Bank of Baroda Data Leak: बैंक ऑफ बड़ौदा का कैसे हुआ 1000 GB डेटा लीक? क्या ग्राहकों के पैसे हैं खतरे में?

Time Published: Monday, July 27, 2026, 20:32 [IST]

Bank of Baroda Data Leak Reason: NEET समेत तमाम पेपर लीक केस के बीच भारत के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से एक बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) में कथित बड़े डेटा लीक की खबर ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया है।

दावा किया जा रहा है कि लगभग 1 टेराबाइट संवेदनशील डेटा डार्क वेब पर लीक हो गया है। बैंक ने इसे एक कर्मचारी के ईमेल खाते के हैक होने से जोड़ा है, लेकिन कोर बैंकिंग सिस्टम को सुरक्षित बताया है। फिर भी ग्राहक चिंतित हैं कि क्या उनके पैसे, अकाउंट डिटेल्स, आधार और लोन जानकारी सुरक्षित हैं?

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रैंसमवेयर ग्रुप ने हैक किया?

दरअसल, 24 जुलाई 2026 के आसपास Triple X नामक रैंसमवेयर ग्रुप ने दावा किया कि उन्होंने बैंक ऑफ बड़ौदा से करीब 1TB डेटा चुराया है। यह डेटा डार्क वेब पर उपलब्ध करा दिया गया, जहां कोई भी इसे डाउनलोड कर सकता है।

साइबर सुरक्षा रिसर्चर श्रीकांत लक्ष्मणन (CashlessConsumer के फाउंडर) ने X पर सैंपल डॉक्यूमेंट्स शेयर किए, जिसमें PII (व्यक्तिगत पहचान योग्य जानकारी), अकाउंट डिटेल्स, लोन रिकॉर्ड्स और अन्य फाइलें दिखाई गईं।

लीक हुए डेटा में क्या-क्या शामिल?

  • बचत और चालू खातों के रिकॉर्ड
  • लोन संबंधी जानकारी
  • इंटरनेट बैंकिंग यूजर डिटेल्स
  • NRI और कॉर्पोरेट बैंकिंग रिकॉर्ड
  • ग्राहक सहायता डेटा
  • शाखा और ATM संबंधी जानकारी
  • आधार कार्ड डिटेल्स, KYC डॉक्यूमेंट्स
  • आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट्स और कंप्लायंस फाइलें

बैंक ने 27 जुलाई को आधिकारिक बयान जारी किया। उसमें कहा गया कि एक कर्मचारी के ईमेल अकाउंट में सेंध लगी, जिससे कुछ डेटा तक अनधिकृत पहुंच हुई। कोर बैंकिंग सिस्टम (CBS) में कोई ब्रिच नहीं हुआ। बैंक ने तुरंत रोकथाम के उपाय किए, फोरेंसिक जांच शुरू की और नियामक अधिकारियों (RBI, CERT-In) के साथ मिलकर काम कर रहा है।

तकनीकी रूप से कैसे हुआ ब्रिच?

Triple X ग्रुप ने पहले इंडोनेशिया के एक बैंक को टारगेट किया था। संभावित तरीके हो सकते हैं...

  • फिशिंग अटैक: कर्मचारी को फर्जी ईमेल या लिंक भेजकर क्रेडेंशियल्स चुराए गए।
  • वीक पासवर्ड या मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) की कमी।
  • इंसाइडर थ्रेट या थर्ड-पार्टी वेंडर की कमजोरी।

ईमेल अकाउंट हैक होने से अटैकर को आंतरिक फाइलों तक पहुंच मिली, जो बाद में एक्सफिल्ट्रेट (बाहर निकाल) कर ली गई। बैंक का दावा है कि मुख्य सिस्टम (जहां ट्रांजेक्शन होते हैं) प्रभावित नहीं हुए।

ग्राहकों के पैसे पर क्या असर?

हालांकि, बैंक ने स्पष्ट किया कि कोर बैंकिंग सिस्टम सुरक्षित है। यानी डायरेक्ट अकाउंट से पैसे निकालने जैसा खतरा कम है, क्योंकि ट्रांजेक्शन के लिए OTP, UPI PIN, पासवर्ड की जरूरत पड़ती है। लेकिन, नाम, आधार, मोबाइल, ईमेल, अकाउंट नंबर लीक होने से फ्रॉड हो सकता है। लोन डिटेल्स का दुरुपयोग हो सकता है। हैकर्स फर्जी कॉल/मैसेज कर OTP या डिटेल्स मांग सकते हैं। डेटा क्रिमिनल्स को बेचा जा सकता है। अभी तक कोई बड़े पैमाने पर फ्रॉड की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सतर्कता जरूरी है।

भारत में बैंकिंग साइबर सिक्योरिटी की स्थिति को समझें...

भारत में UPI, डिजिटल पेमेंट्स के तेज विस्तार के साथ साइबर अटैक्स बढ़े हैं। RBI के अनुसार, 2025-26 में कई बैंकिंग ब्रिच रिपोर्ट हुए। इसमें, थर्ड-पार्टी वेंडर्स की कमजोरी आम समस्या, कर्मचारियों को साइबर ट्रेनिंग की कमी, पुरानी सिस्टम और लिगेसी इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। NPCI, CERT-In और RBI सख्त गाइडलाइंस जारी करते हैं, लेकिन क्रियान्वयन चुनौतीपूर्ण है।