फ्लाइंग क्रेमलिन से उतरेंगे पुतिन, सड़क पर दौड़ेगा रोलिंग बंकर! BRICS समिट में क्यों किले जैसी बनी दिल्ली?
Updated: Thursday, September 10, 2026, 17:18 [IST]
दिल्ली में 18वां BRICS समिट इस वीकेंड होने जा रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत दुनिया भर के कई बड़े नेता राजधानी पहुंच रहे हैं। इन नेताओं के साथ सिर्फ उनका काफिला नहीं आ रहा, बल्कि एक पूरा चलता-फिरता किला भी आ रहा है।
खाने की जांच करने वाली मोबाइल लैब, असली नेताओं जैसे दिखने वाले डमी लोग और बारूदी सुरंग व केमिकल हमले झेल सकने वाली बख्तरबंद कारें, सब कुछ इस बार दिल्ली में देखने को मिलेगा। 2023 के G20 के बाद दिल्ली में इतनी सख्त सुरक्षा पहली बार दिखेगी। इस बार का बंदोबस्त G20 से भी बड़ा है।
विदेशी मेहमानों की सुरक्षा सिर्फ सड़क तक सीमित नहीं रहेगी। छतों पर निगरानी, आधुनिक कैमरा सिस्टम, हेलीकॉप्टर से कमांडो तैनाती और ड्रोन से निपटने वाले सुरक्षा इंतजामों पर जोर दिया जा रहा है। कुछ जगहों पर बिना पायलट वाले हवाई वाहनों यानी ड्रोन को संभावित खतरे के तौर पर देखते हुए उन्हें रोकने वाली तकनीक भी लगाई जा रही है।
हर बड़े मेहमान, होटल और काफिले के लिए अलग पहचान संकेत तय किए जाने की बात सामने आई है। खुफिया इनपुट के आधार पर आयोजन स्थल के आसपास अचानक विरोध या भड़काऊ नारे लिखे जाने जैसी कोशिशों को लेकर भी तैयारी है। इसके लिए लगातार निगरानी और सफाई दल लगाए जाने की जानकारी दी गई है।
पुतिन के साथ आएगा चलता-फिरता 'बंकर'
- रूसी राष्ट्रपति पुतिन की सुरक्षा इस पूरे इंतजाम का सबसे हाई-प्रोफाइल हिस्सा है। उनके सड़क मार्ग के लिए रूस से ऑरस सेनेट (Aurus Senat) की बख्तरबंद कार लाई गई है। इसे अक्सर 'रोलिंग बंकर' कहा जाता है। कार को गोलीबारी, विस्फोट और दूसरे गंभीर सुरक्षा खतरों से बचाव के लिए तैयार किया गया है।
- इसमें रन-फ्लैट टायर और आपात ऑक्सीजन जैसी सुविधाओं का भी जिक्र है। यह बख्तरबंद कार बारूदी सुरंग, स्नाइपर शॉट और केमिकल अटैक से बचाती है।
- हवाई यात्रा के लिए पुतिन जिस विशेष इल्यूशिन आईएल-96-300पीयू विमान का इस्तेमाल करते हैं, उसे 'फ्लाइंग क्रेमलिन' कहा जाता है। इसमें सुरक्षित संचार और कमांड सुविधाओं के साथ कई सुरक्षा प्रणालियां मौजूद बताई जाती हैं।
खाना भी सुरक्षा जांच से गुजरेगा, होटल भी कमांड सेंटर बनेंगे
पुतिन के प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा सिर्फ वाहन और विमान तक नहीं है। रूसी दल के साथ पर्सनल शेफ और खाने की जांच के लिए पोर्टेबल लैब आ रही है। सुरक्षा को चकमा देने के लिए डमी डिग्निटरीज यानी नेताओं के हमशक्ल भी तैनात किए जा रहे हैं।
निजी शेफ और खाने की जांच के लिए पोर्टेबल लैब जैसी व्यवस्थाएं भी साथ रहेंगी। प्रतिनिधिमंडल के जैविक कचरे को सुरक्षित तरीके से संभालने की व्यवस्था का भी जिक्र है। कुछ होटलों में सुरक्षा बढ़ाने के लिए नेताओं जैसे दिखने वाले डमी प्रतिनिधियों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है।
आसमान से जमीन तक हाई-टेक पहरा
दिल्ली के होटलों को विशेष सिक्योर जोन में बांटा गया है, जहां DCP और स्पेशल कमिश्नर स्तर के अफसर कमान संभाल रहे हैं। छतों पर AI-गाइडेड स्नाइपर तैनात हैं। संदिग्ध हरकतों को पकड़ने के लिए जेस्चर-रिकग्निशन कैमरे लगाए गए हैं। UAV खतरों से निपटने के लिए सिग्नल जैमर और ड्रोन-किलर सिस्टम लगाए गए हैं।
