Bhojshala में जुमे की Namaz से SC का इनकार, अब परिसर के बाहर खुली जगह पर मुस्लिम करेंगे इबादत, कहां और कब?
Published: Tuesday, July 14, 2026, 21:35 [IST]
Bhojshala Friday Namaz Supreme Court Verdict: मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला विवादित परिसर मामले में मंगलवार (14 जुलाई) को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने यथास्थिति बहाल करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में क्लियर कहा कि भोजशाला परिसर में शुक्रवार यानी जुमे की नमाज नहीं होगी।
हालांकि, भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने एक अंतरिम व्यवस्था तैयार की। इसके तहत, राज्य सरकार को निर्देश दिया कि शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज अदा करने के लिए भोजशाला मंदिर के पास ही अस्थायी खुली जगह की व्यवस्था करें। कोर्ट का मकसद शांति बनाए रखना और दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करना है।
Bhojshala-Kamal Maula Dispute Complex: अब समझते हैं कि क्या है भोजशाला-कमाल मौला विवाद?
दरअसल, भोजशाला 11वीं शताब्दी का ऐतिहासिक स्थल है। इसे, हिंदू पक्ष सरस्वती मंदिर मानता है। वहीं, मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। ऐसे में 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की व्यवस्था के तहत हिंदुओं को मंगलवार पूजा और मुसलमानों को शुक्रवार जुमे की नमाज की इजाजत मिली थी।
लेकिन 15 मई 2026 को मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला आया। इसके तहत, भोजशाला को सरस्वती मंदिर घोषित कर दिया। इसी के साथ ही, 2003 की साझा व्यवस्था को खत्म कर दिया। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को सरस्वती मूर्ति लंदन से वापस लाने का भी निर्देश दिया। इसके बाद, मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
Supreme Court का भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज से इनकार, क्या-क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष को करारा झटका लगा। 14 जुलाई को कोर्ट ने 15 मई 2026 से पहले वाली व्यवस्था (परिसर के अंदर नमाज) बहाल करने से साफ इनकार कर दिया। भोजशाला परिसर के बाहर, पास खुली जगह पर नमाज की इजाजत दी। साथ ही मध्य प्रदेश सरकार को अस्थायी जगह उपलब्ध कराने का आदेश भी दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि ASI परिसर से छेड़छाड़ न करने के आदेश भी दिए। अब अगली सुनवाई तीन हफ्ते (21 दिन) बाद 4 अगस्त होगी।
Hindu-Muslim Arguments: क्या-क्या दिए हिंदू और मुस्लिम पक्ष ने अपने तर्क?
मुस्लिम पक्ष की पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील एएम सिंहवी, हुजेफा अहमदी, मीनाक्षी अरोरा ने कहा कि करीब 800 साल से मस्जिद के रूप में भोजशाला-कमाल मौला परिसर का इस्तेमाल हो रहा है। हाईकोर्ट का फैसला गलत है। 2003 वाली यथास्थिति बहाल होनी चाहिए। वहीं, हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील गुरु कृष्णकुमार ने तर्क दिया कि यथास्थिति बहाल करने का मतलब याचिकाओं को मान्यता देना होगा। हाईकोर्ट का फैसला सही दिशा में है। उधर, मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कोर्ट हस्तक्षेप न करे। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कदम उठाए गए हैं।