BNS और झारखंड पुलिसः 60 दिन में सिर्फ 13.02% और 90 दिन में 24.82% चार्जशीट

Ranchi: नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) को लागू करने को लेकर झारखंड की तैयारियों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय की समीक्षा में कई कमियां सामने आई हैं. 23 मार्च 2026 को केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई बैठक में झारखंड के मुख्य सचिव और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कानूनों के अमल और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों की समीक्षा की गई. बैठक के बाद जारी रिपोर्ट में राज्य को कई बिंदुओं पर सुधार और समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं.

केंद्रीय गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक समय पर चार्जशीट दाखिल करने में देरी हुई है. बीएनएसएस की धारा 187(3) के तहत 60 और 90 दिन की वैधानिक समयसीमा में चार्जशीट दाखिल करने का झारखंड का आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से कम पाया गया.

रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में केवल 13.02 प्रतिशत मामलों में 60 दिन के भीतर और 24.82 प्रतिशत मामलों में 90 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल हुई. गृह मंत्रालय ने इस पर नियमित निगरानी व्यवस्था बनाने और समयसीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल करने की स्थिति में सुधार का निर्देश दिया है.

24 में सिर्फ 15 जिलों में साइबर थाना

साइबर अपराध को लेकर भी राज्य की स्थिति पर सवाल उठे हैं. रिपोर्ट के अनुसार झारखंड के 24 जिलों में से केवल 15 जिलों में साइबर पुलिस स्टेशन चालू हैं. गृह मंत्रालय ने सभी जिलों तक साइबर पुलिस थानों का विस्तार करने और ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था को तत्काल लागू करने को कहा है.

वित्तीय साइबर अपराध में पैसे को रोकने की कार्रवाई का आंकड़ा भी संतोषजनक नहीं पाया गया. रिपोर्ट में औसत लियन प्रतिशत 17.23 फीसदी बताया गया है. मंत्रालय ने 1930 साइबर हेल्पलाइन को प्रशिक्षित कर्मचारियों के साथ 24 घंटे प्रभावी तरीके से संचालित करने पर जोर दिया है.

2730 मामलों में सिर्फ 351 पूरे

साइबर अपराध से जुड़े सीआईएआर मामलों की समीक्षा में भी बड़ी पेंडेंसी सामने आई. कुल 2730 मामलों में केवल 351 मामले पूरे हुए, यानी पूर्णता दर करीब 12.85 प्रतिशत रही. गृह मंत्रालय ने राज्य को लंबित मामलों की संख्या कम करने और कार्रवाई की रफ्तार बढ़ाने को कहा है.

रांची, धनबाद, जामताड़ा व देवघर साइबर अपराध का हॉटस्पॉट

रिपोर्ट में रांची, धनबाद, जामताड़ा और देवघर को म्यूल बैंक खातों और संदिग्ध स्थानों के मामले में प्रमुख हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया है. कई जिलों में एटीएम निकासी के हॉटस्पॉट भी सामने आए हैं. गृह मंत्रालय ने इन चिन्हित इलाकों पर विशेष ध्यान देने को कहा है.

65 में 34 अधिसूचनाएं ही जारी

नए आपराधिक कानूनों से संबंधित 65 आवश्यक अधिसूचनाओं में अब तक 34 जारी होने की जानकारी बैठक में दी गई. केंद्र ने लंबित अधिसूचनाओं को प्राथमिकता के आधार पर जारी करने को कहा है.

राज्य ने चारों मॉडल नियमों - ई-साक्ष्य, ई-सम्मन, सामुदायिक सेवा और न्याय श्रुति - को अधिसूचित कर दिया है. हालांकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आधारित ट्रायल की व्यवस्था मजबूत करने और अदालतों द्वारा सीधे समन की तामील सुनिश्चित करने को कहा गया है.

फोरेंसिक व्यवस्था में भी बड़ी कमी

रिपोर्ट में झारखंड की फोरेंसिक व्यवस्था में भी कई कमियां दर्ज की गई हैं. सभी जिलों में मोबाइल फोरेंसिक वैन उपलब्ध नहीं हैं. राज्य में 24 मोबाइल फोरेंसिक वैन की खरीद प्रक्रिया चल रही है. गृह मंत्रालय ने खरीद में तेजी लाने और बड़े जिलों में कम से कम दो वैन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.

अपराध स्थल पर फोरेंसिक टीम की अनिवार्य जांच को लेकर भी स्थिति पूरी तरह संतोषजनक नहीं मिली. 1 जनवरी 2025 से 2 फरवरी 2026 तक डीएफएसएल रांची को 615 अनुरोध मिले, जिनमें 430 मामलों में टीम ने मौके पर जाकर जांच की, जबकि 185 मामलों को मोबाइल या वीडियो मार्गदर्शन के जरिए संभाला गया.

ICJS योजना में 46.18 करोड़ की राशि, खर्च शून्य

रिपोर्ट में आईसीजेएस 2.0 योजना को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई. योजना के तहत 46.18 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत होने के बावजूद बैठक तक कोई खर्च नहीं हुआ था. गृह मंत्रालय ने खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने और सभी आईसीजेएस केंद्रों में नेटवर्क कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.

नेटग्रिड के 49 में सिर्फ 26 एक्टिव यूजर

नेटग्रिड के इस्तेमाल को लेकर भी राज्य की स्थिति पर ध्यान दिया गया. रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड में 49 यूजर में सिर्फ 26 एक्टिव यूजर हैं. गृह मंत्रालय ने सक्रिय उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ाने और राज्य स्तर पर पर्याप्त वरिष्ठता वाले नोडल अधिकारी की नियुक्ति का सुझाव दिया है.

पुलिस मुख्यालय से लेकर मुख्य सचिव स्तर तक निगरानी

केंद्रीय गृह सचिव ने बैठक में उठाए गए सभी मुद्दों की मुख्य सचिव स्तर पर हर 15 दिन में समीक्षा करने का सुझाव दिया है. साथ ही गृह मंत्रालय के विभिन्न विभागों से जुड़े मामलों की निगरानी के लिए प्रधान सचिव स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा गया है. रिपोर्ट में राज्य को नए आपराधिक कानूनों के साथ साइबर अपराध, फोरेंसिक जांच, चार्जशीट, आईसीजेएस, ई-साक्ष्य और पुलिस तकनीक से जुड़े मामलों में समयबद्ध सुधार करने पर जोर दिया गया है.