सुप्रीम आदेश बेअसर! नदी-बांध-खेत बर्बाद कर रहीं फैक्ट्रियां: सांगानेर से 90 किलोमीटर दूर मोरेल डैम तक पहुंच रहा अवैध 2200 फैक्ट्रियों का जहरीला पानी - Jaipur News

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सुप्रीम आदेश बेअसर! नदी-बांध-खेत बर्बाद कर रहीं फैक्ट्रियां:सांगानेर से 90 किलोमीटर दूर मोरेल डैम तक पहुंच रहा अवैध 2200 फैक्ट्रियों का जहरीला पानी

जयपुर41 मिनट पहलेलेखक: संदीप शर्मा

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राजधानी जयपुर के सांगानेर और शिकारपुरा औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी 90 किमी. दूर तक मोरल डैम तक पहुंच रहा है। और इस बीच पूरी नदी काली हो गई है। सारे खेत खराब हो चुके हैं। डैम जहरीले पानी का भंडार बन चुका है। जानवर भी इस पानी को मुंह नहीं लगाते। किसान इस पानी को खेतों में जाने से रोकने की कोशिशों में लगे हैं।

भूजल और जमीन काले पड़ चुके हैं। इससे लोगों को चर्मरोग सहित अन्य बीमारियां हो रही हैं। ये सब तब, जबकि सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट आदेश दे चुका है कि जलस्रोतों को प्रदूषित करने वाली औद्योगिक इकाइयों को तुरंत बंद किया जाए... लेकिन, करीब 2200 अ‌वैध फैक्ट्रियों को पानी नदी-बांध में बेखौफ छोड़ा जा राह है। भास्कर नदी से बांधों तक पहुंचा…

सांगानेर की फैक्ट्रियों का गंदा पानी द्रव्यवती नदी, गूलर का बांध, चंदलाई बांध से मोरल बांध तक जा रहा है

ऐसी नौबत इसलिए आई; मुहाना मंडी के पास कॉमन इफ्यूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट लगाया है, लेकिन यह 12 करोड़ लीटर की जगह सिर्फ 2 करोड़ लीटर पानी ट्रीट कर रहा है। यानी 10 करोड़ लीटर केमिकलयुक्त पानी सीधे नदी में जा रहा है। एसईटीपी से 800 फैक्ट्री ही जुड़ी हैं, जबकि 2200 फैक्ट्रियों का पानी छोड़ा जा रहा है। सभी फैक्ट्रियों को खुद के स्तर पर पानी को ट्रीट करने के लिए जेड एल डी (जीरो लिक्विड डिस्चार्च प्लांट) लगाना होगा, तभी संभव है कि फैक्ट्री के बाहर अपशिष्ट पानी बाहर नहीं जाएगा।

किसान रामकरण और निशांत सहित गांव वाले बताते हैं - पहले इस बांध से खेती, पशुओं का पानी और साग-सब्जी हो जाती थी। अब इसे जानवर भी नहीं पीते। जिस जमीन में तीन साल से यह पानी गया, वह बंजर हो चुकी है। आसपास के खेतों में भी गेहूं, बाजरा की पैदावार 70% तक गिर गई।

सुप्रीम आदेश का असर कब?

सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2026 में जोजरी, बांडी और लूनी नदी में प्रदूषण पर फैक्टियों को बंद करने के आदेश दिए। इसके बाद हुए सर्वे में 2200 फैक्ट्रियां अवैध चल रही हैं। सांगानेर-शिकारपुरा में टेक्सटाइल डाइंग और प्रोसेसिंग का हब है। रोजाना करोड़ों लीटर दूषित पानी सीधे नदी-नालों में छोड़ा जा रहा है। पानी के संपर्क में आते ही व्यक्ति की त्वचा सफेद पड़ जाती है, खुजली होती है। हवा में दुर्गंध है। सिस्टम और सरकार को अब इन अ‌वैध इकाइयों को बंद करने में जरा भी देरी नहीं करनी चाहिए।

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