इस्राइली नेताओं के बयान के खिलाफ उतरे 8 मुस्लिम देश, जानें आखिर अचानक क्यों गरमा गई मिडिल ईस्ट की राजनीति

इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि इस्राइल की सेना गाजा को कंट्रोल कर रही है. हम पीछे नहीं हटने वाले हैं. हम येलो लाइन में बने रहेंगे. येलो लाइन हमास और इस्राइली सेना के नियंत्रण वाले इलाकों को अलग करती है.

इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि इस्राइल की सेना गाजा को कंट्रोल कर रही है. हम पीछे नहीं हटने वाले हैं. हम येलो लाइन में बने रहेंगे. येलो लाइन हमास और इस्राइली सेना के नियंत्रण वाले इलाकों को अलग करती है.

author-image

New Update

Israeli PM Benjamin Netanyahu 24 March

Benjamin Netanyahu

8 मुस्लिम बहुल देशों ने इस्राइल के रक्षामंत्री इस्राइल कॉट्ज और राषठ्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर के बयानों की कड़ी निंदा की. इन नेताओं ने गाजा से फलस्तीनियों को हटाने की प्लानिंग की बात कही थी. आठ मुस्लिम देशों ने अपने संयुक्त बयान में कहा कि ऐसे बयान और भड़काऊ प्रस्ताव इंटरनेशनल मानवीय काननू का खुला उल्लंघन है. यह फलस्तीनी लोगों के अधिकारों के लिए सीधा खतरा है. बता दें, आठ मुस्लिम देशों में सऊदी अरब, जॉर्डन, UAE, तुर्किये, कतर, मिस्र, इंडोनेशिया और पाकिस्तान शामिल है. 

काट्ज ने कहा था- अमेरिका तैयार हुआ तो गाजा खाली करा देंगे

दरअसल, बुधवार 2 सितंबर को इस्राइली रक्षा मंत्री इस्राइल कॉट्ज ने कहा था कि अगर अमेरिका मंजूरी देता है तो हम गाजा से फलस्तीनियों को बाहर निकाल देंगे. उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलहाल इस योजना को फ्रीज कर दिया है. इस्राइल अमेरिका के फैसले का इंतजार कर रहा है कि इन लोगों को कहां भेजा जाएगा. पहली बार फरवरी 2025 में ट्रंंप ने गाजा की लगभग 23 लाख आबादी को दूसरी जगह पर बसाने पर प्रस्ताव पेश किया था. हालांकि, कॉट्ज ने कहा था कि इतनी बड़ी आबादी को कोई भी देश अपने यहां लेने के लिए तैयार नहीं है. 

इजिप्ट के विरोध के बाद प्रस्ताव पर पीछे हटे ट्रम्प

अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ट्रंप ने कहा था गाजा के करीब 20 लाख फलस्तीनियों को वहां से चला जाना चाहिए. ट्रंप ने गाजा को फिर से बसाने और उसे भूमध्यसागर के किनारे एक लग्जरी रिसॉर्ट में बदलने की बात की थी. ट्रंप के इस प्रस्ताव का विभिन्न देशोंने विरोध किया था, जिसमें मिस्र भी शामिल था. मिस्र, इस्राइल के साथ-साथ गाजा के साथ भी सीमा को साझा करता है. 

खास बात है कि फलस्तीनियों ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया था. उनका कहना था कि अगर उनकी जमीन से उन्हें जबरन हटाया गया तो 1948 की याद आएगी, जब इस्राइल के बनने के दौरान बड़ी संख्या में फलस्तीनियों को अपना घर छोड़ना पड़ा था. इस घटना को फलस्तीनियों ने नकबा यानी तबाही कहा था. बता दें, अक्टूबर में गाजा में युद्धविराम का ऐलान किया गया था, जिसमें ट्रंप ने 20 बिंदुओं वाली एक योजना पेश की थी. इसमें फलस्तीनियों को गाजा से जबरन हटाने की बात नहीं थी. 

इस्राइल के कट्टरपंथी नेता इतामार बेन ग्वीर ने गुरुवार को गाजा की ज्यादातर फलस्तीनी आबादी को इलाके से बाहर निकालने की योजना पेश की थी. इसे उन्होंने स्वेच्छिक पलायन कहा था. कॉट्ज ने एक बार दावा किया था कि 80 प्रतिशत गाजावासी भी वहां से जाना चाहते हैं. हालांकि, हमास उनको ऐसा करने से रोक रहा है.

नेतन्याहू बोले- इजराइली सेना पीछे नहीं हटेगी

इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि इस्राइल की सेना गाजा को कंट्रोल कर रही है. हम पीछे नहीं हटने वाले हैं. हम येलो लाइन में बने रहेंगे. येलो लाइन हमास और इस्राइली सेना के नियंत्रण वाले इलाकों को अलग करती है. उन्होंने कहा कि हम गाजा पट्टी के 60 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित करते हैं. हम रुकने वाले नहीं है. हम उन आतंकियों को खत्म कर रहे हैं, जो हर दिन धमकी देते हैं.

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें! विशेष ऑफ़र और नवीनतम समाचार प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति बनें