Balaghat Raksha Bandhan: 8 साल तक भाई की राह देखती रहीं बहन, आखिरकार पूरी हुई बहन की मुराद, भाई के वापसी के बाद ऐसे मनाया रक्षाबंधन

Balaghat Raksha Bandhan: 8 साल तक भाई की राह देखती रहीं बहन, आखिरकार पूरी हुई बहन की मुराद, भाई के वापसी के बाद ऐसे मनाया रक्षाबंधन

Balaghat Raksha Bandhan: 8 साल तक भाई की राह देखती रहीं बहन, आखिरकार पूरी हुई बहन की मुराद, भाई के वापसी के बाद ऐसे मनाया रक्षाबंधन

Balaghat Raksha Bandhan | Photo credit: IbC24

Modified Date: August 28, 2026 / 10:09 am IST

Published Date: August 28, 2026 10:08 am IST

HIGHLIGHTS

  • बहन ने भाई को राखी बांधी
  • 8 साल का इंतजार हुआ खत्म
  • पाकिस्तान से वापसी के बाद ऐसे मनाया रक्षाबंधन

बालाघाट: Balaghat Raksha Bandhan बालाघाट की संघमित्रा के लिए इस रक्षाबंधन की खुशी बेहद खास है। करीब आठ साल के इंतजार के बाद उन्होंने अपने भाई प्रसन्नजीत रंगारी की कलाई पर राखी बांधी है। प्रसन्नजीत करीब सात साल पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में बंद रहा और फरवरी 2026 में भारत लौटा। भाई के लापता होने के बाद संघमित्रा ने प्रण लिया था कि वह राखी सिर्फ अपने भाई को ही बांधेंगी। पिछले साल पाकिस्तान भेजी गई राखी डाक सेवा बंद होने के कारण भाई तक नहीं पहुंची, लेकिन अब वही राखी भाई की कलाई पर है।

क्या है पूरा मामला

Balaghat Raksha Bandhan करीब आठ साल पहले प्रसन्नजीत घर से लापता हो गया था। 2011 में फार्मेसी की पढ़ाई के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन की तैयारी के दौरान उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ने लगी और वह बार-बार घर से जाने लगा। 2018 में घर से निकला तो वापस नहीं आया। परिवार ने कई जगह तलाश की और धीरे-धीरे उम्मीद छोड़ दी, लेकिन बहन संघमित्रा को भरोसा था कि भाई जरूर लौटेगा। इसी बीच पाकिस्तान से रिहा होकर आए कुलजीत सिंह कछवाहा के फोन से पता चला कि प्रसन्नजीत लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद है। दिसंबर 2021 में यह जानकारी मिलने के बाद संघमित्रा ने भाई को वापस लाने की लड़ाई शुरू की।

भाई को वापस लाने के साथ संघमित्रा के सामने परिवार संभालने की भी बड़ी जिम्मेदारी थी। बेटे के गम में मां की मानसिक स्थिति बिगड़ गई और पिता भी बेटे की याद में परेशान रहते थे। आर्थिक तंगी के चलते पिता को वृद्धाश्रम में रखना पड़ा। संघमित्रा ने करीब 14 महीने तक अधिकारियों और नेताओं के चक्कर लगाए, लेकिन मदद नहीं मिली। बाद में मानवाधिकार कार्यकर्ता और अधिवक्ता कपिल फूले से मुलाकात हुई। 21 फरवरी को मानव अधिकार आयोग में याचिका दायर की गई, जिसमें प्रसन्नजीत के लंबे समय से बिना ट्रायल और पर्याप्त कानूनी मदद के जेल में रहने और मानसिक बीमारी के आधार पर मानव अधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया गया।

याचिका के बाद नागरिकता और दस्तावेजों का सत्यापन शुरू हुआ। मध्य प्रदेश सरकार से लेकर पुलिस अधिकारियों तक प्रक्रिया आगे बढ़ी और पाकिस्तान भेजने के लिए संघमित्रा का वीडियो भी रिकॉर्ड किया गया। लेकिन भाई की वापसी की उम्मीद के बीच पिता लोपचंद रंगारी का निधन हो गया। आखिरकार जनवरी के आखिरी सप्ताह के बाद प्रसन्नजीत पाकिस्तान की जेल से रिहा होकर अटारी-वाघा बॉर्डर पहुंचा और फरवरी 2026 में बालाघाट वापस आया। अब भी उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और दस्तावेज बनवाने में परिवार को परेशानी आ रही है। संघमित्रा भाई का बेहतर इलाज कराना चाहती हैं। पिछले साल भेजी गई राखी भाई तक नहीं पहुंची थी, लेकिन इस बार वही राखी उसकी कलाई पर बांधकर बहन के वर्षों का इंतजार पूरा हुआ है।

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सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः

प्रश्न 1:  प्रसन्नजीत रंगारी कहां था?

उत्तर:  पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में सात साल तक बंद रहा।

प्रश्न 2:  संघमित्रा ने क्या प्रण लिया था?

उत्तर:  राखी सिर्फ अपने भाई को ही बांधेंगी।

प्रश्न 3:  भाई की वापसी कैसे हुई?

उत्तर:  मानवाधिकार आयोग में याचिका और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद।

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लेखक के बारे में

Dageshwar Dewangan

IBC24 डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हूं, जहां मेरी जिम्मेदारी मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति सहित प्रमुख विषयों की खबरों की कवरेज और प्रस्तुति है। वर्ष 2016 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हूं और अब तक 10 वर्षों का अनुभव प्राप्त किया है। विभिन्न प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए न्यूज़ राइटिंग और डिजिटल टूल्स में दक्षता हासिल की है। मेरे लिए पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है—सटीक, तेज और असरदार जानकारी पाठकों तक पहुंचाना मेरा लक्ष्य है। बदलते डिजिटल दौर में खुद को लगातार अपडेट कर, कंटेंट की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए प्रतिबद्ध हूं।