राष्ट्रपति मुर्मू के पूर्व ADC ऋषभ सिंह संब्याल ने किया कौन सा सबसे बड़ा त्याग, कर दिया खुलासा

Sep 11, 2026 04:49 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व एडीसी रहे ऋषभ सिंह संब्याल ने त्याग के बारे में बताते हुए कहा कि मैं शादीशुदा नहीं हूं। राष्ट्रपति का एडीसी बनने के लिए क्लॉज है कि वे शादी नहीं कर सकते थे।

Rishabh Singh Sambyal Revealed the Biggest Sacrifice he made during beaing President Murmu ADC

ऋषभ सिंह संब्याल ने त्याग के बारे में बताया कि राष्ट्रपति का एडीसी बनने के लिए क्लॉज है कि वे शादी नहीं कर सकते थे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व सहयोगी और ADC रहे ऋषभ सिंह संब्याल ने आर्मी में 12 साल सेवा देने के बाद समय से पहले रिटायरमेंट लेकर सभी को चौंका दिया। उन्हें सोशल मीडिया पर नेशनल क्रश भी कहा जाने लगा था। रिटायरमेंट के कुछ दिनों बाद अब उन्होंने एक पॉडकास्ट इंटरव्यू किया है। राज शमानी के साथ किए गए इस पॉडकास्ट इंटरव्यू में ऋषभ सिंह संब्याल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के एडीसी रहने के दौरान के अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने खुलासा कि उन्होंने इस भूमिका को निभाते हुए सबसे बड़ा कौन सा त्याग किया। इस इंटरव्यू में उन्होंने भारत के राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए होने वाली ट्रेनिंग के बारे में भी विस्तार से बताया है।

अपने त्याग के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “मैं शादीशुदा नहीं हूं। राष्ट्रपति का एडीसी बनने के लिए क्लॉज है कि वे शादी नहीं कर सकते। मुझे परिवार से दूर रहना पड़ता है और मुझे लगता है कि यह सबसे बड़ा त्याग है। इसलिए आपके पास बाहर की जिंदगी नहीं है। यही कीमत मैंने चुकाई है। जब मैं प्रेसिडेंट के साथ काम कर रहा था, तो मैं एक नॉर्मल इंसान की तरह बाहर जाकर जिंदगी का मजा नहीं ले सकता था।”

उन्होंने आगे बताया, “मुझे कभी नहीं पता था कि ADC नाम की कोई चीज होती है। मैं कभी यहां नहीं आना चाहता था। मैं इंडिया में कुछ अलग-अलग देशों की टुकड़ियों के साथ एक एक्सरसाइज में था, और जब मेरे सीओ ने फोन करके कहा कि आपको शॉर्टलिस्ट किया गया है, आप क्या करना चाहते हैं?' तो मेरा पहला जवाब यह नहीं था, हां मैं जाना चाहता हूं। मेरा पहला जवाब यह था कि मैं जाना चाहता हूं लेकिन यहां नहीं।”

इसके बाद, ऋषभ सिंह ने अन्य लोगों से बात की और पूछा कि ज्वाइन करना चाहिए या नहीं। लोगों ने उन्हें बताया कि यह सीखने के लिए अच्छा है। एक अच्छा अनुभव हासिल होगा। इसके बाद, उन्होंने अपने सीओ से बात की और कहा कि वह इसे आजमाना चाहता है। लेकिन, उसके CO ने कहा कि वह सिर्फ इसे आजमा नहीं सकते। उन्हें या तो जाना होगा या नहीं। उन्होंने कहा कि अगर तुम फेल हो गए, तो तुम्हारे लिए मुश्किल होगी। मैं तुम्हारे साथ बहुत सख्त हो जाऊंगा। इसके बाद, ऋषभ ने अपना सब कुछ झोंक दिया।

क्या कभी अकेलापन महसूस हुआ?

जब इस बारे में उनसे सवाल किया गया कि क्या उन्हें कभी इस रोल में अकेलापन महसूस हुआ तो उन्होंने कहा कि कभी-कभी अकेलापन लगता है, लेकिन उन्हें उस अकेलेपन में मजा आता था। उन्होंने कहा, ''इससे मुझे अपने बारे में अपने सोचने के तरीके के बारे में, अपनी अच्छी और बुरी चीजों के बारे में फिर से सोचने के लिए जगह और समय मिलता है। तो हां मुझे अकेलापन लगता है, लेकिन मैं उस अकेलेपन को किसी पॉजिटिव चीज में बदल देता हूं।'' वह आगे कहते हैं, ''मुझे हर दिन कम से कम एक घंटे के लिए अकेले रहना पसंद है हर दिन सबसे दूर। कोई भी मेरे आस-पास नहीं होना चाहिए। मुझे वह एक घंटे का स्पेस चाहिए। मैं उसमें कुछ भी कर सकता हूं। शायद कुछ न करूं, बस बैठ जाऊं, लेकिन मुझे अकेले रहने की जरूरत है क्योंकि यह मुझे वह अकेलापन देता है, वह खालीपन मुझे खुद को जांचने की जगह देता है।''

लेखक के बारे में

Madan Tiwari

लखनऊ के रहने वाले मदन तिवारी वरिष्ठ पत्रकार हैं और मीडिया में एक दशक से ज्यादा का अनुभव है।
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वर्तमान में मदन हिन्दुस्तान अखबार की न्यूज वेबसाइट लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स डिजिटल) में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की पढ़ाई की। कक्षा 12वीं के बाद से ही दैनिक जागरण, अमर उजाला, जनसत्ता समेत तमाम अखबारों में संपादकीय पृष्ठ पर लिखना शुरू किया। महज दो सालों में विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रियों अखबारों में दो सौ से अधिक आलेख प्रकाशित हुए। ग्रेजुएशन करते समय ही मीडिया में नौकरी की शुरुआत की। लाइव हिन्दुस्तान में अभी दूसरी पारी है और दोनों पारियों को मिलाकर यहां आठ साल से ज्यादा हो चुके हैं। कुल एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। मदन आजतक जैसे अन्य संस्थानों में भी काम कर चुके हैं।

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