'तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय मूल्य जरूरी': अमेरिका से हृदय रोग विशेषज्ञ पहुंचे, बोले- AI चिकित्सा में मददगार, संवेदनशीलता का स्थान नहीं ले सकती - Gorakhpur News

महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (MGUG) के 5वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित व्याख्यानमाला में कैलिफोर्निया (अमेरिका) से आए हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय तिवारी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से जीवन के हर क्षेत्र का महत्वपूर्ण ह

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चिकित्सा क्षेत्र में भी इसका प्रभाव बढ़ेगा। रोगों की पहचान, उपचार की योजना, चिकित्सा अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता व गति बढ़ाने में AI की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

उन्होंने कहा कि तकनीक की अपनी सीमाएं हैं। करुणा, सहानुभूति, मानवीय स्पर्श, संवेदनशीलता, नेतृत्व और सेवा भाव का स्थान AI नहीं ले सकती। विद्यार्थियों को तकनीकी दक्षता हासिल करने के साथ मानवीय मूल्यों को भी मजबूत करना चाहिए।

मरीज को समझना भी डॉक्टर की जिम्मेदारी

डॉ. तिवारी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण स्वयं वह व्यक्ति होता है। उन्होंने भावी चिकित्सकों को आत्मबोध के साथ मानवीय संवेदनशीलता को चिकित्सा का आधार बनाने की प्रेरणा दी।

उन्होंने कहा कि सफल डॉक्टर बनने के लिए केवल तकनीकी और चिकित्सकीय ज्ञान पर्याप्त नहीं है। मरीज को समझना, उसकी भावनाओं का सम्मान करना और संवेदनशीलता के साथ उपचार करना भी उतना ही जरूरी है।

मेडिकल एथिक्स के चार सिद्धांत बताए

इसी क्रम में गोरखपुर के वरिष्ठ चिकित्सक एवं लंदन में कार्य करने का व्यापक अनुभव रखने वाले डॉ. विवेक चंद्र ने ‘मेडिकल एथिक्स एंड प्रोफेशनलिज्म’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने चिकित्सा नैतिकता के चार प्रमुख सिद्धांतों, रोगी की स्वायत्तता, हितकारिता, अहानिकरता और न्याय की विस्तार से चर्चा की।

डॉ. चंद्र ने कहा कि चिकित्सक को मरीज के निर्णय लेने के अधिकार का सम्मान करते हुए उसके सर्वोत्तम हित में कार्य करना चाहिए। उत्कृष्ट चिकित्सक बनने के लिए चिकित्सा ज्ञान और कौशल के साथ ईमानदारी, संवेदनशीलता, सम्मान, नैतिकता और पेशेवर जिम्मेदारी भी जरूरी है।

संवेदनशील और सेवाभावी डॉक्टर तैयार करना लक्ष्य

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए MGUG के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. भूपेश गोयल ने कहा कि विद्यार्थी ऐसे संस्थान में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जहां आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ पारंपरिक ज्ञान, संस्कार और मानवीय मूल्यों को समान महत्व दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा का उद्देश्य केवल कुशल चिकित्सक तैयार करना नहीं, बल्कि संवेदनशील, नैतिक, जिम्मेदार और सेवाभावी चिकित्सकों का निर्माण करना भी है। कार्यक्रम का संचालन श्री गोरक्षनाथ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के उप-प्राचार्य डॉ. राजेश ने किया।