अगस्त में प्रदेश में 85,755 करोड़ के 61.22 करोड़ ट्रांजेक्शन: प्रदेश के 60 प्रतिशत यूपीआई लेन-देन सिर्फ 10 जिलों में, जयपुर सबसे आगे, उदयपुर तीसरा - Udaipur News

यूपीआई से दो हजार से ज्यादा के भुगतान पर टैक्स लगाने की चर्चा इन दिनों तेज है। व्यापारियों में इसे लेकर नाराजगी भी है। इसी बीच, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने अगस्त 2026 के आंकड़ों ने प्रदेश में यूपीआई के इस्तेमाल की तस्वीर सामने रख

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इधर, जयपुर में सबसे ज्यादा 16.97 करोड़ के यूपीआई लेन-देन हुए। जबकि, उदयपुर 2.80 करोड़ लेन-देन के साथ तीसरे नंबर पर रहा। खास बात यह है कि प्रदेश के 61.22 करोड़ ट्रांजेक्शन में से 60.42% सिर्फ 10 जिलों में हुए। इनमें जयपुर, उदयपुर के साथ जोधपुर, कोटा, अजमेर, सीकर, भीलवाड़ा, बीकानेर, अलवर और श्रीगंगानगर शामिल है। इनमें यूपीआई से 51,293.19 करोड़ का भुगतान हुआ। यह प्रदेश की कुल राशि का 59.81% है।

सलूंबर सबसे पीछे : ट्रांजेक्शन में सलूंबर सबसे पीछे रहा। अगस्त में यहां सिर्फ 267.89 करोड़ रु. के 19.10 लाख लेन-देन हुए।

5 बड़े जिलों में ही 45% से ज्यादा यूपीआई ट्रांजेक्शन

जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा और अजमेर में ही 27.82 करोड़ यूपीआई ट्रांजेक्शन हो गए। यह प्रदेश के कुल 61.22 करोड़ लेन-देन का 45.44% है। पांचों जिलों में यूपीआई से 37,592.43 करोड़ का भुगतान हुआ। यह प्रदेश की कुल 85,755.68 करोड़ रुपए का 43.84 प्रतिशत तक है।

जयपुर में अगस्त में 16.97 करोड़ ट्रांजेक्शन हुए

जयपुर डिजिटल भुगतान में प्रदेश में सबसे आगे है। अगस्त में यहां 22,328.39 करोड़ रु. के 16.97 करोड़ ट्रांजेक्शन हुए। यह कुल यूपीआई लेन-देन का 27.72% है। यानी प्रदेश का हर चौथे लेन-देन का संबंध जयपुर से है। दूसरे नंबर पर जोधपुर है। यहां 5,120.97 करोड़ के 3.45 करोड़ लेन-देन हुए। इसके बाद उदयपुर, कोटा करोड़ और अजमेर टॉप-5 में है।

हर 22वां ट्रांजेक्शन उदयपुर से

अगस्त में उदयपुर में 3,705.44 करोड़ रुपए के 2.80 करोड़ यूपीआई लेन-देन हुए। प्रदेश के कुल 61.22 करोड़ लेन-देन में उदयपुर की हिस्सेदारी करीब 4.57% है। यानी राजस्थान में होने वाले हर 22वें यूपीआई लेन-देन में उदयपुर शामिल रहा। राशि के लिहाज से भी उदयपुर की हिस्सेदारी 4.32% है।

क्या है 2 हजार से ज्यादा के भुगतान पर एमडीआर?

2 हजार से ज्यादा व्यापारी भुगतान पर 0.4% एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू है। यह सरकार का टैक्स नहीं है। यह व्यापारी से जुड़ा भुगतान शुल्क है। 2 हजार तक के यूपीआई भुगतान इस व्यवस्था से प्रभावित नहीं होते। सरकार के अनुसार करीब 96% पी2एम यानी ग्राहक से व्यापारी को होने वाले यूपीआई लेन-देन इससे अप्रभावित रहते हैं।

यूपीआई के बढ़ते इस्तेमाल से व्यापारियों को केशलैस कारोबार, भुगतान का रिकॉर्ड और कैश हैंडलिंग से राहत जैसे फायदे मिलते हैं। लेकिन, 2 हजार से अधिक के पात्र P2M भुगतान पर एमडीआर लागू होने की स्थिति में बड़े डिजिटल भुगतान करने वाले कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है।