Bihar News : “छातिये में 6 गोली ठोक देबे ले…” हाथ में सिगरेट-पिस्टल लेकर बार बाला के ठुमके, सरकारी स्कूल का VIDEO वायरल
मधुबनी: सरकारी स्कूल... यानी वह जगह जहां बच्चों को किताब, कॉपी और संस्कार मिलने चाहिए। लेकिन मधुबनी के एक सरकारी स्कूल के ग्राउंड से जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, उसने शिक्षा व्यवस्था पर ही कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां बच्चों के पढ़ने-लिखने वाले परिसर में कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर आर्केस्ट्रा कार्यक्रम आयोजित किया गया और इसी दौरान एक डांसर का वीडियो सामने आया है, जिसमें वह हाथ में सिगरेट और पिस्टल जैसी दिखने वाली वस्तु लेकर रंगदारी वाले गाने पर डांस करती नजर आ रही है। अब सवाल यह है कि सरकारी स्कूल का मैदान आखिर स्कूल रहा या फिर रातों-रात मनोरंजन का स्टेज बन गया?
वायरल वीडियो को मधुबनी जिले के कलुआही प्रखंड क्षेत्र के हरपुर गौरी दास टोल का बताया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर यहां आर्केस्ट्रा कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसी कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
वीडियो में एक महिला डांसर रंगदारी वाले गाने पर डांस करती दिखाई देती है। उसके हाथ में सिगरेट नजर आ रही है और दूसरे हाथ में पिस्टल जैसी दिखने वाली वस्तु दिखाई देती है। गाने के बोल भी कुछ ऐसे हैं, जिनमें गोली चलाने और दबंगई का अंदाज दिखाया जा रहा है। डांसर भी उसी अंदाज में अभिनय करती नजर आती है। यानी जिस जगह बच्चों को ‘अ’ से अनार और ‘क’ से कबूतर पढ़ाया जाना चाहिए, वहां वीडियो में ‘छाती में छह गोली’ वाले अंदाज का प्रदर्शन चर्चा का विषय बना हुआ है।
स्कूल का मैदान या रंगदारी का मंच?
मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सरकारी स्कूल के परिसर में इस तरह के कार्यक्रम की अनुमति किसने दी? कृष्ण जन्माष्टमी पर सांस्कृतिक कार्यक्रम होना कोई नई बात नहीं है। धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए बच्चों को अपनी परंपराओं से जोड़ना अच्छी पहल हो सकती है। लेकिन सवाल कार्यक्रम के नाम पर होने वाली गतिविधियों का है।
अगर स्कूल परिसर में सांस्कृतिक कार्यक्रम की अनुमति दी गई थी तो क्या आयोजन की पूरी जानकारी संबंधित शिक्षा विभाग या स्थानीय प्रशासन को थी? क्या कार्यक्रम की निगरानी के लिए कोई जिम्मेदार व्यक्ति मौजूद था? क्या आयोजकों को यह बताया गया था कि स्कूल परिसर में किस तरह का कार्यक्रम किया जा सकता है और किस तरह का नहीं? ये सवाल इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि सरकारी स्कूल केवल चारदीवारी और मैदान का नाम नहीं है। वह बच्चों के लिए सीखने और सुरक्षित वातावरण का स्थान है।
बच्चों के सामने कैसा संदेश?
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने स्थानीय लोगों के बीच भी चर्चा तेज कर दी है। लोगों का कहना है कि स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में यदि इस तरह के गानों और प्रदर्शन को मंच मिलता है तो इसका बच्चों पर क्या असर पड़ेगा? एक तरफ सरकार स्कूलों में बच्चों को अनुशासन, शिक्षा और अच्छे संस्कार देने की बात करती है। दूसरी तरफ उसी स्कूल के परिसर में यदि हथियारनुमा वस्तु, सिगरेट और रंगदारी वाले गानों के साथ डांस का वीडियो सामने आए तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
व्यंग्य में कहें तो शायद शिक्षा विभाग की किताब में एक नया अध्याय जुड़ गया है—‘स्कूल के मैदान में सांस्कृतिक कार्यक्रम कैसे बन जाए वायरल वीडियो का मंच।’ हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि और उसमें दिखाई दे रही वस्तु वास्तव में हथियार है या नहीं, यह जांच का विषय है। इसलिए इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आना चाहिए।
वीडियो वायरल होते ही शिक्षा विभाग में हड़कंप
वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने के बाद शिक्षा विभाग में भी हलचल मचने की बात सामने आ रही है। विभाग के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि कार्यक्रम की अनुमति किस स्तर से मिली थी और स्कूल परिसर में कार्यक्रम के दौरान क्या-क्या हुआ।
सवाल यह भी है कि अगर कार्यक्रम की अनुमति थी तो आयोजन की निगरानी कौन कर रहा था? और यदि अनुमति नहीं थी तो स्कूल परिसर में इतना बड़ा आयोजन कैसे हो गया? सरकारी स्कूलों में कार्यक्रम कराने के लिए नियम और जिम्मेदारियां तय होती हैं। ऐसे में यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी होगा।
अब जांच बताएगी ‘सांस्कृतिक कार्यक्रम’ की असली कहानी
फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने मधुबनी से लेकर शिक्षा विभाग तक चर्चा जरूर छेड़ दी है। वीडियो सही है या उसमें किसी तरह की एडिटिंग हुई है, हाथ में दिखाई दे रही वस्तु असली हथियार है या नकली, कार्यक्रम की अनुमति किसने दी और स्कूल परिसर में ऐसी प्रस्तुति की अनुमति कैसे मिली—इन सभी सवालों का जवाब जांच से ही मिल सकेगा।
लेकिन एक बात साफ है—सरकारी स्कूल का मैदान बच्चों की पढ़ाई और खेलकूद के लिए है। अगर वहां सांस्कृतिक कार्यक्रम हो भी, तो वह संस्कृति और मर्यादा की सीमा में होना चाहिए। वरना कल को बच्चे स्कूल पहुंचकर यह पूछ सकते हैं कि ‘सर, आज पढ़ाई होगी या फिर आर्केस्ट्रा का अगला शो?’
मधुबनी के इस वायरल वीडियो ने कम से कम इतना सवाल तो जरूर खड़ा कर दिया है कि स्कूलों में होने वाले आयोजनों की निगरानी आखिर कौन करेगा और बच्चों के परिसर में मनोरंजन और अनुशासन की सीमा कौन तय करेगा? अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग सिर्फ वायरल वीडियो देखकर ‘हड़कंप’ तक सीमित रहता है या फिर आयोजन की अनुमति, जिम्मेदार लोगों और पूरे मामले की वास्तविकता सामने लाकर कार्रवाई भी करता है।