इस्तीफा लेने से नहीं गिरेगी सरकार… छात्र आंदोलन पर अन्ना हजारे का PM मोदी को पत्र, हिंसा पर जताया गहरा दुख| Navbharat Live
Updated On: Jul 22, 2026 | 08:46 PM IST
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सार
Anna Hazare On Delhi Violence: अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर दिल्ली में हुई हिंसा पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने सरकार से सकारात्मक संवाद के जरिए मुद्दा सुलझाने की अपील की है।

नरेंद्र मोदी और अन्ना हजारे (सोर्स: सोशल मीडिया)
विस्तार
Anna Hazare Writes Letter To PM Modi: भ्रष्टाचार के खिलाफ देश में बड़ी क्रांति लाने वाले दिग्गज सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने एक बार फिर दिल्ली की सत्ता को आईना दिखाया है। देश के विभिन्न हिस्सों में परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक को लेकर चल रहे छात्र आंदोलनों के बीच, अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक भावुक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने न केवल छात्रों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है, बल्कि सरकार को जवाबदेही और लोकतंत्र का पाठ भी पढ़ाया है।
अन्ना हजारे ने अपने पत्र में एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही है। उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि प्रशासनिक विफलताओं के कारण किसी मंत्री से इस्तीफा मांगना सरकार को कमजोर नहीं करता। इसके विपरीत, ऐसा कदम यह दर्शाता है कि सरकार अपने विभागों के प्रदर्शन के प्रति गंभीर है और मंत्रियों की जवाबदेही तय करती है। अन्ना के अनुसार, यदि कोई अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहता है और उसे पद छोड़ना पड़ता है, तो इससे जनता के बीच एक स्पष्ट संदेश जाता है कि सरकार प्रभावी और उत्तरदायी है।
छात्रों के साथ हिंसा पर गहरी पीड़ा
दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई और हिंसा की खबरों पर अन्ना हजारे ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने इन घटनाओं को बेहद व्यथित करने वाला करार दिया। अन्ना ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में किसी भी मतभेद को सुलझाने का सबसे अच्छा तरीका टकराव नहीं, बल्कि संवाद है। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि वे प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ बातचीत का रास्ता खोलें।
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सिर्फ कानून-व्यवस्था नहीं, यह जनता की पीड़ा है
अन्ना हजारे ने पत्र में याद दिलाया कि देशभर के करोड़ों युवा आज पेपर लीक, भर्ती में देरी और बेरोजगारी जैसी समस्याओं को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों की इन चिंताओं को केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं समझना चाहिए, बल्कि इसे वास्तविक जन शिकायतों के रूप में स्वीकार कर सार्थक प्रतिक्रिया देनी चाहिए।
NEET धांधली और जवाबदेही का सवाल
विशेष रूप से NEET परीक्षा का उल्लेख करते हुए अन्ना हजारे ने कहा कि 2024 में प्रश्नपत्र लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। लगभग 22 लाख छात्रों का भविष्य दांव पर है। उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए उन छात्रों के प्रति संवेदना जताई जिन्होंने परीक्षा संबंधी समस्याओं और निराशा के कारण आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठा लिया। अन्ना ने सवाल उठाया कि अक्सर घोटालों में केवल निचले स्तर के अधिकारियों पर गाज गिरती है, जबकि उच्च पदों पर बैठे निर्णयकर्ता बच निकलते हैं। उन्होंने मांग की कि अंतिम जिम्मेदारी शासन और प्रशासन के शीर्ष पदों पर बैठे लोगों की होनी चाहिए।
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गांधीवादी मूल्यों और संवाद की अपील
अन्ना हजारे ने इस बात पर भी चिंता जताई कि पिछले तीन सप्ताह से अधिक समय से छात्र और अभिभावक शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई गंभीर प्रयास नहीं दिख रहा है। उन्होंने एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को बिना किसी बातचीत के प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने पर भी असंतोष व्यक्त किया।
अपने पत्र के अंत में, अन्ना ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे प्रदर्शनकारियों को राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में नहीं, बल्कि चिंतित नागरिक के रूप में देखें। उन्होंने सरकार से अपील की कि वे गांधीवादी सिद्धांतों और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप धैर्यपूर्वक उनकी बात सुनें, विश्वास कायम करें और रचनात्मक संवाद के माध्यम से इस विवाद को सुलझाएं। अब देखना यह है कि अन्ना की इस सलाह पर केंद्र सरकार क्या रुख अपनाती है।
