AQI 400 पार वाली दिल्ली ‘क्लीन एयर’ में श्रीनगर से आगे! आखिर इस रैंकिंग में ऐसा क्या मापा गया?
Sep 08, 2026 04:46 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

इस सर्वे में दिल्ली को 172 अंक मिले हैं, जबकि प्राकृतिक रूप से स्वच्छ हवा वाले श्रीनगर (26वां स्थान - 162.6 अंक) और बेंगलुरु (32वां स्थान - 152.6 अंक) इस रैंकिंग में दिल्ली से पीछे रह गए हैं।

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में दिल्ली को 172 अंक मिले हैं, जबकि प्राकृतिक रूप से स्वच्छ हवा वाले श्रीनगर को 162.6 अंक।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की तरफ से नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत जारी 'स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026' के नतीजों ने सभी को चौंका दिया है। जहरीले स्मॉग और सर्दियों में बदतर वायु गुणवत्ता (AQI) के लिए चर्चित दिल्ली ने 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले 48 शहरों की कैटेगरी में 21वां स्थान हासिल किया है।
दिल्ली को 172 अंक मिले हैं, जबकि प्राकृतिक रूप से स्वच्छ हवा वाले श्रीनगर (26वां स्थान - 162.6 अंक) और बेंगलुरु (32वां स्थान - 152.6 अंक) इस रैंकिंग में दिल्ली से पीछे रह गए हैं।
शुरुआती तौर पर यह रैंकिंग विरोधाभासी लगती है, लेकिन इसके पीछे की वजह इस सर्वे का एक विशेष पैमाना है।
सर्वे में ऐसा क्यों?
'स्वच्छ वायु सर्वेक्षण' किसी शहर की रोजाना सांस लेने योग्य हवा या केवल AQI (एयर क्वालिटी इंडेक्स) की रैंकिंग लिस्ट नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य यह आंकना है कि कोई शहर अपने यहां प्रदूषण फैलाने वाले सोर्स को नियंत्रित करने के लिए कितने ठोस कदम उठा रहा है और उन्हें लागू करने में कितना गंभीर है।
सड़कों की धूल नियंत्रण, ठोस कचरा प्रबंधन, गाड़ियों और फैक्ट्रियों से होने वाले उत्सर्जन पर रोक, निर्माण और तोड़फोड़ (C&D) कचरे का निपटान, बायोमास जलाने पर रोक और जन जागरूकता।
दिल्ली में सर्दियों के दौरान AQI अक्सर 400 या 450 के पार 'गंभीर' कैटेगरी में पहुंच जाता है और ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP Stage IV) लागू करना पड़ता है। लेकिन GRAP के कड़े नियमों, एंटी-स्मॉग गन, इलेक्ट्रॉनिक कचरा प्रबंधन और मैकेनाइज्ड स्वीपिंग जैसे प्रशासनिक तंत्र के कारण दिल्ली ने स्कोरिंग सिस्टम में बेहतर प्रदर्शन किया।
2025 के सर्वेक्षण में दिल्ली 32वें स्थान (157.3 अंक) पर थी, जो अब 11 पायदान सुधरकर 21वें स्थान पर आ गई है।
नंबर-1 शहर 'लखनऊ' की हवा भी राष्ट्रीय मानकों पर खरी नहीं
रैंकिंग और वास्तविक हवा के अंतर का सबसे बड़ा उदाहरण शीर्ष पायदान पर मौजूद कई शहर हैं।
- लखनऊ का स्कोर 198
- इंदौर का स्कोर 197
- जबलपुर का स्कोर 195
लखनऊ ने 1.5 करोड़ रुपये का पहला पुरस्कार जीता, क्योंकि उसने 100% कचरा प्रोसेसिंग, 1,100 से ज्यादा इलेक्ट्रिक कचरा गाड़ियां और वार्ड-स्तरीय प्रदूषण रोकथाम में बाजी मारी। लेकिन लखनऊ की औसतन हवा भी राष्ट्रीय मानक (60 μg/m³) से काफी खराब है।
देश की हवा में कितना सुधार?
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, सर्वे में शामिल 130 शहरों में से 108 शहरों ने 2017-18 के मुकाबले अपने PM10 लेवल में सुधार दर्ज किया है।
हालांकि, इनमें से केवल 14 शहर ही राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) को पूरी तरह पूरा कर पाए।
दिल्ली का 21वां स्थान इस बात का प्रमाण नहीं है कि यहां की हवा श्रीनगर या बेंगलुरु से साफ हो गई है। यह केवल इस बात का रिपोर्ट कार्ड है कि दिल्ली सरकार और स्थानीय निकाय प्रदूषण से लड़ने के लिए कागजों और धरातल पर दूसरे शहरों से ज्यादा सक्रिय नीतियां लागू कर रहे हैं। दिल्लीवासियों के लिए असली जीत तब होगी जब इन कागजी अंकों का असर जहरीले स्मॉग के दिनों में कमी के रूप में सामने आएगा।