Ankush Panghal: पिता की एक सलाह ने बदल दी जिंदगी, अब CWG 2026 में गोल्ड जीतने का मौका, कौन हैं अंकुश पंघाल

फाइनल में पंघाल (फोटो-पीटीआई)
वो कबड्डी का खिलाड़ी था, 3 साल तक वो कबड्डी में अपना दम दिखाता रहा लेकिन फिर एक दिन पिता ने कहा ये खेल छोड़ दो. इस खिलाड़ी का नाम है अंकुश पंघाल जिनके पिता की सलाह ने उनकी जिंदगी बदल दी. अंकुश के पिता ने उन्हें कबड्डी छोड़कर बॉक्सिंग करने की सलाह दी और इस खिलाड़ी ने ऐसा ही किया और आज देखिए ये खिलाड़ी कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतने से महज एक कदम दूर है. अंकुश पंघाल कॉमनवेल्थ गेम्स के सेमीफाइनल में शानदार जीत दर्ज कर फाइनल में पहुंच गए हैं. सेमीफाइनल में उन्होंने कनाडा के जोशुआ को 5-0 से हराया.
अंकुश पंघाल का सफर
अंकुश पंघाल हरियाणा के युवा भारतीय मुक्केबाज हैं जो सोनीपत के रहने वाले हैं. अंकुश का परिवार खेलों से जुड़ा है और उनके पिता भी कबड्डी के खिलाड़ी थे. अंकुश के पिता को लगा कि टीम गेम में व्यक्तिगत पहचान बनाना मुश्किल है इसलिए उन्होंने बेटे को बॉक्सिंग अपनाने की सलाह दी. अंकुश की तीन बड़ी बहने हैं. जिसमें से दो शूटर और एक बॉक्सर है. अंकुश अपने पिता को आइडल मानते हैं.
अंकुश का करियर
अंकुश की उम्र सिर्फ 19 साल है और इस खिलाड़ी ने 2023 में ASBC यूथ एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता था.
2025 में अंकुश वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल्स में सिल्वर जीते.
2026 में एलीट मेन्स नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में उनके नाम गोल्ड मेडल हुआ.
2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में अब वो फाइनल में पहुंच गए हैं. उनके पास गोल्ड जीतने का मौका है.
Ankush will go for gold. He beats Canada’s Joshua Ofori by a wide 5-0 unanimous decision in the semis of the men’s 80kg category at the Glasgow Commonwealth Games. pic.twitter.com/Co2sQZd2p6
— jonathan selvaraj (@jon_selvaraj) July 31, 2026
प्रीति पवार की भी जीत
अंकुश से पहले प्रीति पवार ने भी कमाल खेल दिखाते हुए फाइनल में जगह बनाई. भारतीय मुक्केबाज प्रीति पवार ने 54 किलो वर्ग के सेमीफाइनल में जीत हासिल कर फाइनल में एंट्री कर ली. अब उनका सिल्वर मेडल पक्का हो गया है. फाइनल मैच 1 अगस्त को कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो से होगा.

अनूप देव सिंह
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले का रहने वाला हूं. बचपन से ही खेलों से बेहद प्यार है. खासतौर पर क्रिकेट से जो इस देश का धर्म भी कहा जाता है. स्कूली पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय से हुई. साल 2006 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से हिंदी जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की और उसके बाद मीडिया के मैदान में उतर गए और खेल की खबरों को ही अपना कर्म भी बना लिया. करियर की पहली नौकरी नेटवर्क 18 ग्रुप में मिली. शुरुआत IBN7 न्यूज चैनल से हुई जहां मैंने पांच सालों की लंबी पारी खेली. इसके बाद इंडिया टीवी, न्यूज नेशन जैसे बड़े नेशनल चैनल्स के साथ काम किया. 2016 में डिजिटल मीडिया में कदम रखा और ये मौका जी नेटवर्क ने दिया. एक साल तक क्रिकेट कंट्री के साथ काम किया और फिर हुई नेटवर्क 18 में वापसी. न्यूज 18 हिंदी की वेबसाइट में 4 सालों तक स्पोर्ट्स की हर खबर पाठकों तक पहुंचाई. अब टीवी9 के साथ हूं. क्रिकेट ही नहीं खेल की हर खबर आपतक एक नए अंदाज और नए कलेवर में पहुंचाता हूं.
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