यूपी में 62% फीडर अब भी भारी घाटे में: वितरण हानि घटकर 13.04% हुई; फिर भी कई फीडरों पर 88% तक नुकसान - Uttar Pradesh News
उत्तर प्रदेश2 घंटे पहले
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उत्तर प्रदेश में बिजली वितरण की हानि 20.63% से घटकर 13.04% रह गई है। बावजूद अब भी प्रदेश में 62 प्रतिशत फीडर भारी घाटे में हैं। इसमें बिजली चोरी एक प्रमुख कारण है। अब हाई लॉस वाले फीडरों की निगरानी और जवाबदेही तय किया जा रहा है।
प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2020-21 में एटीएंडसी (AT&C) हानि भी 31.19% थी। जो मौजूदा समय में घटकर 17.83% पर आ गई है। फिर भी प्रदेश में कई फीडरों पर लॉइन लॉस और एटीएंडसी लॉस 88% तक पहुंचा है।
5 साल में 7.59 प्रतिशत घटा वितरण लॉस
प्रदेश सरकार की ओर से पेश आंकड़ों के आधार पर दावा किया है 2020-21 में प्रदेश की वितरण हानि 20.63% थी। पांच साल में 7.59 प्रतिशत अंक की कमी आई है। कृषि फीडरों को छोड़कर प्रदेश में फीडरों की संख्या भी 18,351 से बढ़कर 21,463 हो गई। इनमें लाभकारी फीडरों की संख्या 5,772 से बढ़कर 8,104 पहुंच गई। लाभकारी फीडरों की हिस्सेदारी 31% से बढ़कर 38% हुई है।
पश्चिमांचल सबसे आगे, पूर्वांचल पीछे
डिस्कॉमवार आंकड़ों में पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम सबसे आगे है। यहां 53% फीडर लाभ में हैं। केस्को में 39%, दक्षिणांचल और मध्यांचल में 37-37% तथा पूर्वांचल में सिर्फ 22% फीडर लाभ में हैं।
703 हाई लॉस क्लस्टर पर फोकस
बिजली वितरण में नुकसान कम करने के लिए सरकार ने हाई लॉस क्लस्टर मॉडल लागू किया है। इसके तहत 703 क्लस्टर, 1,703 फीडर, 42.21 लाख उपभोक्ता और 76,839 वितरण ट्रांसफॉर्मर कवर किए हैं। यह कुल उपभोक्ताओं का करीब 11% है। अभियान के दौरान 654.31 करोड़ रुपए की बकाया वसूली की गई। साथ ही 1,01,548 नए बिजली कनेक्शन जारी किए गए। इसका मकसद ऐसे इलाकों में बिजली चोरी और अनधिकृत कनेक्शन पर कार्रवाई के साथ बिलिंग और वसूली बढ़ाना है।
लेकिन फीडरवार तस्वीर अभी भी चिंताजनक
प्रदेश के औसत आंकड़ों के बीच उच्चस्तरीय समीक्षा में सामने आया कि 62% से अधिक फीडर अभी घाटे में हैं। यानी 21,463 फीडरों में से लाभकारी फीडरों की संख्या 8,104 है, जबकि बड़ी संख्या अभी भी घाटे की श्रेणी में है।
कई फीडरों पर लाइन लॉस और AT&C लॉस 70 से 88% तक पहुंचने की बात सामने आई है। इसका सीधा मतलब है कि इन क्षेत्रों में जितनी बिजली सप्लाई की जा रही है, उसके मुकाबले उतनी बिलिंग और वसूली नहीं हो पा रही। इसी वजह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फीडरवार जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं।
बिजली पहुंच रही, पैसा नहीं लौट रहा
उच्चस्तरीय समीक्षा में यह भी सामने आया कि प्रदेश में बिजली आपूर्ति की स्थिति में सुधार हुआ है। गांवों और शहरों में सप्लाई बढ़ी है, लेकिन उसके अनुपात में राजस्व वसूली नहीं बढ़ पा रही। यही वजह है कि हाई लॉस फीडरों को अलग-अलग चिन्हित कर उनकी रोजाना निगरानी और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा रही है।
देवबंद से नोएडा तक हाई लॉस फीडरों की लंबी सूची
पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में सबसे ज्यादा घाटे वाले चार फीडर देवबंद क्षेत्र के बताए गए हैं। इसके अलावा एक फीडर ग्रेटर नोएडा और दो फीडर नोएडा क्षेत्र के हैं।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में बलिया का बैरिया सरसपाली फीडर 14 करोड़ रुपए से अधिक के घाटे के साथ चिंता का बड़ा कारण है। दक्षिणांचल में बरौली फीडर पर करीब 11.85 करोड़ रुपए का घाटा है। चित्रकूट के बरगढ़ फीडर पर भी करीब 10.46 करोड़ रुपए का नुकसान दर्ज किया गया है।
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम में सुलतानपुर का एक फीडर करीब 9 करोड़ रुपए के नुकसान के साथ सबसे घाटे वाले फीडरों में है। केस्को क्षेत्र के रतनपुर गंगागंज फीडर पर करीब 3.23 करोड़ रुपए का घाटा दर्ज किया गया है।
कुछ फीडरों में 80% से ज्यादा लॉस घटा
हाई लॉस फीडरों पर कार्रवाई के बाद सुधार भी दिखा। ललितपुर के तालबेहट टाउन-2 फीडर में AT&C हानि 63% से घटकर 11% रह गई। कासगंज के मणिकापुर सीरी फीडर में यह 87% से घटकर 53% और मथुरा के राल फीडर में 83.62% से घटकर 47.82% रह गई।
आगरा, मथुरा, चित्रकूट, राठ और कोसी के टॉप-10 हाई लॉस फीडरों का घाटा 22.53 करोड़ रुपए से घटकर 17.89 करोड़ रुपए रह गया।
दक्षिणांचल डिस्कॉम में वितरण हानि 25.64% से घटकर 14.78% और AT&C हानि 31.03% से घटकर 19.57% रह गई। थ्रू-रेट भी 3.65 रुपए प्रति यूनिट से बढ़कर 4.06 रुपए हो गया। यहां वर्ष 2025-26 में 105 करोड़ रुपए की वसूली हुई, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में जुलाई तक 155 करोड़ रुपए की वसूली की जा चुकी है।
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