ताजमहल-तेजोमहालय: श्रावण सोमवार पर गंगाजल अर्पित करने की मांग, हिंदू महासभा ने ASI कार्यालय पर किया प्रदर्शन| Navbharat Live
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सार
Taj Mahal News: हिंदू महासभा ने सावन के प्रत्येक सोमवार को ताजमहल परिसर में गंगाजल अर्पित करने की अनुमति देने की मांग करते हुए ASI को ज्ञापन सौंपा व अनुमति नहीं मिलने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।

हिंदू महासभा का प्रदर्शन (फोटो नवभारत)
विस्तार
Jalabhishek At Taj Mahal Agra: श्रावण मास के दौरान ताजमहल में कथित “तेजोमहालय” स्थित भगवान शिव पर गंगाजल अर्पित करने की मांग को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। बुधवार को अखिल भारत हिंदू महासभा ने जिला अध्यक्ष मीरा राठौर के नेतृत्व में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और श्रावण के प्रत्येक सोमवार को कांवड़ियों व हिंदू श्रद्धालुओं को ताजमहल परिसर में प्रवेश देकर जलाभिषेक की अनुमति देने की मांग की।
हिंदू श्रद्धालुओं को गंगाजल अर्पित करने की अनुमति दी जाए
ज्ञापन में कहा गया कि जिस प्रकार हर वर्ष मुगल सम्राट शाहजहां के उर्स के दौरान ताजमहल में तीन से चार दिनों तक निशुल्क प्रवेश दिया जाता है और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं, उसी प्रकार श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को भी हिंदू श्रद्धालुओं को गंगाजल अर्पित करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
ताजमहल में “तेजोमहालय” होने का दावा
हिंदू महासभा का दावा है कि ताजमहल वास्तव में “तेजोमहालय” है और वहां भगवान भोलेनाथ विराजमान हैं। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि वर्षों से हिंदूवादी संगठन श्रावण में जलाभिषेक का प्रयास करते रहे हैं, लेकिन पुलिस और CISF द्वारा उन्हें रोक दिया जाता है, जिससे कई बार विवाद और झड़प की स्थिति भी बनी है।
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हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं ने की जमकर नारेबाजी
जिलाध्यक्ष मीरा राठौर और अवतार सिंह गिल ने कहा कि यदि इस मांग को लेकर उन्हें जेल भी जाना पड़े तो वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को कांवड़ यात्रा निकालकर गंगाजल अर्पित करने का प्रयास किया जाएगा और इसके लिए जो भी कीमत चुकानी पड़े, संगठन उसके लिए तैयार है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। हालांकि, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की ओर से इस मांग पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
