तय समय पर नहीं होगा पंचायत चुनाव, मुखिया-सरपंच भी हटेंगे: 8,000 पंचायतों का बदलेगा भूगोल-इतिहास, दिसंबर के बाद गांव की सरकार कौन चलाएगा, जानें सब - Bihar News
बिहार में पंचायत चुनाव अगले साल यानी 2027 के अंत तक ही हो पाएगा। चुनाव में देरी के पीछे पंचायतों का परिसीमन बड़ा कारण है। चुनाव में देरी के कारण दिसंबर 2026 के बाद गांव की सरकार भंग हो जाएगी।
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परिसीमन क्यों हो रहा है, दिसंबर 2026 के बाद गांव की सरकार क्यों भंग हो जाएगी, मुखिया-सरंपच क्या करेंगे, समझेंगे; बूझे की नाही में…।
सवाल-1ः पंचायतों का परिसीमन क्यों हो रहा है?
जवाबः 2 सबसे बड़े कारण हैं…
1. 35 साल से परिसीमन नहीं हुआ, आबादी बढ़ गई है
राज्य की पंचायतों का आखिरी बार 1991 की जनगणना के आधार पर 1993-94 में परिसीमन हुआ था। तब राज्य की आबादी 8.63 करोड़ थी। उस वक्त बिहार में झारखंड भी शामिल था।
2000 में झारखंड के अलग होने पर बिहार की आबादी 6.45 करोड़ बच गई थी। जबकि, बिहार जातीय गणन-2023 की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य की आबादी 13.2 करोड़ है। यही कारण है कि अभी करीब 20 हजार आबादी पर एक मुखिया हैं।
- सम्राट सरकार ने 15 जुलाई को सम्राट कैबिनेट ने पंचायतों का परिसीमन कराने की मंजूरी दी। इसमें कहा गया कि 2011 की जनगणना के आधार पर पंचायतों का नए सिरे से परिसीमन होगा। इसके आधार पर ही पंचायत चुनाव होगा।
- पंचायती राज विभाग ने 20 जुलाई 2026 को परिसीमन का आदेश जारी कर दिया। परिसीमन बिहार राज्य निर्वाचन आयोग करेगा। जुलाई 2027 तक पूरा होने की संभावना है।
- पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा, 'परिसीमन पूरा होने के बाद ही पंचायत चुनाव से जुड़ी आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। पूरी प्रक्रिया राज्य निर्वाचन आयोग की देखरेख में हो रही है।'
- मुखिया महासंघ के अध्यक्ष मिथिलेश राय ने कहा, 'दो दशक बाद परिसीमन हो रहा है। तय आबादी के हिसाब से क्षेत्र होगा तो विकास योजनाएं बनाने और राशि खर्च करने में सुविधा होगी।'
- पंच-सरपंच संघ के अध्यक्ष आमोद निराला ने कहा, 'तेजी से गांवों का भी विकास होगा। पंच और सरपंचों को भी नियमों के तहत अधिकार मिलेगा। मुख्यमंत्री ने इसका आश्वासन दिया है।'
2. आरक्षण का बदलना है रोस्टर
बिहार पंचायत राज अधिनियम-2006 की धारा 13, 15, 38, 65 और 91 के तहत पंचायतों के सभी 6 पदों (वार्ड सदस्य, मुखिया, पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य) के लिए सीटों का आरक्षण रोटेशन के आधार पर तय होता है।
- बिहार पंचायत राज (संशोधन) अधिनियम के तहत अनिवार्य किया गया है कि आरक्षण रोस्टर प्रत्येक दो चुनावों के बाद बदला जाएगा। जैसे-यदि 2016 और 2021 के पंचायत चुनावों में एक ही आरक्षण रोस्टर लागू रहा, तो अगले चुनाव 2026 में नियमतः आरक्षण रोस्टर का चक्र पूरी तरह बदल जाएगा।
- आखिरी बार 2016 में रिजर्वेशन का रोस्टर बदला था। इस कारण इस बार अपने-आप OBC, EBC, SC-ST और महिलाओं के लिए रिजर्व सीटों में बदलाव होगा।

सवाल-2ः परिसीमन के बाद क्या-क्या बदल जाएगा?
