Big Breaking: ठाकरे गुट को लगा तगड़ा झटका, 6 बागी सांसदों के शिंदे गुट में विलय को लोकसभा सचिवालय की मंजूरी| Navbharat Live

Updated On: Jul 18, 2026 | 09:13 PM IST

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सार

UBT MP Merger In Shinde Group: ठाकरे गुट को बड़ा झटका! लोकसभा सचिवालय ने शिवसेना UBT के 6 बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में आधिकारिक विलय को दी मंजूरी। संसद में मजबूत हुआ शिंदे गुट।

Lok Sabha Secretariat approves the merger of 6 rebel MPs into the Shinde faction

ओम बिरला और उद्धव ठाकरे (सोर्स: सोशल मीडिया)

विस्तार

Lok Sabha Approves 6 MPs Merger Into Shinde Group: 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलने वाले संसद के मानसून सत्र से पहले उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी शिवसेना यूबीटी को बड़ा झटका लगा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उद्धव ठाकरे गुट के छह बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में विलय को औपचारिक मंजूरी दे दी है।

लोकसभा सचिवालय से सभी छह सांसदों को मंजूरी मिल गई है, मतलब यह है कि उद्धव गुट के सांसदों का शिंदे गुट में विलय मान्य हो गया है। इस तरह से शिवसेना शिंदे गुट के लोकसभा में कुल 13 सांसद हो गए हैं। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के बागी 20 सांसद जो कि एनसीपीआई में शामिल हो गए हैं, उन्हें भी अलग बैठने की अनुमति मिल गई है।

आनेद दुबे की प्रतिक्रिया

एकनाथ शिंदे की शिवसेना में 6 यूबीटी सांसदों के विलय पर शिवसेना यूबीटी के प्रवक्ता आनंद दुबे ने तीखी प्रतिक्रिया दी। दुबे ने कहा कि 2022 में जब हमारी पार्टी को तोड़ा जा रहा था, तब से हम लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन, तब से आज तक हमें यह पता नहीं चल पाया कि हमारी गलती क्या है? हमारी पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह चुरा लिया गया है। इसमें तत्कालीन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कितनी बड़ी भूमिका निभाई, वो जगजाहिर है। अब 2026 में एक बार फिर हमारी पार्टी को तोड़ दिया गया। हमारे छह सांसद चुरा लिए गए। इसमें लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बड़ी भूमिका निभाई है।

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उन्होंने आगे कहा कि हम कोर्ट जाते हैं तो समय लगता है, तारीख पर तारीख मिलती है। इस बार हमारे जो सांसद चुराए गए, उन्हें एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना का सांसद बताया जा रहा है, जबकि वो हमारे नाम और हमारे चुनाव चिन्ह पर चुनकर आए। ऐसे में लोकसभा स्पीकर ने दोनों पक्षों को सुने बिना अपना फैसला दे दिया। यह दिखाता है कि लोकतंत्र कमजोर होता जा रहा है।

ऑपरेशन टाइगर सफल हुआ

दरअसल, पिछले महीने महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने ऑपरेशन टाइगर को अंजाम दिया, जिसके तहत उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी में फूट पड़ गई। यूबीटी गुट के छह लोकसभा सांसद औपचारिक रूप से शिंदे गुट में शामिल हो गए।

छह बागी सांसदों में ओमप्रकाश भूपालसिंह उर्फ ओमराजे निंबालकर (धाराशिव/उस्मानाबाद), नागेश बापुराव पाटिल आष्टीकर (हिंगोली), संजय हरिभाऊ जाधव (परभणी), संजय उत्तमराव देशमुख (यवतमाल-वाशिम), भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे (शिरडी) और संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर पूर्व) शामिल हैं।

इस राजनीतिक उथल-पुथल के बाद लोकसभा में शिवसेना यूबीटी की संख्या 9 से घटकर 3 हो गई है, जबकि शिंदे गुट की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो गई है। उद्धव ठाकरे के खेमे में अरविंद सावंत (मुंबई दक्षिण), अनिल देसाई (मुंबई दक्षिण मध्य) और राजभाऊ वाजे (नासिक) बचे हैं।

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संसद में ताकत बढ़ाने की NDA की कोशिश

ध्यान देने वाली बात यह है कि इस बार का मानसून सत्र बदले हुए राजनीतिक समीकरणों के बीच शुरू हो रहा है। एनडीए की कोशिश है कि संसद में अपनी ताकत बढ़ाकर कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराया जाए। सरकार की प्राथमिकता महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को आगे बढ़ाने की है। इस बिल के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। वहीं, विपक्ष सरकार को नीट पेपर लीक, अयोध्या राम मंदिर चंदा विवाद, महंगाई और अन्य मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है।

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