AI Science Race: चीन को पछाड़ने के लिए अमेरिका ने बनाया बड़ा प्लान, AI रिसर्च में होगा भारी निवेश| Navbharat Live
Updated On: Jul 25, 2026 | 10:26 AM IST
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सार
AI Science Race: अमेरिका और चीन के बीच AI की जंग तेज हो गई है। ट्रंप प्रशासन ने विज्ञान के नए सुनहरे दौर की घोषणा करते हुए AI रिसर्च के लिए 5 अरब डॉलर से अधिक के निवेश का वादा किया है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (सोर्स- AI जनरेटेड)
विस्तार
AI Science Race US And China Compete For AI Supremacy: अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी क्षेत्र में आगे निकलने की एक बहुत बड़ी होड़ मची हुई है। डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने इस सप्ताह अमेरिका के वैज्ञानिक रिसर्च सिस्टम में किए गए बड़े बदलावों का मजबूती से बचाव किया है। प्रशासन का तर्क है कि आने वाले दशकों में टेक्नोलॉजी के मामले में चीन को पीछे छोड़ने के लिए यह बहुत ज्यादा जरूरी है। इस नई और आधुनिक रणनीति का भारत जैसे अहम और बड़े सहयोगी देशों पर भी भविष्य में काफी सीधा असर पड़ेगा।
साइंस और टेक्नोलॉजी कमेटी के सामने व्हाइट हाउस के ओएसटीपी डायरेक्टर माइकल क्रैट्सियोस ने विज्ञान के नए सुनहरे दौर की रूपरेखा पेश की है। क्रैट्सियोस ने समिति को स्पष्ट किया है कि अमेरिका अब दुनिया में अकेला औद्योगिक और वैज्ञानिक सुपरपावर बिल्कुल नहीं रहा है। अमेरिका की आर्थिक लीडरशिप और तकनीक के मजबूत दबदबे को बनाए रखने के लिए नए फोकस और सुधारों की बहुत सख्त जरूरत है। फेडरल रिसर्च को ज्यादा लचीला बनाने और भविष्य की रिसर्च में AI को मुख्य केंद्र में रखने का एक नया प्रस्ताव दिया गया है।
जेनेसिस मिशन का बड़ा निवेश
इस पूरी नई योजना का सबसे अहम हिस्सा प्रशासन का जेनेसिस मिशन है जिसे बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण बताया गया है। क्रैटसियोस ने इसे विज्ञान के लिए अमेरिकी AI का सबसे बड़ा और अहम हिस्सा करार देते हुए इसकी काफी तारीफ की है। 15 से अधिक फेडरल एजेंसियों ने AI-आधारित वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए 5 अरब डॉलर से ज्यादा देने का पक्का वादा किया है। रिपब्लिकन सांसदों ने भी चीन के खिलाफ अपनी तकनीकी बढ़त बनाए रखने के लिए इस खास पहल को बहुत ही ज्यादा जरूरी बताया है।
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चीन से मिल रही बड़ी चुनौती
समिति के चेयरमैन ब्रायन बैबिन ने चेतावनी दी है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने AI तकनीक को अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकता बना लिया है। इसके साथ ही चीन इसी प्राथमिकता के आधार पर अपनी नई तकनीकों के विकास पर पानी की तरह भारी पैसा खर्च कर रहा है। बीजिंग अत्याधुनिक और आधुनिक रिसर्च हासिल करने के लिए अमेरिकी विश्वविद्यालयों और प्रयोगशालाओं को लगातार अपना सीधा निशाना बना रहा है। वाशिंगटन को क्वांटम कंप्यूटिंग और फ्यूजन एनर्जी जैसे अहम रणनीतिक सेक्टर में अपनी लीडरशिप हर हाल में बनाए रखने की सख्त जरूरत है।
डेमोक्रेट्स ने उठाए अहम सवाल
डेमोक्रेट्स ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाया है कि वह उसी साइंटिफिक इकोसिस्टम को कमजोर कर रहा है जिसे वह मजबूत बताता है। जो लोफ़ग्रेन ने तर्क दिया कि रिसर्च फंडिंग को लेकर अनिश्चितता से अमेरिकी रिसर्च बेस काफी ज्यादा कमजोर होता जा रहा है। चीन लगातार साइंस में अपना भारी निवेश बढ़ा रहा है और अमेरिका से बेहतरीन रिसर्चर्स को भर्ती करके खुद को बहुत मजबूत कर रहा है। क्रैट्सियोस ने राजनीतिक दखल से पूरी तरह इनकार करते हुए कहा कि फंडिंग वाली रिसर्च पारदर्शी और हमेशा भरोसेमंद होनी चाहिए।
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AI लीडरशिप का सुरक्षित भविष्य
सुनवाई के दौरान चीन की बढ़ती ताकत का कई बार जिक्र हुआ और रिपब्लिकन नेताओं ने अपनी बहुत गहरी चिंता जताई है। नेताओं ने एडवांस्ड रिसर्च और सेमीकंडक्टर की चीनी सप्लाई चेन पर अमेरिका की बढ़ती भारी निर्भरता को एक बहुत बड़ा खतरा बताया है।
क्रैट्सियोस ने आश्वासन दिया कि प्रशासन AI में अपनी मजबूत लीडरशिप का सुरक्षित भविष्य तय करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। इसके लिए घरेलू सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और अत्याधुनिक AI इंफ्रास्ट्रक्चर को भी बहुत तेजी के साथ बढ़ावा देने का काम किया जाएगा।
