'सरकारी स्कूल में पढ़ने वालों को ही मिले सरकारी नौकरी'... कक्षा 7 की अंजलि ने क्यों कही ये बात?
Ghazipur News: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में कक्षा सात की एक छात्रा का महज 11 सेकेंड का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. खानपुर क्षेत्र के नसीरपुर गांव की रहने वाली अंजलि कश्यप ने अपने वीडियो में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य और सरकारी नौकरी को लेकर एक सुझाव दिया. अंजलि ने कहा कि अगर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को ही सरकारी नौकरी का अवसर मिले तो शायद सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था बेहतर हो सकती है और गरीब परिवारों के बच्चों को भी आगे बढ़ने का समान मौका मिल सकता है.
5 दिन में 28 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा वीडियो
अंजलि का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से लोगों का ध्यान खींच रहा है. बताया जा रहा है कि महज पांच दिनों में वीडियो को 28 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं. करीब 1.9 लाख लोगों ने इसे लाइक भी किया है. हालांकि, इस वीडियो की खास बात इसके व्यूज और लाइक्स से ज्यादा अंजलि की उम्र और उसकी बात है. कक्षा सात में पढ़ने वाली बच्ची ने बेहद कम समय में शिक्षा व्यवस्था और समान अवसर को लेकर सवाल खड़ा कर दिया.
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सरकारी स्कूल में पढ़ती है अंजलि
अंजलि नसीरपुर गांव के कंपोजिट विद्यालय में कक्षा सात की छात्रा है. वह पढ़ाई करके आगे बढ़ना चाहती है. उसके परिवार की आर्थिक स्थिति हालांकि उसके लिए बड़ी चुनौती है. अंजलि के पिता संजय रोजगार की तलाश में मुंबई गए थे। वहां वह आटा चक्की चलाते हैं. परिवार के मुताबिक, वह कई वर्षों से घर वापस नहीं आए हैं. अंजलि की मां नंदनी प्राथमिक विद्यालय में रसोईया हैं. इसके साथ ही वह दूसरे घरों में काम करके परिवार की जरूरतें पूरी करती हैं.
परिवार की स्थिति ने अंजलि को सोचने पर मजबूर किया
अंजलि भी दूसरे बच्चों की तरह अच्छी शिक्षा हासिल करना चाहती है, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति के चलते उसके सामने कई मुश्किलें हैं. माना जा रहा है कि अपने आसपास के हालात और खुद के अनुभवों से ही उसके मन में शिक्षा और सरकारी नौकरी को लेकर यह विचार आया. हालांकि, सरकारी नौकरी में चयन के लिए मौजूदा व्यवस्था में शैक्षणिक योग्यता, प्रतियोगी परीक्षा, मेरिट और आरक्षण जैसे नियम लागू हैं. ऐसे में अंजलि का सुझाव व्यवस्था में बदलाव को लेकर बहस का विषय हो सकता है, लेकिन उसकी बात शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर को लेकर एक बड़ा सवाल जरूर उठाती है.
अंजलि की मदद के लिए आगे आईं ज्योति किन्नर
अंजलि का वीडियो वायरल होने के बाद क्षेत्र की ज्योति किन्नर उसके घर पहुंचीं. उन्होंने अंजलि को साइकिल, बैग और कॉपी-किताबें दीं. इसके साथ ही उन्होंने उसकी आगे की पढ़ाई में मदद करने का भरोसा भी दिया. ज्योति किन्नर ने अंजलि को उसकी पसंद की कोचिंग में पढ़ाने का वादा भी किया है. इससे अंजलि के परिवार को उसकी पढ़ाई जारी रखने में मदद मिलने की उम्मीद है.
11 सेकेंड में उठे शिक्षा से जुड़े कई सवाल
अंजलि ने कैमरे के सामने सिर्फ 11 सेकेंड में अपनी बात रखी, लेकिन उसकी छोटी सी बात ने सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, आर्थिक असमानता और बच्चों को मिलने वाले अवसरों को लेकर चर्चा शुरू कर दी है. उसका सवाल भले ही एक छात्रा की सोच से निकला हो, लेकिन यह इस बात पर चर्चा का मौका जरूर देता है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा और आगे बढ़ने के कितने समान अवसर मिल पा रहे हैं.

अनिल कुमार
मैं अनिल कुमार वर्ष 2007 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. मैंने अपने करियर की शुरुआत S1 से की थी. दिसंबर 2007 में मैं Zee News से जुड़ा और गाजीपुर की खबरों पर पैनी नजर रखते हुए कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट कीं. इसके बाद India TV और News18 India (पूर्व IBN7) के लिए भी काम किया और जिले में मजबूत पहचान बनाई. मेरी गेहूं सड़ने की खबर पर उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लिया था, जो मेरी प्रभावशाली रिपोर्टिंग का उदाहरण है. TV9 पर प्रसारित मेरी दिव्यांग बच्चों से जुड़ी रिपोर्ट के बाद शासन-प्रशासन सक्रिय हुआ और राज्यपाल ने गाजीपुर पहुंचकर प्रभावित बच्चों से मुलाकात की.
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