल्डिंग में काम करता था। 2 दिन पहले लेंटर डालने के लिए शटरिंग की गई थी, लेकिन मिस्त्री ने शटरिंग ठीक तरीके से नहीं की। इसी वजह से उसने काम छोड़ दिया था। रामचंद्र का आरोप है कि गलत शटरिंग के कारण ही बिल्डिंग का हिस्सा गिरा।


तीनों मंजिलों पर मजदूर काम कर रहे थे
धूलकोट गांव में तीन मंजिला बिल्डिंग का निर्माण चल रहा था। आसपास के लोगों का कहना है कि यह बिल्डिंग गोदाम के लिए बनाई जा रही थी। दोपहर 3 बजे तीसरी मंजिल पर लेंटर डालने का काम चल रहा था। इसी दौरान बिल्डिंग का पिछला हिस्सा गिर गया।
बिल्डिंग में काम कर रहे कर्मजीत ने बताया कि पहली मंजिल पर प्लास्टर का काम चल रहा था, जबकि दूसरी मंजिल पर फर्श डाला जा रहा था। तीसरी मंजिल पर लेंटर डाला जा रहा था। पहली मंजिल पर 6 से 7 लोग, दूसरी मंजिल पर 3 लोग और तीसरी मंजिल पर 10 से 12 लोग काम कर रहे थे।
दोपहर करीब 3 से 3:30 बजे के बीच अचानक लेंटर नीचे बैठ गया। दूसरी मंजिल पर काम कर रहे लोग भी मलबे में दब गए। कुछ लोग ऊपर से कूद गए। बिल्डिंग के पीछे तरफ का हिस्सा नीचे तक पूरा गिर गया। आगे का हिस्सा अभी भी खड़ा है।

निर्माणाधीन बिल्डिंग के पीछे का हिस्सा भरभराकर नीचे गिरा।
मिस्त्री का बेटा बोला- जग्गी प्रॉपर्टीज वालों की बिल्डिंग
अंबाला के सदोपुर गांव निवासी संदीप ने बताया कि उसके पिता रामजी दास (63) जग्गी प्रॉपर्टीज के यहां मिस्त्री का काम करते थे। यह बिल्डिंग जग्गी प्रॉपर्टीज वालों की ही है। हादसे में उनके पिता की भी मौत हो गई है। हादसे के समय वह ग्राउंड फ्लोर पर प्लास्टर का काम कर रहे थे। यहां काम पूर्व फौजी राणा की देखरेख में हो रहा था।

यह तस्वीर रामजी दास की है। वह बिल्डिंग में मिस्त्री के तौर पर काम कर रहे थे।
15 दिन के बाद लेंटर डाले गए
मजदूर कर्ण मजदूर कर्ण ने बताया कि 4 जुलाई को काम शुरू हुआ था। 8 जुलाई को वह काम पर आया था। काम शुरू होने के 20 दिन बाद 3 लोगों ने आकर काम रुकवा दिया था। फोरमैन के कहने पर काम बंद होने पर 15 दिन तक वह किसी दूसरी जगह पर काम करने लगे। बाद में दोबारा काम शुरू हो गया था। करीब हर 15 दिन के बाद लेंटर डालने का काम चल रहा था। हादसे वाले दिन भी ऊपर लेंटर व ग्राउंड फ्लोर पर पलस्तर चल रहा था।
धुएं के गुब्बार के बीच मजदूरों को छत से कूदते देखा
बिल्डिंग के सामने किरायेदार दुकान संचालक सुमंत ने बताया कि यहां करीब 3 महीने से निर्माण कार्य चल रहा था। रविवार दोपहर अचानक धमाके जैसी आवाज आई और सामने वाली बिल्डिंग भरभराकर नीचे आ गई। कुछ ही सेकंड में पूरे इलाके में धूल का गुब्बार छा गया। सुमंत के मुताबिक धूल छंटने के बाद कुछ मजदूर पहली मंजिल से छलांग लगाते दिखाई दिए। किसी के पैर में चोट लगी तो किसी की टांग में। उसने बताया कि रामगोपाल यादव, भूपेश कुमार और संतोष सिंह समेत कुछ मजदूरों ने जान बचाने के लिए छलांग लगाई।
साथ वालों की जान गई, मैं खुद मलबे से निकाला
वेद गरनाला निवासी वेद प्रकाश ने बताया कि वह मिस्त्री व मजदूर के साथ ग्राउंड फ्लोर पर पलस्तर कर रहे थे। अचानक लेंटर ही गिर पड़ा। मलबे में दबने के कारण हाथ टूट चुका था और ऊपर ईंटें व सरिये थे। कड़ी मशक्कत के बाद खुद को मलबे से बाहर निकाला। 10 मिनट के बाद लोग उस तक पहुंचे और अस्पताल पहुंचाया। पता चला कि साथ वाले 4 लोग मिस्त्री व मजदूर की जान जा चुकी है।
DC बोले- बिल्डिंग कब बनी, रिकॉर्ड खंगालेंगे
DC सचिन गुप्ता ने कहा कि बिल्डिंग का निर्माण कब शुरू हुआ था, इसकी जांच कराई जा रही है। यह बिल्डिंग अनऑथराइज्ड थी या नहीं, इसका भी पता लगाया जाएगा। नगर निगम और तहसील से बिल्डिंग और जमीन के रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।