बिहार में BJP सरकार फिर CBI एंट्री पर बैन क्यों? अब 8 राज्यों में जांच नहीं कर पाएगी एजेंसी, 3 में सबसे ज्यादा करप्शन केस
बिहार में पिछले 20 साल में निगरानी अन्वेषण विभाग ने 5136 सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में कार्रवाई की. शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ सबसे ज्यादा शिकायत दर्ज की गई और उन पर कार्रवाई हुई. बिहार सरकार का कहना है कि अगर किसी भी राज्य कर्मचारियों के खिलाफ कोई एक्शन लेना है, तो CBI को हमसे मंजूरी लेनी होगी. वहीं प्राइवेट मामलों में कोई भी प्रतिबंध लागू नहीं है. इसके अलावा केंद्रीय कर्मचारियों पर भी CBI की जांच और रेड हो सकती है. 2014 के बाद आमतौर पर जब राज्य में विपक्ष की सरकारें होती थी, तब ऐसा होता था. लेकिन पहली बार ऐसा हो रहा है कि BJP शासित राज्य भी CBI की डायरेक्ट एंट्री पर रोक लगा रहा है.
यानी बदलाव खास तौर पर बिहार सरकार के कर्मचारियों और राज्य के नियंत्रण वाली संस्थाओं से जुड़े मामलों में हुआ है. यह फैसला दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट (DSPE) एक्ट, 1946 की धारा 6 के तहत लिया गया है. बिहार के साथ अब 8 राज्य ऐसे हो गए हैं, जहां CBI को राज्य की सामान्य सहमति नहीं है. साथ ही राज्य के अधिकार क्षेत्र में जांच के लिए केस के हिसाब से अनुमति की जरूरत पड़ सकती है. इनमें झारखंड, पंजाब, तेलंगाना, बिहार, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और मेघालय शामिल हैं. सुप्रीम कोर्ट भी साफ कर चुका है कि DSPE एक्ट की धारा 6 के तहत राज्य की सहमति CBI के लिए जरूरी है. हालांकि अदालत खुद किसी मामले की CBI जांच का आदेश दे सकती है.

सवाल सिर्फ अनुमति का नहीं, भ्रष्टाचार की जांच का भी है
यह मुद्दा इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण है ,क्योंकि इन 8 राज्यों में से कुछ राज्यों में भ्रष्टाचार के मामले बड़ी संख्या में दर्ज होते हैं. 2024 के NCRB आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार के 724 मामले दर्ज हुए और वह देश में सबसे ऊपर रहा. तमिलनाडु में 364, कर्नाटक में 334 और पंजाब में 280 मामले दर्ज हुए. बिहार में भी 124 मामले दर्ज हुए.
यहां एक अहम बात समझना जरूरी है. सामान्य सहमति खत्म होने का मतलब यह नहीं कि CBI इन राज्यों में कोई जांच ही नहीं कर सकती. अगर राज्य सरकार किसी मामले में अनुमति देती है तो CBI जांच कर सकती है. हालांकि कुछ मामलों में भ्रष्टाचार की जांच प्रभावित हो सकती है. जब आरोपी राज्य सरकार का कर्मचारी हो, ऐसे मामलों में CBI को जांच शुरू करने से पहले राज्य सरकार की मंजूरी लेनी होगी, जिससे कार्रवाई में देरी हो सकती है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट किसी मामले की जांच CBI को सौंप सकता है.
राज्यों और केंद्र के बीच टकराव का मुद्दा
CBI को लेकर विवाद सिर्फ भ्रष्टाचार की जांच तक सीमित नहीं है. पुलिस और पब्लिक ऑर्डर संविधान की स्टेट लिस्ट में आते हैं. इसलिए किसी राज्य में केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई का सवाल सीधे संघीय ढांचे यानी केंद्र-राज्य के संबंधों से जुड़ जाता है. CBI असल में DSPE के तहत काम करती है और राज्यों में उसकी जांच की शक्तियां राज्य की सहमति से जुड़ी हैं.
दूसरी तरफ, सामान्य सहमति खत्म होने से राज्य की अपनी जांच एजेंसियों की भूमिका बढ़ जाती है. उदाहरण के लिए तमिलनाडु में DVAC, कर्नाटक में लोकायुक्त/ACB व्यवस्था, पंजाब में विजिलेंस और दूसरे राज्यों में संबंधित एंटी-करप्शन एजेंसियां अपने अधिकार क्षेत्र में कार्रवाई करती हैं. ऐसे में असली सवाल यह है कि क्या राज्य की एजेंसियां भ्रष्टाचार के मामलों में स्वतंत्र और प्रभावी जांच कर पाएंगी? और अगर मामला केंद्रीय कर्मचारी, केंद्रीय योजना या केंद्र-राज्य दोनों से जुड़े अधिकारियों का हो तो जांच की जिम्मेदारी किस एजेंसी के पास जाएगी?
अब आगे क्या होगा?
आने वाले समय में तीन सवाल सबसे अहम होंगे, जो इस फैसले के असर को समझने में मदद करेंगे.
- क्या राज्य सरकार हर मामले में CBI को जांच की मंजूरी देगी या चुनिंदा मामलों में रोक लगाएगी?
- केंद्र और राज्य के बीच विवाद बढ़ा तो क्या अदालतें इसमें दखल देंगी?
- क्या दूसरे राज्य भी CBI की सामान्य सहमति खत्म करने का रास्ता अपनाएंगे?
इसका असर यह हो सकता है कि कुछ मामलों में CBI जांच की रफ्तार राज्य सरकार की मंजूरी पर निर्भर हो जाए. हालांकि, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के पास CBI जांच का आदेश देने का अधिकार पहले की तरह बना रहेगा.
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शुभेंदु प्रताप भूमंडल
पत्रकारिता में बीते 5 साल से सक्रिय हैं. नेशनल और इंटरनेशनल न्यूज राइटिंग का अनुभव. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से साइंस में ग्रेजुएशन, फिर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता और वीडियो प्रोडक्शन की पढ़ाई. दैनिक भास्कर डिजिटल से करियर की शुरुआत. बतौर न्यूज ब्रीफ एडिटर भास्कर डिजिटल में 800 से ज्यादा बाइलाइन स्टोरी. वीडियो स्क्रिप्टिंग का भी अनुभव. अगस्त 2025 से टीवी9 डिजिटल के साथ नई पारी का आगाज.
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