खंडवा से इंदौर-खरगोन का बस किराया डबल: बस संचालक बोले- सरकारी बसें दौड़ेगी, इसलिए 8 साल में पहली बार बढ़ोत्तरी - Khandwa News

मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेशभर में बस किराए में बढ़ोतरी कर दी है। इसके बाद यात्री बसों में सफर करना अब पहले से महंगा हो गया है। अचानक हुई इस किराया वृद्धि का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। खंडवा से इंदौर का साधारण बस किराया, जो अब तक 200 रुपए था,

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प्रति किलोमीटर किराया बढ़ाकर 2 रुपए किया गया

परिवहन विभाग के अनुसार पहले साधारण बसों का किराया 1.25 रुपए प्रति किलोमीटर निर्धारित था। सरकार ने बुधवार रात गजट नोटिफिकेशन जारी कर इसे बढ़ाकर 2 रुपए प्रति किलोमीटर कर दिया है। यानी प्रति किलोमीटर 75 पैसे की बढ़ोतरी की गई है। नई दरें लागू होने के बाद साधारण बसों के साथ-साथ एसी, स्लीपर और लग्जरी बसों के किराए में भी वृद्धि हुई है।

कई प्रमुख रूटों पर बढ़ा किराया

नई दरों के अनुसार खंडवा से इंदौर का साधारण बस किराया 200 रुपए से बढ़कर 325 रुपए हो गया है। इसी तरह खंडवा से खरगोन का किराया 130 रुपए से बढ़कर 220 रुपए कर दिया गया है। वहीं, खंडवा से बुरहानपुर का किराया 1600 रुपए बताया गया है, जबकि पहले 100 रुपए होने का उल्लेख किया गया है। इन दोनों आंकड़ों में स्पष्ट असंगति है। संभव है कि नई राशि 160 रुपए हो, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। इसलिए इस रूट के किराए की पुष्टि परिवहन विभाग से की जानी चाहिए।

स्थानीय रूटों पर भी यात्रियों पर बढ़ा भार

किराया वृद्धि का असर स्थानीय रूटों पर भी पड़ा है। खंडवा से खालवा का किराया 70 रुपए से बढ़कर 125 रुपए हो गया है। पुनासा का किराया 60 रुपए से बढ़ाकर 140 रुपए कर दिया गया है। हरसूद और मूंदी सहित अन्य रूटों पर भी किराए में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जिससे रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों का खर्च बढ़ जाएगा।

बस संचालकों ने बताया क्यों जरूरी थी बढ़ोतरी

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बस संचालक सुनील आर्या ने कहा कि किराया बढ़ाना जरूरी था, क्योंकि पिछले आठ वर्षों में डीजल, ऑटो पार्ट्स, कर्मचारियों के वेतन और संचालन लागत में लगातार बढ़ोतरी हुई है। हालांकि उनका कहना है कि सरकार को यह बढ़ोतरी एक साथ करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से करनी चाहिए थी, ताकि यात्रियों पर अचानक अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़ता।

सरकारी बसों की तैयारी के बीच फैसला

सुनील आर्या का कहना है कि वर्ष 2018 में किराया वृद्धि के समय सरकार ने किराया निर्धारण बोर्ड बनाया था, जिसका उद्देश्य महंगाई के अनुसार समय-समय पर किराया तय करना था। लेकिन वर्षों तक इस दिशा में कोई निर्णय नहीं लिया गया। उनका कहना है कि अब जब सरकार परिवहन निगम के माध्यम से सरकारी बसों का संचालन शुरू करने की तैयारी कर रही है, उससे पहले निजी बसों के किराए में बढ़ोतरी का फैसला लिया गया है। इससे यात्रियों पर अचानक अधिक आर्थिक भार पड़ा है।