अचानक विरोध-प्रदर्शन और भड़काऊ नारों को रोकने के लिए एंटी-ग्राफिटी टीमें सड़कों पर 24/7 गश्त कर रही हैं। हर वीआईपी और काफिले का अलग कोड नेम रखा गया है।
लेकिन भारत को सिर्फ सुरक्षा नहीं, कारोबार में भी फायदा चाहिए
ब्रिक्स की मेजबानी भारत के लिए सिर्फ कूटनीतिक शोकेस नहीं है। असली सवाल यह है कि इससे भारतीय कारोबार को क्या मिलेगा। भारत की कोशिश व्यापार प्रक्रिया आसान करने, भुगतान व्यवस्था मजबूत करने और छोटी कंपनियों के लिए विदेशी बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने की है।
एन्सो ग्रुप के प्रबंध निदेशक वैभव मालू ने फॉर्च्यून इंडिया से कहा कि भारत को ब्रिक्स के जरिए निर्यात भुगतान तेज करने, प्रमाणन की अड़चन घटाने और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए वित्त उपलब्ध कराने पर जोर देना चाहिए।
ब्रिक्स देशों को भारत का वस्तु निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में 82 अरब डॉलर और सेवा निर्यात 2024 में 31।3 अरब डॉलर बताया गया है। दवा, इंजीनियरिंग, डिजिटल सेवाएं, ऊर्जा सुरक्षा और अहम खनिज ऐसे क्षेत्र हैं जहां भारत अवसर देख रहा है।
UPI से लेकर हरित ऊर्जा तक भारत का बड़ा एजेंडा
भारत ब्रिक्स देशों के बीच सीमा पार भुगतान को आसान बनाने और स्थानीय मुद्राओं में लेनदेन बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। यहां किसी नई ब्रिक्स मुद्रा की बात नहीं है। फोकस मौजूदा भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने पर है। यूपीआई इस चर्चा में भारत की सबसे बड़ी ताकतों में है।
तकनीक के मोर्चे पर ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड, ब्रिक्स इन्क्यूबेटर नेटवर्क और डिजिटल सार्वजनिक ढांचे का भंडार जैसे प्रस्ताव रखे गए हैं। ऊर्जा में स्मार्ट ग्रिड, ऊर्जा भंडारण, हाइड्रोजन, जैव ईंधन, अहम खनिज और कार्बन पकड़ने वाली तकनीक पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम हो रहा है।
11 देशों का ब्रिक्स, भारत के लिए मौका भी और संतुलन की परीक्षा भी
ब्रिक्स अब पुराने पांच देशों तक सीमित नहीं है। ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका के साथ मिस्र, इथियोपिया, सऊदी अरब, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया का जिक्र है। इन देशों के आर्थिक और भू-राजनीतिक हित हमेशा एक जैसे नहीं हैं।
विदेश मंत्रालय के आर्थिक संबंध सचिव सुधाकर दलेला ने कहा, "ब्रिक्स अब सिर्फ आर्थिक मंच नहीं रहा। यह ग्लोबल साउथ की रणनीतिक और विकास से जुड़ी आकांक्षाओं का मंच बन चुका है।" उनके मुताबिक, अगला दौर इस बात पर निर्भर करेगा कि सदस्य देश तकनीक और व्यापार को साथ लेकर कितनी ठोस साझेदारी बना पाते हैं।
यही भारत के लिए असली परीक्षा है। अमेरिका, यूरोप और जापान जैसे साझेदारों के साथ रिश्ते बनाए रखते हुए ब्रिक्स में चीन और रूस समेत अलग-अलग हित वाले देशों के साथ तालमेल बैठाना होगा। अगर दिल्ली की अध्यक्षता घोषणाओं से आगे बढ़कर कारोबार, भुगतान, तकनीक और ऊर्जा में जमीन पर नतीजे देती है, तभी यह शिखर बैठक भारत के लिए बड़ा आर्थिक फायदा साबित होगी।