अभी हारी नहीं हूं...जब तक आपका अंत न देख लूं, जिंदा रहूंगी मैं; BJP के खिलाफ ममता बनर्जी ने फिर भरीं हुंकार| Navbharat Live
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सार
West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल चुनाव में हार और TMC में बड़ी बगावत के बाद ममता बनर्जी का बीजेपी पर तीखा हमला। उन्होंने कहा कि वह जब तक विरोधियों का अंत नहीं देख लेंगी, तब तक जिंदा रहेंगी।

ममता बनर्जी (सोर्स-सोशल मीडिया)
विस्तार
TMC Mamata Banerjee Attacks BJP: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बढ़ी सियासी तपिश टीएमसी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के BJP पर ताज़ा हमले ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष किसी को उसकी उम्र को लेकर अपमानित करने की कोशिश ना करें।
चुनाव के नतीजे आने वाले के दिन भाजपा के गुंडो ने भगवान से कामना की थी कि मुझको हार्ट अटैक आए और मेरी मौत हो जाए। पूर्व सीएम ने कहा कि बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि मैं तब तक जिंदा रहूंगी, जब तक आपका अंत ना देख लूं। भाॉजपा को लगता है ममता हार गई है, लेकिन अभी हारी नहीं हुं। मैं बंगाल के गरीब जनता के लिए हमेशा लडू़ंगी। मेरे पार्टी में अभी कई कार्यकर्ता मौजूद हैं, वहीं बहुत सारे लोग अभी भी पार्टी में जुड़ रहें हैं।
2026 के चुनाव में मिली करारी हार
दरअसल कुछ महिने पहले पश्चिमं बगाल में विधानसभा चुनाव हुए थे। जिसमें तृणमुल कांग्रेस (TMC) को करारी हार का सामना करना पड़ा। 15 साल से सत्ता में रही टीएमसी मात्र 80 सीटों पर ही सिमट के रह गई। वहीं इस चुनाव में भाजपा ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 208 सिटों पर प्रचंड जीत हासिल कर के नई सरकार बनाई। इतना ही नहीं इस चुनाव में ममता बनर्जी अपनी ही विधानसभा सीट भवानीपुर से 15,000 से अधिक वोटों से शुभेंदु अधिकारी से हार गईं। वर्तमान में शुभेंदु मुख्यमंत्री हैं।
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पार्टी में हुई बड़ी बगावत
चुनाव नतीजों के सामने आने के ठीक एक महीने बाद जून 2026 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर एक बड़ी बगावत हुई, जिससे टीएमसी अलग-अलग गुटों में बंट गई। तो वहीं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के नाम को लेकर शुरू हुए विवाद में 80 विधायकों में से 64 नवनिर्वाचित विधायकों ने बागी गूट का रुख अपनाते हुए टीएमसी के नेता ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता मान लिया। यह संख्या दल-बदल विरोधी कानून से बचने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत से अधिक थी, जिसके कारण विधानसभा अध्यक्ष ने भी इस बागी गुट को मान्यता दे दी।
बता दें कि यह विभाजन केवल राज्य तक ही सीमित न रहा। कुछ दिनों के बाद लोकसभा में भी काकोली घोष दस्तीदार के दिशानिर्देश में टीएमसी के 28 में से 20 सांसदों ने एक बागी गुट बनाकर केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) को अपना समर्थन देने का निर्णय किया।
इस बड़ी टूट की मुख्य वजह ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के बढ़ते कद से वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी और सत्ता जाने के बाद वैचारिक आधार की कमी को माना गया।
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TMC का राजनीतिक संकट
वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस (TMC) एक अत्यंत गंभीर राजनीतिक और कानूनी संकट से जूझ रही है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार और 15 साल सत्ता में रहने के बाद पार्टी का दो-तिहाई हिस्सा अलग होने से ममता बनर्जी का राजनीतिक सफर सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। बागी गुट ने अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, हालांकि उन्होंने ममता बनर्जी से मार्गदर्शक बने रहने का अनुरोध किया है।
पार्टी के आधिकारिक व्हिप और ‘असली TMC’ के कानूनी अधिकारों को लेकर खींचतान अब सुप्रीम कोर्ट और विधानसभा अध्यक्ष के स्तर पर उलझ चुकी है। एक तरफ राज्य की सत्ता छिन जाना और दूसरी तरफ अपनी ही बनाई पार्टी में बगावत होना, ममता बनर्जी के नेतृत्व के लिए एक अभूतपूर्व चुनौती बन गया है।
