मुंबई के पुलों और फ्लाईओवरों की डिजाइन खामियां रोकने के लिए BMC ने बनाया 29 विशेषज्ञों का पैनल| Navbharat Live

Updated On: Jul 22, 2026 | 04:00 PM IST

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सार

Mumbai BMC Bridge Planning Panel: गोखले और मृणालताई गोरे ब्रिज की तकनीकी गलतियों के बाद BMC ने 29 सलाहकारों का 5 साल के लिए पैनल बनाया है, जो पुलों और सुरंगों की डिजाइन और काम की निगरानी करेंगे।

Following technical flaws in key bridges, BMC empanels 29 expert technical consultants for 5 years to oversee design and execution of bridges and tunnels.

गोखले और विक्रोली ब्रिज (सोर्सः सोेशल मीडिया)

विस्तार

Mumbai Bridge Expert Panel: मुंबई के गोखले पुल के आपस में मेल न खाने वाले हिस्सों, मृणालताई गोरे पुल की खुरदरी सड़क और विक्रोली रेलवे पुल पर योजना के अभाव जैसी लगातार सामने आई तकनीकी गलतियों और तीखी आलोचनाओं के बाद बीएमसी जाग गई है। भविष्य की परियोजनाओं में डिजाइन की खामियों और योजना में लापरवाही को रोकने के लिए बीएमसी ने बड़ा निर्णय लिया है।

शहर के प्रमुख पुलों, फ्लाईओवरों और सुरंगों के वैज्ञानिक नियोजन, डिजाइन और प्रत्यक्ष निगरानी के लिए 29 तकनीकी सलाहकारों का पांच वर्ष के लिए पैनल नियुक्त करने का प्रस्ताव मंजूरी के लिए स्थायी समिति के समक्ष रखा गया है। इस प्रस्ताव को लेकर सत्तारूढ़ दल और विपक्ष की तरफ से प्रशासन को घेरने की संभावना है।

पिछले कुछ महीनों में मुंबई की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को लेकर बीएमसी को विभिन्न स्तरों पर आलोचना का सामना करना पड़ा। गोरेगांव स्थित मृणालताई गोरे फ्लाईओवर की अनुपयुक्त सड़क सतह के कारण वाहन चालकों को काफी परेशानी हुई। वहीं, विक्रोली रेलवे फ्लाईओवर के उद्घाटन के बाद भी वहां केंद्रीय डिवाइडर और पैदल यात्रियों के लिए पर्याप्त जगह नहीं होने की बात सामने आई थी। विशेष रूप से फरवरी 2024 में अंधेरी स्थित गोपालकृष्ण

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गोखले पुल के पुनर्निर्माण के दौरान इसके दो हिस्सों के आपस में नहीं जुड़ पाने के कारण बीएमसी के कामकाज पर सवाल उठे थे। इस पृष्ठभूमि में यह नया निर्णय काफी महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। इस कार्य के लिए मुख्य अभियंता, पुल विभाग के पास कुल 31 कंपनियों ने आवेदन किया था। तकनीकी क्षमता और अनुभव की जांच के बाद इनमें से 29 कंपनियों का चयन किया गया है।

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सलाहकार शुल्क 3.5 करोड़

इनमें ‘टाटा कंसल्टेंसी इंजीनियर्स’, ‘स्पेक्ट्रम टेक्नो कंसल्टेंट्स’ और ‘ग्रीन डिजाइन एंड इंजीनियरिंग सर्विसेज’ जैसी प्रतिष्ठित संस्थाएं शामिल हैं। ये सलाहकार वास्तविक काम शुरू होने से पहले ही तकनीकी चुनौतियों की पहचान कर उनके समाधान सुझाएंगे। इसके अलावा, सलाहकारों के काम पर नियंत्रण रखने के लिए बीएमसी ने दंडात्मक प्रावधान भी किए है। अधिकांश परियोजनाओं के लिए सलाहकार शुल्क अधिकतम 3।5 करोड़ रुपये तक सीमित रखा गया है।

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