खुलते ही धड़ाम हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा टूटा
Stock Market Crashe: वैश्विक बाजारों में बढ़ती अस्थिरता का असर शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत ही भारी गिरावट के साथ हुई। सुबह 9:16 बजे सेंसेक्स 707 अंक यानी 0.95 प्रतिशत गिरकर 74,192 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 238 अंक यानी 1 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,238 पर आ गया और 23,300 के स्तर से नीचे चला गया।
शुरुआती कारोबार में मेटल और रियल्टी शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। निफ्टी मेटल और निफ्टी रियल्टी दोनों में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और ये प्रमुख नुकसान वाले सेक्टर रहे। इसके अलावा मैन्युफैक्चरिंग, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, फाइनेंशियल सर्विसेज, ऑटो, कमोडिटीज, प्राइवेट बैंक, पीएसयू बैंक, डिफेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मा और हेल्थकेयर से जुड़े सूचकांक भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।
केवल निफ्टी आईटी ही हरे निशान में था
लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखा जा रहा था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 868 अंक या 1.40 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 61,488 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 284 अंक या 1.33 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 19,756 पर था।
सेंसेक्स पैक में टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, आईटीसी, भारती एयरटेल, टीसीएस और अदाणी पोर्ट्स गेनर्स थे। बजाज फाइनेंस, एमएंडएम, अल्ट्राटेक सीमेंट, एक्सिस बैंक, टाटा स्टील, इंडिगो, कोटक महिंद्रा बैंक, एलएंडटी, एचडीएफसी बैंक, टाइटन, इटरनल, सन फार्मा, बजाज फिनसर्व, आईसीआईसीआई बैंक, एनटीपीसी, एशियन पेंट्स और मारुति सुजुकी लूजर्स थे।
गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुआ अमेरिकी बाजार
ज्यादातर वैश्विक बाजारों में लाल निशान में कारोबार हो रहा था। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक, सोल और जकार्ता लाल निशान में थे। अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे, जिसमें डाओ जोन्स 0.60 प्रतिशत की कमजोरी के साथ और नैस्डैक 0.65 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।
जानकारों ने कहा कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण मार्केट के लिए मुश्किलें बढ़ रही हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर लगभग 108 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। अगर यह ऊंची कीमत बनी रहती है या फिर और बढ़ जाती है, तो भारत की जीडीपी ग्रोथ और उसके नतीजतन कॉर्पोरेट की कमाई पर इसका असर काफी ज्यादा होगा। एक और बड़ी मुश्किल अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी है। 10-साल की यील्ड, जो अभी 4.96 प्रतिशत पर है, 5 प्रतिशत के स्तर के करीब पहुंच रही है। कई लोग इसे ग्लोबल इक्विटी मार्केट के लिए एक अहम मोड़ मानते हैं। ग्लोबल इक्विटी मार्केट में गिरावट की संभावना है, लेकिन इसका सही समय बताना मुश्किल है।
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