मध्य प्रदेश में मोबिस इंडिया फाउंडेशन की अनूठी पहल: 60 व्हीलचेयर यूजर्स को मिले पर्सनलाइज्ड मोबिलिटी सॉल्यूशंस - Haribhoomi

मोबिस इंडिया फाउंडेशन ने मध्य प्रदेश में 'एक्सेसिबिलिटी इनिशिएटिव' की शुरुआत की है। भोपाल और इंदौर में कुल 60 दिव्यांगजनों को कस्टमाइज्ड मोबिलिटी डिवाइस दिए जाएंगे।

Mobis India Foundation wheelchair users

Mobis India Foundation wheelchair users

  • Published: 26 Aug 2026, 06:56 PM IST
  • Last Updated: 26 Aug 2026, 06:56 PM IST

Mobis India Foundation: एक सुलभ, समावेशी और समान समाज के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए, हुंडई मोबिस इंडिया की कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) शाखा 'मोबिस इंडिया फाउंडेशन' ने मध्य प्रदेश में अपनी एक्सेसिबिलिटी पहल का आगाज कर दिया है। फाउंडेशन ने अपने प्रमुख कार्यक्रम "एक्सेसिबिलिटी एंड फ्रीडम – व्हीलचेयर यूज़र्स का मोबिलिटी असीस्टिव डिवाइस द्वारा सशक्तीकरण" के तहत भोपाल में 23 व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं को उनकी व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार तैयार किए गए मोबिलिटी डिवाइस वितरित किए।

यह वितरण कार्यक्रम भोपाल स्थित कम्पोजिट रीजनल सेंटर (CRC) में संपन्न हुआ। यह केंद्र भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अधीन 'दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग' (DEPwD) का एक प्रमुख संस्थान है। इस अवसर पर भोपाल के दिव्यांग जन आयुक्त, डॉ. अजय खेमरिया मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने लाभार्थियों को कस्टमाइज़्ड मोबिलिटी डिवाइस सौंपे और उनके साथ संवाद भी किया।

भोपाल के बाद इंदौर में भी बांटे जाएंगे डिवाइस, कुल 60 लोगों को मिलेगा लाभ
भोपाल का यह आयोजन मध्य प्रदेश में मोबिस इंडिया फाउंडेशन की 'एक्सेसिबिलिटी आउटरीच' की शुरुआत है, जिसके तहत पूरे राज्य में व्हीलचेयर का उपयोग करने वाले 60 लोगों को आधुनिक मोबिलिटी समाधान उपलब्ध कराए जाएंगे। भोपाल के बाद आगामी 13 अगस्त 2026 को इंदौर में एक विशेष वितरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें 37 और जरूरतमंदों को कस्टमाइज़्ड मोबिलिटी डिवाइस दिए जाएंगे।

चलने-फिरने में असमर्थता और रीढ़ की हड्डी की चोट से पीड़ित लोगों के लिए स्वतंत्र रूप से आना-जाना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। अक्सर इस बाधा के कारण उन्हें शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसी बाधा को दूर करने के लिए यह पहल शुरू की गई है ताकि दिव्यांगजन आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के साथ अपने सपनों को पूरा कर सकें।

आईआईटी मद्रास के सहयोग से तैयार हुई है आधुनिक तकनीक
यह कार्यक्रम आईआईटी मद्रास में इनक्यूबेटेड असिस्टिव टेक्नोलॉजी स्टार्टअप 'नियोमोशन' की पार्टनरशिप में चलाया जा रहा है। हर लाभार्थी को डिवाइस देने से पहले उनकी पूरी क्लिनिकल जांच और शरीर का विस्तृत माप लिया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि व्हीलचेयर से बेहतरीन पोस्चर, आराम और सुरक्षा मिल सके।

इस पहल के तहत हर व्यक्ति को कस्टमाइज़्ड 'नियोफ़्लाई' (NeoFly) व्हीलचेयर और 'नियोबोल्ट' (NeoBolt) मोटर-पावर्ड अटैचमेंट दिया जाता है। नियोबोल्ट की मदद से यह व्हीलचेयर कुछ ही सेकंड में एक पर्सनल मोबिलिटी व्हीकल में बदल जाती है, जिससे उपयोगकर्ता बिना अधिक शारीरिक थकान के लंबी दूरी तय कर सकते हैं।

क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी?
मोबिस इंडिया फाउंडेशन के सीएसआर प्रमुख नरसिम्हन जी. ने इस मौके पर कहा, "सुलभता समावेश का सबसे बड़ा माध्यम है। हम केवल सहायक तकनीक प्रदान नहीं कर रहे हैं, बल्कि लोगों के आत्मविश्वास को वापस लौटाकर उनके लिए स्वतंत्र जीवन का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।"

वहीं, मध्य प्रदेश के दिव्यांग जन आयुक्त डॉ. अजय खेमरिया ने कहा कि ऐसे प्रयास एक अधिक सुलभ और समावेशी मध्य प्रदेश के निर्माण की हमारी साझा प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हैं। यह राष्ट्रीय कार्यक्रम देश के 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 600 व्हीलचेयर यूजर्स को सशक्त बनाने के ₹6.3 करोड़ के बड़े अभियान का हिस्सा है।