जालंधर पुलिस की कार्रवाई-7 माह में 1,440 तस्कर गिरफ्तार: 1,201 मामले दर्ज और 51 अवैध पिस्टल बरामद, कई अपराधिक नेटवर्क ध्वस्त - Jalandhar News
पंजाब पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ और ‘गैंगस्टरों पर वार’ अभियान के तहत जालंधर कमिश्नरेट पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पिछले सात महीनों (जनवरी 2026 से अब तक) में पुलिस ने एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत 1,201 मामले दर्ज कर 1,440 नशा तस्कर
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इसके साथ ही, संगठित अपराध और असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 51 अवैध पिस्टल और 133 जिंदा कारतूस भी बरामद किए गए हैं। पुलिस की इस आधुनिक और खुफिया-आधारित रणनीति से आपराधिक नेटवर्क को आर्थिक और लॉजिस्टिकल रूप से पूरी तरह से तोड़ दिया गया है।
अंतर्राष्ट्रीय गैंगस्टरों से जुड़े अपराधों का पर्दाफाश करने से लेकर नशा तस्करी के नेटवर्क को पस्त करने तक, जालंधर कमिश्नरेट पुलिस ने अपराध के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अपराधियों के वित्तीय स्रोतों, हथियारों की आपूर्ति, लॉजिस्टिक्स और नए सदस्यों की भर्ती पर सीधा हमला बोलना है।
पुलिस ने नशे के खिलाफ की कार्रवाई
नशे के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 16.810 किलोग्राम हेरोइन, 119 ग्राम मेथामफेटामाइन , 9.274 किलोग्राम अफीम, 24.624 किलोग्राम गांजा, 33.750 किलोग्राम भुक्की, 20 ग्राम कोकीन, 15.200 किलोग्राम चरस और 3,130 नशीली गोलियां/कैप्सूल जब्त किए हैं। इसके अलावा 11,17,900 रुपये की ड्रग मनी और तस्करी में इस्तेमाल वाहन भी जब्त किए गए हैं।
गैंगस्टरों के तंत्र को खत्म करने के लिए पुलिस ने सघन चेकिंग अभियान चलाया। 45 इमरजेंसी रिस्पांस व्हीकल और 14 मोटरसाइकिल गश्त इकाइयों के साथ 209 पुलिसकर्मी शहर में लगातार तैनात हैं। साथ ही, प्रवेश और निकास मार्गों पर स्थायी नाकेबंदी से अपराधियों पर नकेल कसी गई है। जांच में तकनीक का भरपूर इस्तेमाल किया
जांच में तकनीक का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है। पंजाब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम , इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और डिजिटल फॉरेंसिक लैब की मदद से वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। सीसीटीवी और मोबाइल डेटा के जरिए अपराधियों की पहचान तुरंत की जा रही है। डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि पंजाब पुलिस अब अपराध होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय, पूरे आपराधिक तंत्र को खत्म करने पर केंद्रित है। इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशन्स से अपराधियों के काम करने का दायरा लगातार घट रहा है।
कानून व्यवस्था के साथ-साथ पुलिस पुनर्वास पर भी ध्यान दे रही है। नशे की मांग घटाने के लिए अब तक 1,300 लोगों को नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती कराया गया है और 1,509 लोगों को OOAT केंद्रों में इलाज उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा 504 पात्र व्यक्तियों को एनडीपीएस एक्ट की धारा 64-ए के तहत राहत दी गई है।
पुलिस कमिश्नर सतिंदर सिंह के अनुसार, इस रणनीति से कई बड़े मामलों को सुलझाया गया है, जिसमें बीएसएफ चौक धमाका कांड और पाकिस्तान आधारित हैंडलरों से जुड़े देश विरोधी मॉड्यूल का पर्दाफाश शामिल है। जालंधर पुलिस का मुख्य उद्देश्य अपराध के नेटवर्क को पूरी तरह से समाप्त करना है।