Bankipur Election: मनोज तिवारी के 'राजनीतिक स्टंट' की खुली पोल, भरत तिवारी के पिता बोले- PK पर आरोप गलत
Published: Monday, July 27, 2026, 18:31 [IST]
Bankipur Election Bharat Tiwari Encounter: बांकीपुर उपचुनाव से पहले भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला अब सियासी आरोप-प्रत्यारोप का नया केंद्र बन गया है। बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पर आरोप लगाया कि उन्होंने न्याय दिलाने के नाम पर भरत तिवारी की मां आशा देवी से चुनाव प्रचार करने को कहा था।
हालांकि, अब भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी ने मनोज तिवारी के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि न प्रशांत किशोर और न ही किसी अन्य व्यक्ति ने उनके परिवार से बांकीपुर उपचुनाव में प्रचार करने के लिए संपर्क किया। ऐसे में बीजेपी के आरोपों पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं।
पिता ने मनोज तिवारी के दावे पर लगाया विराम
भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी ने साफ शब्दों में कहा कि उनके परिवार को प्रचार के लिए किसी का फोन नहीं आया। उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर ने कभी चुनाव प्रचार करने के लिए नहीं बुलाया। काशीनाथ तिवारी के इस बयान ने मनोज तिवारी के उस दावे को कमजोर कर दिया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि पीके ने न्याय के बदले चुनाव प्रचार की शर्त रखी थी।
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मां के बयान पर पिता ने दी अलग सफाई
आशा देवी के कथित बयान को लेकर भी काशीनाथ तिवारी ने अलग तस्वीर पेश की। उन्होंने कहा कि बेटे को खोने के बाद उनकी मानसिक स्थिति सामान्य नहीं है और जो भी व्यक्ति न्याय का भरोसा देता है, वह उसी की बात पर विश्वास कर लेती हैं। उनके मुताबिक, इसे किसी राजनीतिक सौदे या चुनावी शर्त से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
बीजेपी के आरोपों पर उठने लगे सवाल
मनोज तिवारी ने दावा किया था कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात के दौरान आशा देवी ने खुद उन्हें प्रशांत किशोर के प्रस्ताव की जानकारी दी थी। लेकिन अब परिवार के मुखिया ने ही इस दावे का खंडन कर दिया है। ऐसे में विपक्षी दल बीजेपी पर संवेदनशील मामले को चुनावी मुद्दा बनाने और बिना ठोस आधार के आरोप लगाने का आरोप लगा रहे हैं।
बांकीपुर चुनाव में एनकाउंटर केस बना सियासी मुद्दा
बांकीपुर उपचुनाव में भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर का मामला लगातार राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। अलग-अलग दल इस मुद्दे को अपने-अपने तरीके से जनता के बीच उठा रहे हैं। लेकिन परिवार के भीतर से सामने आए अलग-अलग बयानों ने पूरे विवाद को और उलझा दिया है। इससे चुनावी बहस अब विकास से ज्यादा आरोप-प्रत्यारोप पर केंद्रित होती दिख रही है।
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अब किसके दावे पर जनता करेगी भरोसा?
एक तरफ मनोज तिवारी का आरोप है कि न्याय के बदले प्रचार की शर्त रखी गई, वहीं दूसरी ओर भरत तिवारी के पिता ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि इस पूरे विवाद में सच क्या है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं, लेकिन परिवार की ओर से आए ताजा बयान ने बीजेपी के आरोपों की विश्वसनीयता पर नया राजनीतिक सवाल जरूर खड़ा कर दिया है।