समझौता नहीं, कोर्ट में लड़ाई चाहते हैं 99 प्रतिशत इंडियन... सिर्फ 1 फीसदी को मध्यस्थता पर भरोसा

समझौता नहीं, कोर्ट में लड़ाई चाहते हैं 99 प्रतिशत इंडियन... सिर्फ 1 फीसदी को मध्यस्थता पर भरोसा

मध्यस्थता में कितने मामले, कितनों में समझौता?Image Credit source: getty image

अदालतों में मुकदमों की लंबी कतार के बीच विवादों को बातचीत से सुलझाने के लिए मध्यस्थता यानी Mediation को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है. सरकार की ओर से राज्यसभा में दिए गए आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले कुछ सालों में व्यावसायिक विवादों को अदालत में ले जाने से पहले मध्यस्थता का रास्ता अपनाने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है. जुलाई 2018 से सितंबर 2025 तक प्री-इंस्टीट्यूशन मेडिएशन एंड सेटलमेंट (Pre-Institution Mediation and Settlement) यानी PIMS के तहत 2.76 लाख से ज्यादा आवेदन मध्यस्थता के लिए आए. लेकिन इनमें से समझौते तक पहुंचने वाले मामलों की संख्या काफी कम रही.

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में करीब 4,854 मामलों में पक्षकार समझौते तक पहुंचे. यानी मध्यस्थता के लिए बड़ी संख्या में मामले आए, लेकिन सभी विवाद बातचीत के जरिए खत्म नहीं हो सके. सरकार ने यह भी बताया कि ADR की पूरी तस्वीर इससे बड़ी हो सकती है, क्योंकि निजी मध्यस्थों और अलग-अलग मध्यस्थता संस्थानों के जरिए होने वाली प्रक्रियाओं का पूरा औपचारिक डेटा सरकार के पास उपलब्ध नहीं है.

क्या दिखाता है पूरा आंकड़ा?

राज्यसभा में 29 जनवरी 2026 को कानून और न्याय मंत्रालय से ADR के जरिए पिछले पांच सालों में सुलझाए गए मामलों की जानकारी मांगी गई थी. जवाब में सरकार ने कमर्शियल कोर्ट एक्ट के तहत होने वाली प्री-इंस्टीट्यूशन मेडिएशन का आंकड़ा शेयर किया. इसमें सबसे खास बात यह है कि हर साल मध्यस्थता के लिए आने वाले आवेदनों की संख्या बढ़ी है, लेकिन समझौते तक पहुंचने वाले मामलों का अनुपात अभी भी काफी कम है.

  • जुलाई 2018 से मार्च 2019: 3,680 आवेदन आए, 25 मामलों में समझौता हुआ.
  • 2019-20: 18,080 आवेदन आए, 167 मामलों में समझौता हुआ.
  • 2020-21: 18,364 आवेदन आए, 186 मामलों में समझौता हुआ.
  • 2021-22: 32,335 आवेदन आए, 368 मामलों में समझौता हुआ.
  • 2022-23: 46,412 आवेदन आए, 1,449 मामलों में समझौता हुआ.
  • 2023-24: 51,019 आवेदन आए, 1,139 मामलों में समझौता हुआ.
  • 2024-25: 59,568 आवेदन आए, 877 मामलों में समझौता हुआ.
  • 2025-26 (सितंबर 2025 तक): 47,218 आवेदन आए, 643 मामलों में समझौता हुआ.

Mediation Cases And Settlements In India

मध्यस्थता के लिए कितने मामले गए (Getty Image)

जुलाई 2018 से मार्च 2019 के बीच 3,680 आवेदन आए और 25 में समझौता हुआ. 2019-20 में 18,080 आवेदन में 167 समझौते हुए. 2020-21 में 18,364 आवेदन आए और 186 मामलों में समझौता हुआ. इसके बाद 2021-22 में 32,335 आवेदन आए और 368 मामलों में समझौता हुआ. 2022-23 में आवेदन बढ़कर 46,412 हुए और समझौते 1,449 तक पहुंचे. 2023-24 में 51,019 आवेदन में 1,139 समझौते हुए, जबकि 2024-25 में सबसे ज्यादा 59,568 आवेदन आए, लेकिन समझौता 877 मामलों में ही हो पाया. 2025-26 में सितंबर 2025 तक 47,218 आवेदन आए और 643 मामलों में समझौता हुआ.

