BNMU के अतिथि प्राध्यापकों को 11 माह से मानदेय नहीं: आर्थिक संकट से जूझ रहे 200 शिक्षक, कुलपति से भुगतान की मांग - Madhepura News
मधेपुरा के बीएन मंडल विश्वविद्यालय के पीजी विभाग और विभिन्न अंगीभूत कॉलेजों में कार्यरत अतिथि सहायक प्राध्यापकों को पिछले 11 महीने से मानदेय नहीं मिला है।
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मानदेय भुगतान की मांग को लेकर बुधवार को अतिथि सहायक प्राध्यापकों ने विश्वविद्यालय परिसर में बैठक की। इसके बाद कुलपति को ज्ञापन सौंपकर जल्द से जल्द लंबित पारिश्रमिक का भुगतान कराने की मांग की।
अतिथि प्राध्यापकों ने बताया कि विश्वविद्यालय के पीजी विभाग और विभिन्न अंगीभूत कॉलेजों में करीब 200 अतिथि सहायक प्राध्यापक सितंबर 2025 से कार्यरत हैं।

रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में दिक्कत
नियमित रूप से शैक्षणिक कार्य करने के बावजूद अब तक उन्हें पारिश्रमिक का भुगतान नहीं किया गया है। 11 महीने से मानदेय नहीं मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गई है।
प्राध्यापकों ने बताया कि लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है। मकान मालिक और किराना दुकानदार भी अब उधार देने से मना करने लगे हैं।
बच्चों की पढ़ाई, परिवार के भरण-पोषण और इलाज जैसे जरूरी खर्चों को पूरा करने में भी परेशानी हो रही है। कई प्राध्यापक आर्थिक संकट के कारण मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं।
आंतरिक स्रोत से पारिश्रमिक का भुगतान करें
अतिथि सहायक प्राध्यापकों ने कहा कि यदि राज्य सरकार की ओर से विश्वविद्यालय को मानदेय की राशि उपलब्ध नहीं कराई गई है तो विश्वविद्यालय अपने आंतरिक स्रोत से लंबित पारिश्रमिक का भुगतान करे।
उन्होंने कहा कि पूर्व में भी विश्वविद्यालय के आंतरिक स्रोत से अतिथि सहायक प्राध्यापकों के मानदेय का भुगतान किया जा चुका है। ऐसे में वर्तमान में भी आंतरिक स्रोत से भुगतान कर आर्थिक संकट से जूझ रहे प्राध्यापकों को राहत दी जा सकती है।
आर्थिक संकट से गुजर रहे शिक्षक
उन्होंने कुलपति से मामले में तत्काल पहल करते हुए लंबित मानदेय का भुगतान कराने की मांग की है। प्राध्यापकों का कहना है कि वे लगातार अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं, लेकिन लंबे समय से पारिश्रमिक नहीं मिलने से उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है।
बैठक में प्रभु कुमार सिंह, गोपाल झा, डॉ. नंदकिशोर, डॉ. लक्ष्मण कुमार, डॉ. श्वेता शरण, डॉ. मुकेश कुमार, डॉ. मनीष रंजन सैनी समेत बड़ी संख्या में अतिथि सहायक प्राध्यापक मौजूद थे।