मोदी पर डॉक्यूमेंट्री मामले में BBC को ‘फौरी राहत’; गुजरात के NGO ने मानहानि का केस वापस लिया
Sep 07, 2026 03:00 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली

BBC द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी एक डॉक्यूमेंट्री दिखाने के मामले में गुजरात के एक एनजीओ ने 3 साल पहले BBC के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में दायर मानहानि का केस अब वापस ले लिया है।

सरकार ने डॉक्यूमेंट्री को 'प्रोपेगैंडा' और 'औपनिवेशिक मानसिकता' की झलक बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी एक विवादित डॉक्यूमेंट्री दिखाने के मामले में BBC को फौरी राहत मिल गई है। गुजरात के एक एनजीओ 'जस्टिस ऑन ट्रायल' ने 3 साल पहले ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में दायर मानहानि का मुकदमा अब वापस ले लिया है। एनजीओ ने नया मुकदमा दायर करने की अनुमति भी मांगी है। एनजीओ ने आरोप लगाया था कि बीबीसी ने जनवरी 2023 में 'इंडिया: द मोदी क्वेश्चन' डॉक्यूमेंट्री प्रसारित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय न्यायपालिका की छवि खराब की है।
सरकार ने रिपोर्ट को किया था खारिज
एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी पर बनी इस डॉक्यूमेंट्री में यूनाइटेड किंगडम के विदेश मंत्रालय की एक ऐसी रिपोर्ट का जिक्र किया गया है, जो पहले कभी प्रकाशित नहीं हुई थी। इस रिपोर्ट में 2002 के दंगों के दौरान गुजरात के मुख्यमंत्री रहे मोदी के कामों पर सवाल उठाए गए थे। हालांकि, सरकार ने इस रिपोर्ट को ‘प्रोपेगैंडा’ और ‘औपनिवेशिक मानसिकता’ का नतीजा बताकर खारिज कर दिया था।
वकील ने मांगी थी केस वापस लेने की इजाजत
एनजीओ की तरफ से दिल्ली हाईकोर्ट में पेश हुए वकील ने 3 सितंबर को जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच को बताया कि उन्हें केस वापस लेने के निर्देश मिले हैं। वकील ने कहा कि इस मामले में जारी किया गया नोटिस एक ऐसे आवेदन से जुड़ा था, जिसमें मानहानि के मुकदमे के बजाय एक गरीब व्यक्ति के तौर पर मुकदमा करने की अनुमति मांगी गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने केस को वापस लिया हुआ मानकर खत्म कर दिया। एनजीओ ने अपने मुकदमे में प्रधानमंत्री, केंद्र तथा गुजरात सरकारों और भारतवासियों की प्रतिष्ठा और साख को हुए नुकसान के लिए 10,000 रुपये का हर्जाना मांगा था।
मुकदमे में कहा गया कि 2002 के दंगों पर सरकार और न्यायपालिका की कार्रवाई का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि कानून का राज बहाल हो। इसमें शामिल सभी लोगों को चाहे वो किसी भी पद हों उन्हें अपने किए का अंजाम भुगतना पड़े। इस मुकदमे में डॉक्यूमेंट्री मानहानि करने वाली बताई गई थी क्योंकि इसमें तथ्यों को निष्पक्ष रूप से पेश नहीं किया गया था।
बीबीसी और सरकार के क्या तर्क
हालांकि, बीबीसी का कहना था कि इस डॉक्यूमेंट्री को सर्वोच्च एडिटोरियल स्टैंडर्ड्स के मुताबिक पूरी जांच-पड़ताल के बाद बनाया गया था। सरकार ने कहा कि डॉक्यूमेंट्री ने एक ‘गलत नैरेटिव’ फैलाया और इस बात पर जोर दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने मोदी को किसी भी गलत काम के आरोप से बरी कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2023 में डॉक्यूमेंट्री को लेकर हुए विवाद के बीच भारत में बीबीसी पर बैन लगाने की मांग उस जनहित याचिका को ‘पूरी तरह से गलत’ बताते हुए खारिज कर दी थी। इसके बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने बीबीसी के दिल्ली और मुंबई स्थित दफ्तरों में एक ‘सर्वे’ किया था, जिससे राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। विपक्षी पार्टियों ने इस कार्रवाई को बीबीसी द्वारा दो हिस्सों वाली डॉक्यूमेंट्री दिखाए जाने से जोड़कर आलोचना की थी।