समाज को क्रांतिकारी बदलावों के लिए होना होगा तैयार… मोहन भागवत के युवा संवाद पर अमृता फडणवीस का बड़ा बयान| Navbharat Live

समाज को क्रांतिकारी बदलावों के लिए होना होगा तैयार… मोहन भागवत के युवा संवाद पर अमृता फडणवीस का बड़ा बयान

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    गोरक्ष पोफली

Updated On: Aug 06, 2026 | 10:47 PM IST

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सार

Amruta Fadnavis Statement: मोहन भागवत के युवा संवाद पर अमृता फडणवीस का बयान। बोलीं- क्रांतिकारी बदलावों के लिए समाज को होना होगा तैयार, LGBTQIA+ और युवाओं के मुद्दों पर छिड़ी नई बहस।

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मोहन भागवत और अमृता फडणवीस (सोर्स: सोशल मीडिया)

विस्तार

Amruta Fadnavis Supports Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत द्वारा हाल ही में जेन-जी के साथ किए गए संवाद ने देश भर में एक नई वैचारिक बहस छेड़ दी है। इस महत्वपूर्ण चर्चा पर अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी और सामाजिक कार्यकर्ता अमृता फडणवीस का बड़ा बयान सामने आया है। मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सरसंघचालक के विचारों का समर्थन करते हुए भविष्य की रूपरेखा पर अपनी बात रखी।

अमृता फडणवीस ने मोहन भागवत के संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस चर्चा में कई अगर-मगर हो सकते हैं, लेकिन हमें अब सकारात्मक रूप से आगे की ओर देखना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सबसे महत्वपूर्ण यह देखना है कि क्या हमारे बच्चों के मुख्य मुद्दों को संबोधित किया जा रहा है या नहीं।

युवाओं की चिंताओं पर चल रहा है काम

अमृता फडणवीस के अनुसार, वर्तमान में छात्रों और युवाओं की सभी चिंताओं को न केवल देखा जा रहा है, बल्कि उन पर गंभीरता से काम भी किया जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि सरसंघचालक का युवाओं के साथ यह ‘संवाद’ और ‘साधना’ आने वाले समय में एक बड़ा बदलाव लेकर आएगी।

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#WATCH | Mumbai, Maharashtra: On RSS chief Mohan Bhagwat’s interaction at the India’s International Movement to Unite Nations event, Wife of Chief Minister Devendra Fadnavis & social worker Amruta Fadnavis says, “… There are many ifs and buts. So let’s look forward and what… pic.twitter.com/85Lr3PQs5f — ANI (@ANI) August 6, 2026

LGBTQIA+ और क्रांतिकारी बदलाव पर राय

सरसंघचालक मोहन भागवत ने चर्चा के दौरान LGBTQIA+ समुदाय को लेकर जो टिप्पणी की थी, उस पर अमृता फडणवीस ने विस्तृत राय रखी। उन्होंने कहा, मोहन जी ने स्पष्ट किया है कि समाज को इस तरह के क्रांतिकारी और विकासवादी बदलावों के लिए पहले मानसिक रूप से तैयार होना होगा।

उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि एक बार जब समाज मानसिक रूप से तैयार हो जाए, तो उसके बाद स्पष्ट कानून और नीतियां अस्तित्व में आनी चाहिए। उनके अनुसार, यदि भविष्य में कोई संस्था या संस्थान सामने आता है, तो उसके पास अपने स्पष्ट आंतरिक नियम होने चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की उथल-पुथल या बाधा की स्थिति में समाज सुरक्षित रहे। अमृता फडणवीस का मानना है कि इन सब पहलुओं पर पहले विचार करना समाज के हित में होगा।

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संवाद से निकलेगा समाधान

यह पूरी चर्चा इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस के एक कार्यक्रम के दौरान हुई, जहां अमृता फडणवीस ने भागवत के दृष्टिकोण को समाज के लिए बेहतर बताया। इससे पहले की चर्चाओं में मोहन भागवत ने स्पष्ट किया था कि नई पीढ़ी देशविरोधी नहीं है और उन पर आंख मूंदकर भरोसा किया जा सकता है। अमृता फडणवीस के इस ताजा बयान ने सरसंघचालक के उस भरोसे को और पुख्ता किया है कि सरकार और समाज मिलकर युवाओं की चिंताओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

अमृता फडणवीस का यह बयान न केवल युवाओं के प्रति संघ के बदलते नजरिए का समर्थन करता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि आधुनिक सामाजिक बदलावों को अपनाने के लिए मानसिक तैयारी और मजबूत कानून दोनों ही अनिवार्य हैं। उनका यह रुख दिखाता है कि विकास की राह में युवाओं के मुद्दों को केंद्र में रखना ही प्राथमिकता होनी चाहिए।

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