खरगे के साथ हुआ छुआछूत? राहुल गांधी ने खोला BJP-RSS के खिलाफ मोर्चा! की FIR की मांग!

Time Published: Saturday, August 29, 2026, 15:10 [IST]

Haldwani Purification Controversy: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद हुए कथित 'शुद्धीकरण' कार्यक्रम को लेकर राजनीति गरमा गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मामले को जातिगत भेदभाव से जोड़ते हुए BJP और RSS पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि किसी दलित व्यक्ति के किसी जगह जाने के बाद वहां 'शुद्धीकरण' करना छुआछूत की सोच को दिखाता है।

राहुल गांधी ने केंद्र और राज्य सरकार से इस मामले में जल्द FIR दर्ज करने की मांग की। उन्होंने कहा कि संविधान ने छुआछूत को खत्म किया है, लेकिन ऐसी घटनाएं बताती हैं कि यह सोच अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। हालांकि, बीजेपी ने इस घटना से पार्टी का सीधा संबंध होने से इनकार किया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पहले घटना की निंदा करते हुए जांच की बात कही थी।

Haldwani Purification Controversy Kharge Rahul Gandhi

खरगे की सभा के बाद क्या हुआ?

मल्लिकार्जुन खरगे ने 8 अगस्त 2026 को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की 'विजय शंखनाद रैली' को संबोधित किया था। सभा खत्म होने के दो दिन बाद यानी 10 अगस्त को श्री राम सेना से जुड़े लोगों ने इसी मैदान में हवन किया और कथित तौर पर 'शुद्धीकरण' अनुष्ठान कराया। घटना सामने आने के बाद कांग्रेस ने आरोप लगाया कि खरगे के दलित होने की वजह से कार्यक्रम स्थल का शुद्धीकरण कराया गया। इसको लेकर पार्टी ने बीजेपी और आरएसएस पर भी सवाल उठाए।

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दूसरी तरफ, बीजेपी ने कहा कि इस कार्यक्रम से पार्टी का कोई सीधा संबंध नहीं है। संबंधित संगठन ने भी शुद्धीकरण के लिए अलग वजह बताई। संगठन का दावा था कि कांग्रेस की सभा में कथित आपत्तिजनक नारे लगाए गए थे और रामलीला मैदान की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को देखते हुए यह अनुष्ठान किया गया।

राहुल गांधी ने क्या आरोप लगाया?

राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में हल्द्वानी की घटना का जिक्र करते हुए BJP और RSS पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि अगर किसी दलित नेता के कार्यक्रम के बाद किसी स्थान को 'शुद्ध' करने की जरूरत महसूस की जाती है, तो यह छुआछूत वाली मानसिकता का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे ने अपना जीवन देश और संविधान के लिए काम करते हुए बिताया है। ऐसे नेता के कार्यक्रम के बाद इस तरह का आयोजन होना गंभीर सवाल खड़े करता है। राहुल गांधी ने सरकार से हल्द्वानी की घटना में जल्द से जल्द एफआईआर दर्ज करने की मांग भी की।

दो विचारधाराओं की लड़ाई बताया

राहुल गांधी ने इस विवाद को देश में चल रही दो विचारधाराओं के बीच की लड़ाई से भी जोड़ा। उनके अनुसार, एक तरफ संविधान और डॉ. भीमराव आंबेडकर, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल की सोच है, जबकि दूसरी तरफ बीजेपी और आरएसएस की विचारधारा है। उन्होंने आरोप लगाया कि संविधान ने छुआछूत को खत्म कर दिया है, लेकिन बीजेपी से जुड़े लोगों पर इसे व्यवहार में लाने के आरोप लग रहे हैं।

खरगे ने भी जताई थी नाराजगी

इस घटना के बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे अपने लिए अपमानजनक बताया था। उन्होंने छुआछूत से जुड़े कानून के तहत केस दर्ज करने और आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग की थी। खरगे का कहना था कि इस घटना से उन्हें छुआछूत की उस पीड़ा का एहसास हुआ, जिसका सामना दलित समाज लंबे समय से करता आया है।

दलित बच्चों का भी उठाया मुद्दा

राहुल गांधी ने हल्द्वानी के विवाद को केवल एक घटना तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने देश में दलितों के साथ होने वाले कथित भेदभाव के कई उदाहरण गिनाए। उन्होंने दावा किया कि कुछ स्कूलों में दलित बच्चों से शौचालय साफ कराने, झाड़ू लगाने और फर्श साफ करने जैसे काम कराए जाते हैं। राहुल गांधी के मुताबिक, ऐसी घटनाओं का असर बच्चों की सोच पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि जब एक बच्चा दूसरे बच्चे को ऐसे काम करते देखता है और खुद उससे अलग व्यवहार पाता है, तो समाज में भेदभाव की सोच आगे बढ़ती रहती है।

राहुल गांधी ने ग्रामीण इलाकों में जातिगत भेदभाव के दूसरे उदाहरण भी बताए। उन्होंने दावा किया कि कुछ जगहों पर दलितों को गांव के साझा कुएं से पानी लेने की अनुमति नहीं दी जाती। ऐसी स्थिति में उन्हें अपने लिए अलग कुआं खोदने तक की जरूरत पड़ती है।

उन्होंने चाय की दुकानों पर अलग कप दिए जाने का भी दावा किया। उनके अनुसार, कुछ जगहों पर दलितों के लिए कागज या प्लास्टिक के अलग कप रखे जाते हैं, जिन्हें इस्तेमाल के बाद फेंक दिया जाता है। राहुल गांधी ने कहा कि जातिगत भेदभाव की समस्या सिर्फ किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश, उत्तर भारत और देश के कई शहरों और गांवों में भी ऐसी घटनाएं सामने आती रहती हैं।

BJP का क्या कहना है?

बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश बताया है। पार्टी का कहना है कि रामलीला मैदान में अनुष्ठान कराने वाले संगठन का बीजेपी से कोई सीधा संबंध नहीं है। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने घटना की निंदा की थी और मामले की जांच कर कार्रवाई का भरोसा दिया था। पार्टी ने साफ किया था कि वह इस तरह की गतिविधियों का समर्थन नहीं करती।

हालांकि, उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने बाद में इस मामले को लेकर कहा कि कांग्रेस की सभा में कथित तौर पर ऐसे नारे और गतिविधियां हुई थीं, जो रामलीला मैदान की धार्मिक प्रकृति के हिसाब से सही नहीं थीं।

संविधान में छुआछूत पर क्या है प्रावधान?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 17 छुआछूत को खत्म करता है और इसके किसी भी रूप में व्यवहार पर रोक लगाता है। छुआछूत से जुड़े मामलों में Protection of Civil Rights Act, 1955 के तहत भी कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। हल्द्वानी का मामला अब कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का बड़ा मुद्दा बन गया है। एक तरफ कांग्रेस इसे जातिगत भेदभाव से जोड़ रही है, जबकि बीजेपी घटना से दूरी बना रही है और संबंधित संगठन ने अनुष्ठान के पीछे अलग कारण बताया है।

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