सबसे ज्यादा आवेदन 2024-25 में आए

सरकारी आंकड़ों में 2024-25 का साल खास नजर आता है. इस दौरान 59,568 आवेदन मध्यस्थता के लिए आए, जो दिए गए सालों में सबसे ज्यादा हैं. हालांकि समझौते की संख्या 877 रही. इससे साफ है कि मध्यस्थता के लिए आने वाले मामलों की संख्या बढ़ने के बावजूद हर विवाद बातचीत के जरिए खत्म नहीं हो रहा है. इसके अगले साल 2025-26 में सितंबर 2025 तक ही 47,218 आवेदन आ चुके थे. इस अवधि में 643 मामलों में समझौता हुआ.

लोक अदालतों में करोड़ों मामलों का निपटारा

विवादों को अदालत की लंबी प्रक्रिया से बचाने में लोक अदालतों की भी बड़ी भूमिका है. लोक अदालतों में अदालत में लंबित मामलों के अलावा ऐसे विवाद भी लाए जाते हैं, जिनमें अभी मुकदमा शुरू नहीं हुआ है. सरकार के अनुसार, नेशनल लोक अदालतों में 2021 में कुल 1.27 करोड़ मामलों का निपटारा हुआ था.

Mediation Cases Settlement India

मध्यस्थता के कितनों में समझौता हुआ (Getty Image)

यह संख्या 2022 में बढ़कर 4.19 करोड़, 2023 में 8.53 करोड़ और 2024 में 10.45 करोड़ हो गई. 2025 में नेशनल लोक अदालतों में 14.84 करोड़ मामलों का निपटारा दर्ज किया गया. स्टेट लोक अदालतों में भी लाखों मामलों का निपटारा हुआ. 2021-22 में 5.32 लाख मामले निपटाए गए थे, जो 2024-25 में बढ़कर 13.44 लाख हो गए. इसके अलावा स्थायी लोक अदालतों में 2024-25 के दौरान 2.37 लाख मामलों का निपटारा हुआ.

कई मामलों में मध्यस्थता शुरू ही नहीं हुई

यहां एक और महत्वपूर्ण आंकड़ा सामने आता है. सरकार ने बताया कि बड़ी संख्या में ऐसे आवेदन भी रहे, जिनमें मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो पाई. इन्हें नॉन-स्टार्टर मामलों के रूप में दर्ज किया गया है. 2024-25 में आए 59,568 आवेदनों में से 52,730 मामलों में मध्यस्थता की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी. 2023-24 में 51,019 आवेदनों में से 47,185 मामले नॉन-स्टार्टर रहे. 2022-23 में 46,412 आवेदनों में 41,898 मामले इसी श्रेणी में थे.

क्या मध्यस्थता से सभी विवाद सुलझ रहे हैं?

सरकार के आंकड़ों से यह दावा नहीं किया जा सकता कि ADR के तहत देश के सभी विवादों का यही परिणाम है. इसकी वजह यह है कि सरकार ने खुद स्पष्ट किया है कि ADR पार्टी की सहमति और इच्छा पर आधारित प्रक्रिया है. कई पक्षकार निजी मध्यस्थों या अलग-अलग मध्यस्थता संस्थानों के पास भी जाते हैं. ऐसे मामलों का कोई एकीकृत सरकारी डेटा उपलब्ध नहीं है. इसलिए राज्यसभा में दिए गए आंकड़े मुख्य रूप से कमर्शियल कोर्ट एक्ट के तहत होने वाली प्री-इंस्टीट्यूशन मेडिएशन की तस्वीर दिखाते हैं. इसे पूरे देश में होने वाली हर तरह की मध्यस्थता का आंकड़ा नहीं माना जा सकता.

अंकिता

अंकिता

शिव की नगरी काशी से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अंकिता पाण्डेय ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से पत्रकारिता में अपनी मास्टर्स की डिग्री पूरी की है.  पत्रकारिता में आने के लिए उन्होंने बनारस के लोकल न्यूज पेपर "काशीवार्ता" से अपनी शुरुआत की, बाद में दिल्ली जैसे महानगरी का रुख करते हुए उन्होंने TV9 भारतवर्ष में अक्टूबर साल 2023 से जुड़ी. आज वह इस ऑर्गनाइजेशन में बतौर सब-एडिटर काम कर रही हैं. क्राइम, एंटरटेनमेंट और अन्य सभी को न्यूज के साथ विजुअल तरीके से पेश करने में रुचि है. पत्रकारिता के अलावा कविताएं लिखना, फोटोग्राफी करना और म्यूजिक का भी शौक रखती हैं.

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