सफाई पर बैठक के बाद भिड़े हेल्थ अफसर: AHO बोले- गलत तो मैं मंत्री की नहीं सुनता - Bhopal News

भोपाल37 मिनट पहले

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नगर निगम मुख्यालय के गेट पर शनिवार को स्वास्थ्य विभाग के दो अफसरों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। सफाई व्यवस्था को लेकर अपर आयुक्त अमन मिश्रा की बैठक के बाद बाहर निकल रहे हेल्थ ऑफिसर (एचओ) सुमनधर शर्मा और असिस्टेंट हेल्थ ऑफिसर (एएचओ) बलवीर मलिक के बीच कहासुनी हुई। वायरल वीडियो में मलिक जूते की ओर इशारा करते नजर आ रहे हैं।

नवागत अपर आयुक्त अमन मिश्रा को स्वास्थ्य विभाग का प्रभार मिला है। परिचय के लिए रखी बैठक दोपहर करीब ढाई बजे खत्म हुई। बाहर निकलते समय शर्मा अपने सहयोगियों से कह रहे थे कि नए अधिकारी हैं, अपने को ज्यादा बात नहीं करनी चाहिए।

धीरे-धीरे वे कार्यप्रणाली समझ लेंगे, तब अपनी बात करेंगे। पीछे से आ रहे मलिक को लगा कि शर्मा उनके बारे में बात कर रहे हैं और उन्होंने शर्मा को भला-बुरा कहना शुरू कर दिया। शर्मा कहते रहे कि उन्हें गलतफहमी हुई है, लेकिन मलिक नहीं माने।

बैठक में स्पॉट फाइन और कचरा वाहनों के फेरे को लेकर मिश्रा ने मलिक से जवाब-तलब कर नाराजगी जताई थी। नोकझोंक के दौरान मलिक ने शर्मा से कहा, ‘मेरे ही पीछे पड़े हो, मुझे सस्पेंड करा दोगे।’ मौके पर मौजूद अधिकारियों-कर्मचारियों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया।

वीडियो में मलिक जूते की तरफ हाथ ले जाते भी दिखे। इस पर उन्होंने बताया कि शुगर की बीमारी के कारण वे पीछे से खुला जूता पहनते हैं और चलते समय जूता फिसलने पर उसे ठीक कर रहे थे। अपर आयुक्त मिश्रा को विवाद की जानकारी नहीं थी।

वायरल वीडियो में आमने-सामने दोनों अफसर

शर्मा ने मुझ पर न्यूसेंस पैदा करने की टिप्पणी की। आए दिन बदतमीजी करके परेशान करते हैं। जोन के कर्मचारियों और वेतन से जुड़ी फाइलें तक रोकी जाती हैं। गलत बात होने पर मैं मंत्री की भी नहीं सुनता और अपना इस्तीफा लेकर चलता हूं। -बलवीर मलिक, एएचओ

मैंने किसी पर कोई कमेंट नहीं किया, न किसी से बदतमीजी की और न कोई फाइल रोकी। फाइलों का अनुमोदन आयुक्त और अपर आयुक्त स्तर पर होता है। बैठक खत्म होते ही मैं अपनी गाड़ी से रवाना हो गया था। कोई विवाद नहीं हुआ। -सुमनधर शर्मा, एचओ

दरोगा फाइन वसूलते हैं, पर निगम के खाते में जमा नहीं कराते

निगम के दरोगा गंदगी करने वालों के खिलाफ रोज फाइन करते हैं, लेकिन इसमें से बड़ी रकम निगम के खाते में जमा ही नहीं होती। इसमें से गंभीर बात यह है कि कितने चालान कटे इसका हिसाब दरोगा के अलावा किसी के पास नहीं होता, इसलिए यह भी पता नहीं लगता कि कितनी राशि बकाया है।

अपर आयुक्त अमन मिश्रा की बैठक में यह बात सामने आई। इसके पहले आयुक्त हरेंद्र नारायण के कार्यकाल में ऐसा मामला सामने आ चुका था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अपर आयुक्त के सामने कई दरोगाओं ने स्वीकार किया है कि उनके पास 1 लाख और उससे अधिक राशि बकाया है।

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