डीआर काँगो: इबोला से निपटने के लिए टीके की 70 हज़ार ख़ुराकें

डीआर काँगो: इबोला से निपटने के लिए टीके की 70 हज़ार ख़ुराकें

एर्वेबो ((Ervebo) वैक्सीन को मूल रूप से ज़ायरे इबोलावायरस (Zaire strain) से बचाव के लिए विकसित किया गया था. इसी वायरस के कारण 2014 से 2016 के बीच पश्चिम अफ़्रीका में अब तक का सबसे घातक इबोला प्रकोप फैला था.

डीआर काँगो सरकार ने पिछले सप्ताह वैश्विक इबोला वैक्सीन भंडार से ख़ुराकें उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था. ICG की मंज़ूरी के बाद अब वैक्सीन की यह खेप देश भेजी जा रही है.

अँधेरे में तीर

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने गुरूवार को जारी एक प्रैस विज्ञप्ति में टीके की ख़ुराकें उपलब्ध कराए जाने का स्वागत किया. हालाँकि, संगठन ने कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि एर्वेबो टीका, इबोला के बुंडिबुग्यो प्रकार के ख़िलाफ़ प्रभावी होगा या नहीं.

WHO के अनुसार, शुरुआती प्रयोगशाला और पशु अध्ययनों से संकेत मिले हैं कि यह कुछ हद तक सुरक्षा दे सकता है. क्लिनिकल परीक्षण से मिलने वाले नए प्रमाणों से भविष्य में इस टीके के इस्तेमाल पर निर्णय लेने में मदद मिलेगी.

बुंडिबुग्यो इबोला प्रकोप के तेज़ी से फैलने को देखते हुए, ICG ने 20 हज़ार ख़ुराकें डीआरसी में क्लिनिकल परीक्षण के लिए और शेष 50 हज़ार ख़ुराकें स्वास्थ्यकर्मियों के लिए आवंटित की हैं.

इसका मतलब है कि प्रभावित इलाक़ों में कुछ लोगों को क्लिनिकल परीक्षण का हिस्सा बने बिना भी यह टीका दिया जा सकेगा. अब तक के परीक्षणों में एर्वेबो टीके के गम्भीर दुष्प्रभाव बहुत कम देखे गए हैं.

WHO के महानिदेशक टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने गुरूवार को इस फ़ैसले का स्वागत करते हुए इसे “वैश्विक एकजुटता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण” बताया.

मामलों की संख्या पाँच हज़ार के पार

15 मई को घोषित इबोला प्रकोप में अब तक 2,325 लोगों की मौत हो चुकी है, और यह डीआर काँगो के इतिहास का सबसे घातक इबोला प्रकोप बन गया है.

हालाँकि स्थानीय अधिकारियों ने सोमवार के बाद मौतों की संख्या का नया आँकड़ा जारी नहीं किया है. लेकिन बुधवार को जारी आँकड़ों के अनुसार, इबोला के कुल मामले बढ़कर 5,021 हो गए हैं.

संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ इबोला समन्वयक जूलियन हार्निस ने गुरूवार को बताया कि 160 से अधिक स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हो चुके हैं, जिनमें से 40 की मौत हुई है.

पूर्वी डीआरसी में काँगो सरकार और रवांडा समर्थित M23 सशस्त्र गुट के बीच जारी हिंसक टकराव और अन्य सशस्त्र गुटों की गतिविधियों के कारण इबोला को फैलने से रोकना मुश्किल हो रहा है. चिकित्सा टीमें कई प्रभावित इलाक़ों तक नहीं पहुँच पा रही हैं, स्वास्थ्य केन्द्र नष्ट या बन्द हुए हैं और हज़ारों लोग विस्थापित हुए हैं.

इन हालात में संक्रमित लोगों के सम्पर्क में आए व्यक्तियों का पता लगाना और मृतकों का सुरक्षित अन्तिम संस्कार करना बेहद मुश्किल हो गया है.

इबोला के ख़िलाफ़ विद्रोही गुटों की कार्रवाई

ख़बरों के अनुसार, M23 सशस्त्र गुट का दावा है कि वह किन्शासा सरकार से अलग, अपने नियंत्रण वाले इलाक़ों में इबोला से निपटने की व्यवस्था चला रहा है. इसके लिए उसने एक स्वास्थ्य प्रशासन स्थापित किया है, जो प्रयोगशालाओं की देखरेख करता है और, गुट के अनुसार, बीमारी के फैलाव पर भी नज़र रखता है.

गुरूवार को M23 ने कथित तौर पर घोषणा की कि इबोला का फैलाव रोकने के लिए वह सरकार के नियंत्रण वाले प्रभावित इलाक़ों से आने-जाने वाली साझा टैक्सी और नाव सेवाएँ निलम्बित करेगा.

संयुक्त राष्ट्र ने M23 गुट पर प्रतिबन्ध लगाए हैं और आम लोगों के विरुद्ध उसके गम्भीर अत्याचारों की कड़ी निन्दा की है. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, अनेक रिपोर्टों, जाँच एवं गवाहियों में जबरन भर्ती, सामूहिक हत्याओं और यौन हिंसा के मामले दर्ज किए गए हैं.

टीके से ‘सभी के लिए उम्मीद’

ICG बड़े प्रकोपों के दौरान देशों को आपातकालीन टीके और एंटीबायोटिक दवाएँ उपलब्ध कराने का समन्वय करता है. 2021 से जुलाई 2026 के बीच उसने डीआरसी में इबोला के कई प्रकोपों से निपटने के लिए एर्वेबो टीके की 56 हज़ार ख़ुराकें आवंटित की थीं.

सोशल मीडिया मंच X पर एक पोस्ट में, जूलियन हार्निस ने गुरूवार को ICG द्वारा घोषित नए आवंटन का स्वागत किया.

उन्होंने लिखा, “टीकों का यह आवंटन प्रभावित इलाक़ों में सभी लोगों, विशेष रूप से अग्रिम मोर्चे पर काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों के लिए उम्मीद जगाता है."