शेयर बाजार धड़ाम: 700 अंक लुढ़का सेंसेक्स, निफ्टी भी 24 हजार से नीचे फिसला; इन 5 वजहों से आई गिरावट - Haribhoomi

Closing Bell: भारतीय शेयर बाजार में महंगे कच्चे तेल, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से बड़ी गिरावट हुई। सेंसेक्स और निफ्टी लगातार तीसरे दिन दबाव में रहे। ब्रेंट क्रूड 4 फीसदी उछलकर 94.72 डॉलर प्रति बैरल पहुंचा, जबकि रुपया कमजोर होकर 96.36 प्रति डॉलर पर आ गया।

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भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

  • Published: 22 Jul 2026, 04:00 PM IST
  • Last Updated: 22 Jul 2026, 04:00 PM IST

Closing Bell: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को लगातार तीसरे कारोबारी सेशन में गिरावट देखने को मिली। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, बैंकिंग शेयरों में बिकवाली और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। निफ्टी 191 अंक यानी 0.79 फीसदी गिरकर 23996.25 और सेंसेक्स 715 अंक गिरकर 76755.05 पर क्लोज हुआ। 

बाजार में कमजोरी का असर व्यापक स्तर पर भी दिखाई दिया। निफ्टी के लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। सिर्फ ऑटो इंडेक्स में मामूली बढ़त रही। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1.02 फीसदी और निफ्टी मिडकैप 100 में 0.79% की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, बजाज ऑटो और टीवीएस मोटर्स के शेयरों में करीब 4 फीसदी और 3.5 फीसदी की तेजी रही। दोनों कंपनियों के तिमाही मुनाफे में बढ़ोतरी के बाद इनके शेयरों को सपोर्ट मिला।

बाजार में गिरावट की बड़ी वजहें इस तरह समझिए

कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 4 फीसदी बढ़कर 94.72 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। यह 5 हफ्तों से ज्यादा का सबसे ऊंचा स्तर है। पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सप्लाई प्रभावित होने की आशंका के कारण तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है। ऐसे में महंगा तेल, व्यापार घाटा बढ़ाने और कंपनियों की लागत पर दबाव डालने का जोखिम पैदा करता।

रुपये में कमजोरी जारी
कच्चे तेल की महंगाई और जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच डॉलर की मांग बढ़ी। इसका असर रुपये पर पड़ा और भारतीय मुद्रा 11 पैसे कमजोर होकर 96.36 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गई।

पश्चिम एशिया का बढ़ता तनाव
लाल सागर और होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग से जुड़ी घटनाओं ने बाजार की चिंता बढ़ाई। सऊदी क्रूड लेकर एशिया जा रहे 2 ऑयल टैंकरों ने अपना रास्ता बदला, जबकि एक अन्य टैंकर होर्मुज स्ट्रेट के पास चपेट में आया। हूती विद्रोहियों की धमकियों और अमेरिका-ईरान तनाव ने भी बाजार में जोखिम बढ़ाया है।

अमेरिकी टैरिफ का बाजार पर असर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जेनेरिक दवाओं पर फेज वाइज टैरिफ योजना की घोषणा के बाद निफ्टी फार्मा इंडेक्स 2 फीसदी से ज्यादा गिरा। सन फार्मा, सिप्ला और डॉ रेड्डीज लैब जैसे शेयर दबाव में रहे, क्योंकि भारतीय फार्मा कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार से आता है।

बैंकिंग शेयरों में बिकवाली
बैंक निफ्टी में 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट रही। बंधन बैंक करीब 10 फीसदी टूट गया। बेहतर तिमाही मुनाफे के बावजूद बैंक ने रिटर्न ऑन एसेट्स को लेकर कमजोर संकेत दिए। एचडीएफसी बैंक भी करीब 1 फीसदी गिरा और तीन कारोबारी सत्रों में इसकी गिरावट करीब 8 फीसदी हो गई।

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, निफ्टी 24220 के ऊपर जाने की कोशिश कमजोर रहा। जब तक Nifty 24099 के आसपास के स्तर से बहुत नीचे नहीं जाता, तब तक गिरावट में खरीदारी की रणनीति अपनाई जा सकती। हालांकि, कमजोर मोमेंटम के कारण बाजार में फिलहाल सावधानी जरूरी है।

(प्रियंका कुमारी)