जवाबः सरकार ने बताया है कि परिसीमन का मकसद आबादी के हिसाब से संतुलित प्रतिनिधित्व देना है।
- प्रखंड को इकाई मानकर AI की मदद से परिसीमन होगा। प्रक्रिया तुरंत शुरू होगी। किसी भी राजस्व गांव का बंटवारा नहीं किया जाएगा। पूरा गांव एक ही पंचायत का हिस्सा रहेगा। परिसीमन से पंचायतों के भौगोलिक और सामाजिक समीकरण बदल जाएंगे।
- यदि किसी पंचायत में SC, ST और OBC की कुल आबादी 50% से अधिक है, तो पंचायत मुख्यालय उसी गांव में बनेगा, जहां इन वर्गों की आबादी सबसे ज्यादा होगी। इससे महिलाओं और पिछड़े वर्गों को मौका मिलेगा।
परिसीमन के बाद होने वाले बदलाव नीचे के ग्राफिक से समझिए…

सवाल-3ः तय समय पर चुनाव नहीं होगा, तो क्या मुखिया-सरपंच पद पर बने रहेंगे?
जवाबः बिल्कुल नहीं। उन्हें हटना ही होगा। संविधान के ऑर्टिकल-243(ई) और बिहार पंचायती राज अधिनियम-2006 की धारा 14 में स्पष्ट उल्लेख है कि ग्राम पंचायत की अवधि किसी भी सूरत में 5 साल से अधिक नहीं हो सकती है।
राज्य सरकार या राज्य विधानमंडल के पास ऐसी कोई शक्ति नहीं है कि वह पंचायतों में चुनाव न हो पाने की स्थिति में उसकी अवधि 5 साल से एक दिन भी अधिक बढ़ा सके।
जबकि, पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल दिसंबर 2026 तक ही है। ऐसे में उन्हें हटना ही होगा।
सवाल-4ः …तो फिर कौन चलाएगा गांव की सरकार?
जवाबः परामर्शी समितियां। दरअसल, 2021 में कोरोना की दूसरी लहर के कारण बिहार में पंचायत चुनाव निर्धारित समय (15 जून तक) पर नहीं कराए जा सके थे। तब नीतीश सरकार ने कानूनी अध्यादेश के जरिए यह विशेष व्यवस्था बनाई थी।
तब राज्य सरकार ने 1 जून 2021 को कैबिनेट की बैठक कर बिहार पंचायती राज अधिनियम 2006 की धारा 14, 39, 66 और 92 में संशोधन किया था।
इसमें कहा गया था कि पंचायत चुनाव नहीं होने की स्थिति में चारों स्तरों (ग्राम पंचायत, ग्राम कचहरी, पंचायत समिति और जिला परिषद) पर उनके संचालन के लिए परामर्शी समिति गठित होगी। यह समिति अगले चुनाव होने तक काम करेगी।
ज्यादा संभव है कि दिसंबर 2026 के बाद अगले चुनाव होने तक परामर्शी समितियां गांव की सरकार की कमान संभाल लेंगी।
परामर्शी समितियों में कौन-कौन होगा
अगर 2021 वाला कानून ही लागू हुआ तब 4 परामर्शी समितियां बनेंगी।
1. ग्राम पंचायतः निवर्तमान मुखिया इसके अध्यक्ष होंगे। सभी निवर्तमान वार्ड सदस्य, पंचायत सचिव, प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी, BDO की ओर से नामित पंचायत क्षेत्र के निवासी और राज्य, केंद्र, सेना, रेल, सार्वजनिक उपक्रम से रिटायर कोई एक व्यक्ति।
2. पंचायत समिति (प्रखंड): निवर्तमान प्रखंड प्रमुख अध्यक्ष होंगे। इसमें निवर्तमान सभी पंचायत समिति सदस्य, प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी और BDO सदस्य होंगे।
3. जिला परिषद: निवर्तमान जिला परिषद अध्यक्ष इसके अध्यक्ष होंगे। इसके अलावा पंचायती राज अधिनियम के तहत सदस्य रहे व्यक्ति, DDC यानी कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद् के सभी निवर्तमान सदस्य, जिला पंचायती राज पदाधिकारी इसमें शामिल होंगे।
4. ग्राम कचहरीः निवर्तमान सरपंच अध्यक्ष होंगे। इसमें सभी निवर्तमान पंच शामिल होंगे।
इनका क्या होगा काम...
- पंचायतों के रूटीन जैसे- नल जल योजना, मनरेगा, स्ट्रीट लाइट, सफाई व्यवस्था और अन्य विकास कार्य चलता रहेगा। लेकिन समिति कोई नहीं योजना चालू नहीं कर सकती।
- वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही रहेगी।
- विकास योजनाओं के लिए फंड जारी करने के लिए प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO), पंचायत सचिव और कार्यपालक पदाधिकारियों की सहमति व संयुक्त हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे।