राज्य कर्मचारियों की 7 सूत्रीय मांगों के निराकरण हेतु प्रदेश व्यापी आंदोलन का ऐलान - TEAM RSKASS

भोपाल, 10 सितंबर 2026: राज्य शासकीय कर्मचारी अधिकार संरक्षण संघ के संरक्षक श्री शील प्रताप सिंह पुंडीर के मुख्य आतिथ्य एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री व्यासमुनि चौबे की अध्यक्षता में आज दिनांक 10 सितंबर 26 को संपन्न हुई इस बैठक में भारी संख्या में राज्य के विभिन्न संभाग, जिला, तहसील और विभागीय समिति के अध्यक्ष व पदाधिकारीगण शामिल हुए।

संगठन के प्रदेश प्रवक्ता शोएब सिद्दीकी  भोपाल जिला शाखा अध्यक्ष प्रणव खरे द्वारा जारी संयुक्त बयान में बताया है कि राज्य सरकार द्वारा नियमित, कार्यभारित, संविदा, दैनिक वेतन भोगी, जनभागीदारी और आउटसोर्स सहित विभिन्न अस्थाई संवर्गों के सेवकों के पक्ष में विभिन्न न्याय पालिकाओं द्वारा पारित न्यायादेशों द्रारा प्रदत्त न्याय एवं शासकीय प्रावधानों व हितों की लगातार उपेक्षा की जा रही है। कर्मचारियों की न्यायोचित समस्याओं के निराकरण व हितलाभ देने में विभागीय उदासीन और शोषणकारी रवैये उनके सेवाधिकारों के हनन के कारण सरकार के खिलाफ कर्मचारियों में व्याप्त व्यापक रोष व असंतोष के संबंध में बैठक में हुई सहमति अनुसार व्यापक विचार-विमर्श कर सरकारके ध्यानाकर्षण करने हेतु चरणबद्ध आंदोलन किए जाना एकमत से सुनिश्चित किया है।

लंबित मुख्य मांगें

सीपीसीटी (CPCT) अनिवार्यता की समाप्ति: नियमित संवर्गों के वेतन विसंगतियों को दूर किया जाए। सीधी भर्ती, नियुक्ति और चतुर्थ वर्ग की पदोन्नति में सीपीसीटी की अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त किया जाए।

पद विभेदीकरण नीति में सुधार: कार्यभारित सेवाओं सहित अस्थाई संवर्गों के पदों में भेदभाव समाप्त कर उन्हें तत्काल नियमित सेवाओं में परिवर्तित किया जाए। वर्ष 1984 के नियमों में हेर-फेर कर पदोन्नति लाभ से वंचित करने वाले संशोधित भर्ती नियम 2011-12 को तत्काल निरस्त या संशोधित किया जाए।

वेतन कटौती की राशि की वापसी: न्यायालय के निर्णयों के तहत परिवीक्षाकाल में स्टाइपेंड के नाम पर की गई 70, 80 और 90 प्रतिशत की अवैध वेतन कटौती को बंद कर काटी गई राशि का ब्याज सहित अविलंब भुगतान हो।

माननीय उच्च न्यायालय के न्यायादेश के पालन में पेंशन प्रयोजन हेतु दैनिक वेतन भोगी अस्थायी सेवा अवधि की गणना नियमितीकरण से पूर्व दैनिक वेतन भोगी के रूप में की गई अर्हतादायी सेवा अवधि की गणना कर कुल सेवाकाल हेतु उपादान (Gratuity) राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

राज्य सरकार की संविदा नीति-2023 का कड़ाई से पालन: लोकसेवा प्रबंधक, ब्लॉक कोऑर्डिनेटर, संविदा शिक्षक, नर्सिंग स्टाफ, कंप्यूटर ऑपरेटर आदि सभी विभागीय कार्यालयीन एवं मैदानी पदों पर कार्यरत संविदा सेवकों को शासन नीति के अंतर्गत देय समस्त हितलाभ प्रदान किए जाएं।

एकमुश्त नियमितीकरण लाभ :मध्य प्रदेश औद्योगिक अधिनियम 1961 एवं 1963 के प्रावधानों और न्यायालयीन आदेशों के तहत, नियोजन की प्रथम नियुक्ति तिथि से 240 दिवस निरंतर सेवा पूरी करने वाले समस्त दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों की सेवाओं एवं शासकीय विभागों और महाविद्यालयों में जनभागीदारी व आउटसोर्स के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों  सेवाओं का "श्रम एवं पदविभेदीकरण नीति" अंतर्गत एकमुश्त नियमित पदो पर परिवर्तित एवं स्थायीकरण किया जाए। 

7.लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) व अन्य विभागों में दैनिक वेतन भोगियों को बिना वार्षिक वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) के अवैधानिक रूप से न्यायादेशों की गलत व्याख्या कर स्वीकृत न्यूनतम वेतनमान देने की वित्तीय विसंगति को दूर कर उन्हें "वार्षिक वेतन वृद्धि सहित"वेतनमान संशोधन कर पूर्ण हितलाभ किया जावे।

8.विभागीय परीक्षा से छूट:राज्य शासनादेशों के अनुसार 45वर्ष आयु पूर्ण कर चुके सेवकों को विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण की अनिवार्यता से छूट प्रदान कर उन्हें समयमान व पदोन्नति का लाभ प्रदान किया जाने हेतु सभी विभागों द्वारा विभागीय सेवा भर्ती नियमों में प्रावधान किये जाने के निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कर सेवकों को लाभान्वित किया जाए।

संगठन के संरक्षक श्रील प्रताप सिंह पुंडीर प्रांत अध्यक्ष श्री व्यस्मानी चौबे कार्यकारी अध्यक्ष श्री देवी सिंह सनोदिया उपाध्यक्ष श्री भगवान सिंह ठाकुर प्रदेश महामंत्री श्री शिव मोहन सोनी रवि शंकर त्रिपाठी प्रदेश प्रवक्ता श्री शोएब सिद्दीकी जिला शाखा भोपाल के अध्यक्ष श्री प्रणव खरे जिला प्रवक्ता श्री सूर्यकांत मिश्रा दिनेश शिवहरे बादशाह खान, सतीश पारा, मंगलेश दुबे मनीष राजपूत पुष्पेंद्र सिंह,मयंक श्रीवास्तव उच्च शिक्षा विभाग के अध्यक्ष श्री लालाराम रैकवार सहित भारी संख्या में उपस्थित संगठन पदाधिकारीयों द्वारा सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध प्रदर्शन करते हुए राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा लंबित मांगों का निराकरण हेतु प्रदोष के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव मुख्य सचिव अपर मुख्य सचिव सामान प्रशासन विभाग सहित विभिन्न स्तरों पर मांग पत्र सोप जाएंगे एवं मांगों का निराकरण किए जाने हेतु 01 माह का अल्टीमेटम देकर  निराकरण न होने की स्थिति में सरकार के उदासीन रवैए के विरोध में मजबूर किए जाने पर राज्यव्यापी चरणबद्ध आंदोलन एवं विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है।