जितने वोटों के अंतर से 70 में 68 पर हुई हार-जीत, दिल्ली में उससे ज्यादा मतदाता SIR में हो गए बाहर!
रिपोर्ट में कहा गया कि सूची से बाहर किए गए मतदाताओं में 31,59,223 को स्थायी रूप से स्थानांतरित, 11,73,552 को पता नहीं चलने , 2,82,412 को मृत और 1,41,535 को पंजीकृत/दोहरे मतदाता के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुए विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) पर मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस SIR के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए वोटरों की संख्या, दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से 68 पर जीत के अंतर से ज़्यादा है। यानी 2025 में दिल्ली विधानसभा की 70 में से 68 सीटों पर जितने वोट के अंतर से हार-जीत तय हुई, उससे ज्यादा मतदाताओं के नाम SIR से बाहर हो गए हैं। 'वोटर अधिकार मंच' का यह अध्ययन निर्वाचन आयोग और दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी आंकड़ों पर आधारित है।
अध्ययन के अनुसार, 31 जनवरी 2025 को जब दिल्ली विधानसभा चुनाव हुए थे, उस समय दिल्ली की मतदाता सूची में 1,56,14,000 मतदाता थे। वहीं, 30 जून 2026 तक जब एसआईआर शुरू हुआ, मतदाता सूची में 1,45,10,299 मतदाता रह गए थे। सबर इंस्टीट्यूट और वोटर अधिकार मंच द्वारा किए गए ऑडिट के अनुसार, एसआईआर के दौरान निर्वाचन आयोग ने 47,27,762 और मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरे (एएसडीडी) मतदाताओं के रूप में चिह्नित किया। यह संख्या एसआईआर के आधार मतदाताओं का 32.8 प्रतिशत है, यानी करीब हर तीन में से एक मतदाता।
31,59,223 वोटर स्थायी रूप से स्थानांतरित
रिपोर्ट में कहा गया कि सूची से बाहर किए गए मतदाताओं में 31,59,223 को स्थायी रूप से स्थानांतरित, 11,73,552 को पता नहीं चलने या अनुपस्थित, 2,82,412 को मृत और 1,41,535 को पंजीकृत/दोहरे मतदाता के रूप में वर्गीकृत किया गया। ऑडिट में यह भी पाया गया कि एसआईआर शुरू होने से पहले जनवरी 2025 से 30 जून 2026 के बीच 11,03,701 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे। रिपोर्ट में कहा गया कि एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होने से पहले के दो-तीन महीनों में नाम हटाए जाने की संख्या में तेज बढ़ोतरी हुई। अप्रैल 2026 में 3,39,509 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए।
10 से ज्यादा असेंबली क्षेत्र में 49 फीसदी नाम कटे
दस से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची से बाहर किए जाने की दर 40 प्रतिशत से अधिक रही। तुगलकाबाद में यह दर सबसे अधिक 47.83 प्रतिशत रही, इसके बाद ओखला में 45.16 प्रतिशत और आर. के. पुरम में 44.36 प्रतिशत रही। 'वोटर अधिकार मंच' द्वारा मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई को संबोधित करते हुए कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने कहा कि इन निष्कर्षों से पता चलता है कि एसआईआर की कवायद के जरिए देशभर में क्या हो रहा है।
देश में 15 करोड़ मतदाताओं के नाम गायब
यादव ने कहा, ''इस देश में 15 करोड़ मतदाताओं के नाम गायब हैं। ऐसे लोग जिनका नाम मतदाता सूची में होना चाहिए, लेकिन नहीं है। दुनिया में लोकतंत्र के इतिहास में इतनी बड़ी धोखाधड़ी कभी नहीं हुई।'' उन्होंने एसआईआर शुरू होने से पहले दिल्ली की मतदाता सूची से 11 लाख से अधिक नाम हटाए जाने पर भी सवाल उठाया। यादव ने कहा कि सामान्य प्रक्रिया के तहत पहले नोटिस दिया जाना चाहिए, फिर आपत्ति दर्ज करने का मौका, सुनवाई और उसके बाद लिखित आदेश जारी किया जाना चाहिए।
कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने मौजूदा समय में मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों और फरवरी 2025 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव के बीच संबंध की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि उस चुनाव में करीब 94 लाख मतदाताओं ने मतदान किया था। उन्होंने सवाल किया, ''आज 91 लाख मतदाताओं के नाम या तो हटा दिए गए हैं...फिर चुनाव में किन मतदाताओं ने मतदान किया था? क्या दिल्ली की जनता यह मान सकती है कि फरवरी 2025 के चुनाव का परिणाम सही था? हम दिल्ली में हुए फरवरी 2025 के चुनाव के नतीजे पर कैसे भरोसा करें?''