AI से वैज्ञानिक शोध को जनता तक पहुंचाने की भारत की नई पहल

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विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, CSIR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस कम्युनिकेशन एंड पॉलिसी रिसर्च ने SARAL AI का इस्तेमाल कर वैज्ञानिक शोध को आसान बनाकर जनता तक पहुंचाने की दिशा में एक नया कदम उठाया है।

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विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, CSIR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस कम्युनिकेशन एंड पॉलिसी रिसर्च (CSIR-NIScPR) ने SARAL AI का इस्तेमाल कर वैज्ञानिक शोध को आसान बनाकर जनता तक पहुंचाने की दिशा में एक नया कदम उठाया है।इस पहल का उद्देश्य वैज्ञानिक शोध और आम लोगों के बीच की दूरी को कम करना है।ब्रिक्स के नई दिल्ली घोषणापत्र में भी ब्रिक्स देशों ने AI तक पहुंच बढ़ाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पर जोर देने के साथ-साथ AI को सुरक्षित, समावेशी और विश्वसनीय बनाने की बात कही। वहीं, चीन ने भी AI पर अधिक सहयोग की वकालत की, जिसमें ओपन-सोर्स तकनीक, बड़े भाषा मॉडल के विकास और AI संसाधनों तक व्यापक पहुंच शामिल है।भारत के लिए, SARAL AI सिर्फ तकनीक को आगे बढ़ाने की कोशिश नहीं है, बल्कि इसका मकसद रिसर्च और वैज्ञानिक जानकारी को आसान बनाकर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है। यह रिसर्च को सिर्फ अकादमिक पब्लिकेशन तक सीमित न रखकर आम लोगों तक पहुंचाने में मदद करेगा।

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ANRF के CEO डॉ. शिवकुमार कल्याणरमन ने संस्थानों को SARAL AI का इस्तेमाल "जटिल वैज्ञानिक शोध को आसान बनाने और उसे आम लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने" के लिए करने को प्रोत्साहित किया।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, CSIR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस कम्युनिकेशन एंड पॉलिसी रिसर्च (CSIR-NIScPR) ने SARAL AI का इस्तेमाल कर वैज्ञानिक शोध को आसान बनाकर जनता तक पहुंचाने की दिशा में एक नया कदम उठाया है।

SARAL AI एक AI की मदद से चलने वाला प्लेटफॉर्म है, जिसे अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) की मदद से विकसित किया जा रहा है। यह प्लेटफॉर्म मुश्किल शोध पत्रों और पेटेंट को आसान भाषा और फॉर्मेट में बदलने के लिए विकसित किया गया है, ताकि कई भारतीय भाषाओं में छोटे वीडियो, पॉडकास्ट और सोशल मीडिया कंटेंट तैयार किए जा सकें।

इस पहल का उद्देश्य वैज्ञानिक शोध और आम लोगों के बीच की दूरी को कम करना है।

ब्रिक्स के नई दिल्ली घोषणापत्र में भी ब्रिक्स देशों ने AI तक पहुंच बढ़ाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पर जोर देने के साथ-साथ AI को सुरक्षित, समावेशी और विश्वसनीय बनाने की बात कही। वहीं, चीन ने भी AI पर अधिक सहयोग की वकालत की, जिसमें ओपन-सोर्स तकनीक, बड़े भाषा मॉडल के विकास और AI संसाधनों तक व्यापक पहुंच शामिल है।

भारत के लिए, SARAL AI सिर्फ तकनीक को आगे बढ़ाने की कोशिश नहीं है, बल्कि इसका मकसद रिसर्च और वैज्ञानिक जानकारी को आसान बनाकर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है। यह रिसर्च को सिर्फ अकादमिक पब्लिकेशन तक सीमित न रखकर आम लोगों तक पहुंचाने में मदद करेगा।

Ashwini Vaishnaw - Sputnik भारत, 1920, 21.01.2026

21 जनवरी, 16:52